किसी रेल्वे जंक्शन का प्लॅटफॉर्म| वहाँ कई लोग ट्रेन में बैठ कर यात्रा के लिए निकलते हैं| भागे भागे प्लॅटफॉर्म पर आते हैं, ट्रेन पकड़ते हैं और आगे निकल जाते हैं| पर यह सिर्फ रेल्वे स्टेशन पर ही नही घटता है| जीवन में ऐसे कई जंक्शन्स और अनगिनत प्लॅटफॉर्म होते हैं| प्लॅटफॉर्म एक माध्यम है जो हमें आगे ले जाता है| कभी स्कूल एक प्लॅटफॉर्म होता है और वहाँ विद्या मिलती है| कभी दु:ख एक प्लॅटफॉर्म होता है जो हमें आगे जाने के लिए सीखाता है|
जीवन भी एक प्लॅटफॉर्म है| ज्ञानी कहते हैं कि जीवन एक युनिवर्सिटी है| यहाँ इन्सान सीखते सीखते आगे जाता है| उसे एक प्लॅटफॉर्म से दूसरा ऐसे कई प्लॅटफॉर्म और कई ट्रेनें मिलती जाती हैं| ऐसे ही आगे बढ़ते हुए एक दिन साधक या शिष्य को गुरू की ओर ले जानेवाला प्लॅटफॉर्म मिलता है| यह कहानी उस प्लॅटफॉर्म की है| जब पहली बार गुरू साधक को पुकारता है, तब उसे तो भ्रम ही लगता है| लेकीन धीरे धीरे गुरू पुकारता रहता है| उसके बाद अदृश्य जरियों से गुरू शिष्य से मिलता है और उसका साथ देता रहता है| अहंकार और अज्ञान से भरा हुआ शिष्य का घड़ा गुरू एक एक अंजुली से खाली करता जाता है| और यह करते समय छलकने की आवाज़ भी नही होने देता है, कौन जाने, शिष्य नाराज होगा! ऐसा एक न दिखाई देनेवाला सत्संग शुरू होता है| एक सूक्ष्म शल्य- क्रिया शुरू होती है| और जब गुरू शिष्य को अपने पास पुकारता है, तो शिष्य को आना ही होता है| उसे गुरू के पास जाते समय कई बाधाएँ बीच में आ जाती है| उसका पूरा अतीत उसे रोकता है| लेकीन जब गुरू पुकारता है, तो उसे आना ही पड़ता है| शिष्य की इच्छा और आकांक्षाएँ गिर जाती है और सिर्फ गुरू के प्रति समर्पण की इच्छा बचती है| शिष्य की भाव दशा ऐसी हो जाती है-
मेरा है क्या, सब कुछ तेरा
जाँ तेरी, साँसें तेरी
तुने आवाज़ दी देख मै आ गई
प्यार से है बड़ी क्या कसम
या
मेरी आँखों में आँसू तेरे आ गए
मुस्कुराने लगे सारे ग़म
अब यहाँ से कहाँ जाएँ हम
तेरी बाँहों में मर जाएँ हम
Showing posts with label गुरू. Show all posts
Showing posts with label गुरू. Show all posts
Friday, June 4, 2021
"राज" और "सिमरन": एक प्लॅटफॉर्म की कहानी
Tuesday, January 31, 2017
Stories of Gurdjieff, the Rascal Saint
Hello.
Sharing a wonderful post of Sadhguru which I came across here.
Sadhguru tells us of
the rascal saint, George Gurdjieff, and his “unconventional”
methods with his disciples.
Sadhguru: George
Gurdjieff, who lived in Russia in the early part of the twentieth
century, was a wonderful master. But Gurdjieff was known as a rascal
saint because his methods were very drastic and he did crazy things
with people. He played unbearable tricks on people!
Gurdjieff was known as a rascal saint because his methods were very drastic and he did crazy things with people.
Sharing a wonderful post of Sadhguru which I came across here.
Stories of
Gurdjieff, the Rascal Saint
Gurdjieff was known as a rascal saint because his methods were very drastic and he did crazy things with people.
Subscribe to:
Posts (Atom)