Friday, December 14, 2018

एचआयवी एड्स इस विषय को लेकर जागरूकता हेतु एक साईकिल यात्रा के अनुभव: ८. हसेगांव (लातूर) से अहमदपूर

८. हसेगांव (लातूर) से अहमदपूर
 

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कल रात भर अच्छी बारीश हुई| कल मै जहाँ ठहरा था, वहाँ गर्मी और मच्छरों ने नीन्द नही लेने दिया| लगभग पूरी रात जगा रहा| सुबह चार बजते ही संस्था के एक कार्यकर्ता मिलने आए| फिर कुछ देर उनसे बात हुई, अन्धेरे में ही थोड़ा टहलना भी हुआ| संस्था के कार्य के बारे में बात होती रही| बाद में उन्होने मेरे लिए बड़े प्यार से पोहे भी बनाए| अब भी बारीश का मौसम बना है, इसलिए सुबह उजाला होते देर लगी| इसलिए १९ नवम्बर हर रोज के बजाय कुछ देरी से निकला| निकलते समय भी रवी जी ने और बच्चों ने बड़े जोश से मुझे विदा किया| सेवालय में यह विजिट इस यात्रा का शायद सबसे बड़ा अनुभव रहा! बहुत कुछ देखने को और समझने को मिल रहा है! और सेवालय में आने के बाद यहाँ से जाना कठिन होता है, यह सुना था, अब उसका अनुभव ले रहा हूँ| एक तो मौसम आज कुछ अलग है और रात में विश्राम न होने से भी थकान हो रही‌ है| आज वैसे तो मुझे छोटा ही चरण है| ७६ किलोमीटर ही चलाने है| अब अगले शनिवार तक ज्यादा बड़े चरण नही है| अब धीरे धीरे यात्रा अपनी समाप्ति की तरफ बढ़ रही‌ है|






Wednesday, December 12, 2018

एचआयवी एड्स इस विषय को लेकर जागरूकता हेतु एक साईकिल यात्रा के अनुभव: ७. अंबेजोगाई से हसेगांव (लातूर)

७. अंबेजोगाई से हसेगांव (लातूर)
 

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१८ नवम्बर की भोर, यात्रा का सांतवा दिन| आज रविवार है और आज का चरण वैसे छोटा भी है| आज ७५ किलोमीटर साईकिल चलानी है और लगातार कई दिनों तक साईकिल चलाने से ये ७५ किलोमीटर अब सिर्फ लग रहे हैं| जैसे एक पेडल मारने से साईकिल अपने आप कुछ आगे जाती है, एक पेडल का मूमेंटम दूसरे पेडल में मिलता है, उसी प्रकार कई दिनों का मूमेंटम अब मेरे पास है| बस डर एक ही है कि आज के रूट पर भी कुछ हद तक निम्न दर्जे की सड़क है| ठीक सवा छह बजे अंबेजोगाई से निकला| यशवंतराव चव्हाण चौक में कल मेरा स्वागत हुआ था, वहीं से लातूर रोड़ की तरफ बढ़ा| शहर से बाहर निकलने तक सड़क ठीक है, लेकीन जब पहला मोड़ आया, तो सड़क बिल्कुल टूटी फूटी मिली| लेकीन यहाँ के लोगों ने बताया कि जल्द ही‌ अच्छी सड़क मिलेगी, इस सड़क का लगभग काम पूरा हो चुका है| और मै अब तक ऐसी ऐसी सड़कों से गुजर चुका हूँ कि मुझे सड़क कम दर्जे की हो तो कुछ फर्क ही नही लग रहा है| उसका भी अभ्यास हो गया है| इसलिए पथरिली सड़क पर भी आराम से आगे बढ़ा| दूर से गिरवली सबस्टेशन का परिसर और अंबेजोगाई- परली रोड़ पर स्थित टीवी टॉवर दिखा| बचपन में अक्सर यहाँ आया करता था! उस परिसर का दूर दर्शन कर यादों को ताज़ा कर लिया| थोड़ी ही दूरी पर अच्छा दो लेन का हायवे मिला| अब लातूर तक अच्छा हायवे होगा|





Monday, December 10, 2018

एचआयवी एड्स इस विषय को लेकर जागरूकता हेतु एक साईकिल यात्रा के अनुभव: ६. बीड से अंबेजोगाई

६. बीड से अंबेजोगाई
 

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१७ नवम्बर की भोर| इन्फँट इंडिया बाल गृह से निकला| निकलते समय दत्ताजी और सब बच्चों ने मुझे विदा कहा| बड़े प्यार से मेरे लिए बहुत जल्द उठ कर भोजन भी बनाया| इस हिल से उतरते समय नीचे के सरोवर का परिसर बहुत सुन्दर लगा! कल की मुलाकातें याद करते हुए आगे बढा| आज भी मेरे लिए कुछ बहुत निम्न स्तर की सड़क लगनेवाली है|‌ आज ऐसा तीसरा दिन होगा जब शुरू के तीस- पैतीस किलोमीटर तक ऐसी सड़क होगी‌ और उसके बाद बेहतर सड़क मिलेगी| सोच रहा हूँ या उम्मीद कर रहा हूँ कि सिर्फ पैतीस किलोमीटर तक ही ऐसी सड़क मिले| आज सबसे पहले मुझे तो मांजरसुंबा घाट पार करना है| हायवे पर आते ही घाट की चढाई शुरू हुई| घाट तो मामुली ही है| लेकीन घाट में टैफिक जाम है! एक पल के लिए डर लगा कि कहीं फंस तो नही जाऊँगा? लेकीन हाथ में साईकिल है, इसलिए कुछ देर तक ट्रकों की कतार के दाए तरफ से आगे बढा और जब सड़क सँकरी हुई, तब बाए तरफ से आगे बढ़ा| सड़क के किनारे से आगे निकला| छोटा ही हो, घाट तो है ही| लेकीन उससे ज्यादा डरावनी बात काँच के छोटे टूकडे हैं जो जगह जगह फैले हुए हैं| उन पर से साईकिल चलाते समय वाकई डर लग रहा है| अगर घाट में साईकिल पंक्चर हुई तो??... लेकीन ऐसा हुआ नही| आसानी से छोटी सी जगह से आगे निकला और फिर स्लो हुए ट्रक्स को ओवरटेक भी करता गया| कुछ ही मिनटों में घाट पार हुआ और मांजरसुंबा चौराहे पर पहला ब्रेक लिया|







Saturday, December 8, 2018

एचआयवी एड्स इस विषय को लेकर जागरूकता हेतु एक साईकिल यात्रा के अनुभव: ५. बार्शी से बीड

५. बार्शी से बीड
 

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१६ नवम्बर, आज इस यात्रा का पाँचवा दिन है| कल का दिन साईकिलिंग के लिहाज़ से बहुत बढिया रहा| अब साईकिल चलाना वाकई आसान हो गया है| अब किलोमीटर की‌ दूरियाँ महसूस ही नही हो रही है| कल की चर्चाएँ भी अच्छी हुई थी|‌ अब आज बार्शी से बीड के पास पाली में होनेवाले बाल गृह में जाना है| आज की दूरी लगभग ९५ किलोमीटर होगी| हर रोज की तरह सुबह उजाला होते होते बार्शी से निकला| बार्शी काफी बड़ा शहर है| कैंसर हॉस्पिटल से आगे आगळगाँव की‌ सड़क पूछते पूछते आगे बढ़ा| यहाँ से कुछ दूरी तक बहुत साधारण सड़क है| और अन्दरूनी सड़क होने के कारण बीच में टूटी भी होगी! कुछ दूरी पार करने के बाद ठीक कल जैसी सड़क! लेकीन आसपास नजारे बेहद अनुठे हैं| अब धीरे धीरे सोलापूर जिला समाप्त हो रहा है| दूर कुछ पहाड़ दिखाई‌ दे रहे हैं| उसके आगे पहले उस्मानाबाद और बाद में बीड जिला शुरू होगा| टूटी सड़क जल्द ही खत्म हुई| हालांकी सड़क का निम्न स्तर आगे भी‌ बना रहा|









Thursday, December 6, 2018

एचआयवी एड्स इस विषय को लेकर जागरूकता हेतु एक साईकिल यात्रा के अनुभव: ४. पंढरपूर से बार्शी

४. पंढरपूर से बार्शी

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१५ नवम्बर| कल लगातार दूसरे दिन पंक्चर होने से एक तरह से अब भी अस्वस्थ हूँ| पंक्चर तो मैने ठीक कर दिया है, लेकीन फिर होने का डर है| कल सोने में बहुत देर होने पर भी सुबह फ्रेश लग रहा है| सुबह बच्चों से विदा लिया, पालवी संस्था की दिदी से विदा लिया| अच्छी खासी ठण्ड लग रही है| पंढरपूर गाँव में से शेटफळ की सड़क पूछ कर आगे निकला|‌ जब इस यात्रा का रूट प्लैन बनाया और योजना बनाई, तो हर दिन लगभग ८०- ८५ किलोमीटर साईकिल चलाने का लक्ष्य रखा| ऐसे रूट बनाते समय कई बार बहुत इंटेरिअर की सड़के लेनी पड़ी| आज भी मुझे ऐसी ही सड़क से जाना है| पंढरपूर गाँव के बाद चंद्रभागा नदी का पूल पार करते ही ऐसी ही सड़क लगी! पंढरपूर इतना बड़ा तीर्थ क्षेत्र और उसके बाद दिया तले अंधेरा! देखा तो पूरी तरह उखाड़ दी है! नई सड़क बनाने के पहले पुरानी को तोड़ दिया है! मन ही मन उम्मीद कर रहा हूँ कि आगे जा कर कुछ ठीक होगी|





चन्द्रभागा और पण्ढरपूर!

Tuesday, December 4, 2018

एचआयवी एड्स इस विषय को लेकर जागरूकता हेतु एक साईकिल यात्रा के अनुभव: ३. इन्दापूर से पण्ढरपूर

३. इन्दापूर से पण्ढरपूर
 

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१४ नवम्बर की भोर| आज बाल दिन है और आज मुझे पहले बाल गृह में पहुँचना है| आज इस साईकिल यात्रा का तिसरा दिन है| इसलिए शरीर कुछ लय में आ गया है| सुबह की ठण्डक में‌ इन्दापूर महाविद्यालय से निकला| सुबह घुमनेवाले लोगों को सड़क पूछ कर आगे बढ़ा| कल के हायवे के मुकाबले इन्दापूर- अकलूज सड़क काफी शान्त लगी| अब वाकई लग रहा है कि मै ग्रामीण क्षेत्र में पहुँच गया हूँ| जल्द ही‌ पुणे जिला समाप्त हुआ| अकलूज में पहला ब्रेक लिया| पहले दो दिनों के अनुभव के बाद मै नाश्ते के लिए सिर्फ केला, चाय- बिस्कीट, चिक्की (गूड़पापडी) और चिप्स इनको ही ले रहा हूँ| पेट के लिए हल्का होता है| डबल चाय- बिस्कीट के दो ब्रेक मेरे लिए पर्याप्त होते हैं| साथ ही चिक्की/ बिस्कीट पास रखता हूँ, उन्हे बीच बीच में खाता हूँ| पानी में इलेक्ट्रॉल डाला ही हुआ है| लगातार चलाने के कारण धीरे धीरे मेरे लिए साईकिल चलाना और आसान होता जा रहा है|






Sunday, December 2, 2018

एचआयवी एड्स इस विषय को लेकर जागरूकता हेतु एक साईकिल यात्रा के अनुभव: २. केडगांव से इन्दापूर (८५ किमी)

२. केडगांव से इन्दापूर (८५ किमी)

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१३ नवम्बर की भोर| आज इस यात्रा के दूसरे दिन केडगाँव से निकलना है| अच्छा विश्राम होने पर सुबह ताज़गी महसूस हो रही है| उजाला होते होते तैयार हो कर निकला| आज इन्दापूर तक मुझे यही हायवे होगा| कल के मुकाबले मुझे आज कम समय लगेगा| लेकीन साईकिल यात्रा में अक्सर अपेक्षा के विपरित होता रहता है| आज भी इसका अनुभव आनेवाला है| जब निकला तब काफी ठण्ड है| इस यात्रा में हर रोज मुझे सुबह एक- डेढ घण्टे तक ठण्ड मिलनेवाली है| और दोपहर में काफी गर्मी भी मिलेगी| सुबह की ठण्डक में हायवे पर साईकिल चलाने का आनन्द लेता रहा| सूर्योदय का अच्छा दृश्य दिखाई दिया|









Thursday, November 29, 2018

एचआयवी एड्स इस विषय को लेकर जागरूकता हेतु एक साईकिल यात्रा के अनुभव: १. चाकण से केडगांव (८४ किमी)

१. चाकण से केडगांव (८४ किमी)
 

नमस्ते! हाल ही में महाराष्ट्र में १४ दिनों में ११६५ किलोमीटर की साईकिल यात्रा पुरी की| अब उसके अनुभव आपके साथ शेअर करता हूँ| संक्षेप में इस यात्रा की योजना कैसे बनी, यह बताता हूँ| मई २०१८ में योग प्रसार हेतु मैने साधारण सी एटलस साईकिल पर ५९५ किलोमीटर की यात्रा की थी| उस दौरान एक सामाजिक माध्यम के तौर पर साईकिल क्षमता का एहसास हुआ था| इस तरह की और यात्रा करने की इच्छा हुई| और साईकिल चलानी है तो किसी सामाजिक उद्देश्य और सामाजिक सन्देश के साथ ऐसी यात्रा करूँ, यह लगा था| परभणी के मेरे साईकिल मित्र डॉ. पवन चाण्डक कई सालों से एचआयवी इस विषय को लेकर साईकिल यात्रा करते हैं, कई एचआयवी बाल गृहों को सहायता भी करते हैं| इसके साथ मेरी पत्नि आशा पीछले दस सालों से एचआयवी क्षेत्र में कार्य कर रही है| इन दोनों बातों को मिला के इस साईकिल यात्रा की योजना बनी| १ दिसम्बर को विश्व एचआयवी निर्मूलन दिन है, तो उसके उपलक्ष्य में इस यात्रा की तैयारी की गई| यात्रा के उद्देश्य एवम् उसका स्वरूप पहले ही आपको बताया है|





Saturday, November 10, 2018

एचआयवी एडस इस विषय को लेकर जागरूकता हेतु एक साईकिल यात्रा

नमस्ते! पीछली बार मैने जब योग- प्रसार हेतु साईकिल यात्रा की थी, तब एक माध्यम के तौर पर साईकिल की क्षमता का अहसास हुआ था| साईकिलिंग तो अक्सर करता रहता हूँ, लेकीन सोचा कि अगर एक माध्यम के तौर पर साईकिल इतनी उपयुक्त है, तो क्यों ना किसी सामाजिक विषय को ले कर साईकिल चलाई जाए| जब ऐसा सोच रहा था, तो मेरे सामने दो बातें थी- मेरी पत्नि आशा एचआयवी- एडस इस विषय पर रिलीफ फाउंडेशन संस्था के साथ कई सालों से काम कर रही हैं| रिलीफ फाउंडेशन महाराष्ट्र राज्य एडस नियंत्रण सोसायटी के अन्तर्गत एचआयवी के बारे में जागरुकता और मायग्रंट वर्कर्स इन विषयों पर काम करती है| उसके अलावा परभणी के मेरे साईकिलिस्ट मित्र डॉ. पवन चाण्डक जी भी कई सालों से एचआयवी होनेवाले बच्चों के बाल गृहों को सहायता करते हैं| इन दोनों बातों को मिला कर महाराष्ट्र में एक सोलो साईकिल एक्स्पीडीशन की योजना बनाई| रिलीफ फाउंडेशन इस साईकिल यात्रा का को- ऑर्डीनेशन करेगा|‌ यह योजना इस प्रकार है|

हर सुबह लगभग ८०+ किलोमीटर साईकिल चलाऊँगा| एचआयवी होनेवाले बच्चों के बाल गृह चलानीवाली चार संस्थाओं में भेंट करूँगा| वहाँ चल रहा कार्य, वहाँ के कार्यकर्ताओं के अनुभव इस पर चर्चा होगी|‌ उसके अलावा बच्चों से गपशप और संवाद होगा| इसके अलावा दुसरी भेंट कार्यकर्ताओं से होगी| उनके अनुभव, उनकी सक्सेस स्टोरीज आदि पर चर्चा होगी| ये चार संस्थाएँ ऐसी है- पंढरपूर- पालवी प्रोजेक्ट, बीड- इन्फँट इंडिया संस्था, हसेगांव (लातूर)- सेवालय संस्था और अकोला- सर्वोदय एडस बालगृह|

इन संस्थाओं के बीच दूरी बड़ी है, इसलिए यात्रा के कई चरण होंगे| इस यात्रा में वहाँ के स्थानीय कार्यकर्ताओं से मिलूँगा, एचआयवी एडस के बारे में जागरुकता से जुड़े ब्रॉशर्स लोगों को दूँगा| जहाँ अवसर मिलेगा, वहाँ मै छोटे ग्रूप के साथ चर्चा करूँगा- एचआयवी होनेवाले लोगों को ट्रीटमेंट का बेहतर लाभ मिले, इसलिए स्वास्थ्य का ख्याल कैसा रखना चाहिए, उसके लिए जीवन शैलि किस प्रकार की होनी चाहिए, योग और फिटनेस का इस सन्दर्भ में महत्त्व आदि पर बोलूँगा| मेरी साईकिल डायरी में ये अनुभव समाज के सामने रखूँगा| कितनी विपरित परिस्थिति में ये लोग कार्य करते हैं, यह समाज के सामने आना भी तो चाहिए|

उद्देश्य
१. अच्छा कार्य करनेवाले लोगों के अनुभव सुनना, उनसे मिलना और उनसे बातचीत करना, यह उनके लिए बहुत बड़ा 'पॉझिटीव्ह स्ट्रोक' होता है|
२. एचआयवी होनेवाले बच्चों के साथ उन्हे रिफ्रेश करनेवाला अनौपचारिक संवाद|
३. इस विषय के विविध पहलू, उसकी जटिलताएँ, दिक्कतें सामने रखना और समाज की जागरूकता बढाने की आवश्यकता पर बल देना|
४. विविध तरह की सक्सेस स्टोरीज और दिक्कतों से चल रहा संघर्ष समाज के सामने रखना|


यात्रा का रूट 

१४ नवम्बर को बाल दिन है| उस दिन पहले बाल गृह में पहुँचने की योजना है| इसलिए १२ नवम्बर को निकलूँगा| इस यात्रा में महाराष्ट्र के दस जिलों में साईकिल चलाऊँगा|

दिन १ १२ नवम्बर, सोमवार: चाकण से केडगांव: ८४ किमी
दिन २ १३ नवम्बर, मंगळवार: केडगांव से इंदापूर: ८५ किमी
दिन ३ १४ नवम्बर, बुधवार: इंदापूर से पंढरपूर: ७२ किमी
दिन ४ १५ नवम्बर, गुरुवार: पंढरपूर से बार्शी: ८२ किमी
दिन ५ १६ नवम्बर: शुक्रवार: बार्शी से पाली, बीड: १०४ किमी
दिन ६ १७ नवम्बर: शनिवार: बीड से अंबेजोगाई: ९० किमी
दिन ७ १८ नवम्बर: रविवार: अंबेजोगाई- लातूर- हसेगांव: ८४ किमी
दिन ८ १९ नवम्बर: सोमवार: हसेगांव से अहमदपूर: ७५ किमी
दिन ९ २० नवम्बर: मंगळवार: अहमदपूर से नांदेड: ६७ किमी
दिन १० २१ नवम्बर: बुधवार: नांदेड से हिंगोली: ९२ किमी
दिन ११ २२ नवम्बर: गुरुवार: हिंगोली से वाशिम: ५१ किमी
दिन १२ २३ नवम्बर: शुक्रवार: वाशिम से अकोला: ७६ किमी
दिन १३ २४ नवम्बर: शनिवार: अकोला से रिसोड: ९७ किमी
दिन १४ २५ नवम्बर: रविवार: रिसोड से परभणी: १०० किमी

कुल दिन १४ और कूल दूरी लगभग ११६५ किलोमीटर|

२५ नवम्बर को यह यात्रा समाप्त होगी| विश्व एचआयवी दिन अर्थात् १ दिसम्बर को मेरे अनुभव शेअर करूँगा| यह काम किस तरह चल रहा है, क्या दिक्कते हैं, इस पर लिखूँगा (जैसे संस्था के कार्यकर्ताओं को लोगों द्वारा मारना- पीटना, संस्था की इमारत गिरायी जाना और अन्य भी)| एचआयवी का मतलब सिर्फ लोगों को पता होनेवाली चार चीज़ें ही नही, बल्की उसमें कई जटिलताएँ होती हैं, एचआयवी होनेवाले व्यक्तियों की कई समस्याएँ होती हैं और उन पर सोल्युशन्स भी होते हैं (जैसे एआरटी थेरपी के साथ 'पॉजिटिव' जीवन शैलि) ये सब मै समाज के सामने रख सकूँगा| और किसी भी सामाजिक समस्या के पीछे गहराई में अज्ञान, गलत तरह की सोच, जागरुकता और दायित्व का अभाव होते हैं| उन पर भी चर्चा होने में सहायता होगी|
 

अगर आपकी जानकारी में इस यात्रा के रूट पर एचआयवी विषय पर काम करनेवाली कोई संस्था है, तो उसके बारे में आप बता सकते हैं| यात्रा शुरू होने पर हर दिन का अपडेट भी आपको देता रहूँगा| बहुत बहुत धन्यवाद|

मेरी पीछली साईकिल यात्राओं के बारे में आप यहाँ पढ़ सकते हैं: www.niranjan-vichar.blogspot.com (मेरा मोबाईल नंबर:  094221088376)

इस साईकिल यात्रा का समन्वयन रिलीफ फाउंडेशन, भोसरी, पुणे द्वारा किया जा रहा है| सम्पर्क: 07350016571


Sunday, November 4, 2018

साईकिल पर कोंकण यात्रा भाग ८ (अन्तिम): देवगड़ से वापसी...

८ (अन्तिम): देवगड़ से वापसी...
 

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कोस्टल रोड़ से कुणकेश्वर जाने के बाद अगले दिन सबके साथ और कुछ जगह पर घूमना हुआ| साईकिल के बिना देवबाग बीच और तारकर्ली बीच देखना हुआ| समय की कमी के कारण साईकिल पर और कहीं जाना नही हुआ| कम से कम देवगड़- आचरा बीच जाने की इच्छा थी| बीच के साथ कोंकण के अन्दरूनी गाँवों का दर्शन होता| पर वह सम्भव नही हो सका| पत्नि और बेटी साथ में‌ होने की वजह से वापसी के रूट पर कम से कम गगनबावडा तक जाने की इच्छा भी‌ अधूरी रह गई| उनके साथ ही जाना पड़ा| वैसे तो कुणकेश्वर- जामसंडे की सड़क पर जो तिखी चढाई आती है, वह मैने साईकिल पर पार की‌ थी| पीछली बार गाडी पर जाते समय यही चढाई गगनबावडा घाट से भी अधिक खतरनाक मालुम पड़ी थी| इसलिए गगनबावडा घाट साईकिल पर न जाने का मलाल नही हुआ| वैसे भी इन दिनों में इतनी चढाईयाँ पार की है कि एक घाट इतना मायने नही रखता है|‌ खैर|