Tuesday, October 16, 2018

साईकिल पर कोंकण यात्रा भाग २: पुणे से सातारा (१०५ किमी)

भाग २: पुणे से सातारा (१०५ किमी)
 

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७ सितम्बर की सुबह| आज इस यात्रा का बड़ा दिन है| आज सौ किलोमीटर से अधिक साईकिल चलाऊँगा| सुबह उजाला होते होते शुरुआत की| आज पहले ही घण्टे में कात्रज घाट या कात्रज टनेल की चढाई होगी| इस रूट पर कुछ दूरी तक पहले भी गया हूँ, इसलिए कोई कठिनाई नही है| पुणे के धायरी इलाके से निकलने के बाद थोड़ी देर में कात्रज टनेल की चढाई शुरू हुई| साईकिल में ब्लिंकर ऑन कर दिया| साथ में साईकिल पर और हेलमेट पर भी कई जगह पर लाल स्टिकर्स चिपकाए हैं| और लाईट में चमकनेवाला रिफ्लेक्टिव जैकेट भी पहना है| आज के दिन जरूर मुझे बरसात मिलेगी, उसकी भी अच्छी तैयारी की है| टनेल तक चढाई है और उसके बाद लम्बी उतराई! टनेल लगभग आठ किलोमीटर की चढाई के बाद आता है| सवा किलोमीटर टनेल में साईकिल चलाई| वाकई यह अनुभव कितने भी बार लिया हो, फिर भी अनुठा है| धीरे धीरे जैसे टनेल खत्म होता है, उजाला फिर से आता है|‌ यह हम सबके जीवन कहानि का भी हिस्सा है! अब यहाँ से निरंतर पच्चीस किलोमीटर तक उतराई|









Saturday, October 13, 2018

साईकिल पर कोंकण यात्रा भाग १: प्रस्तावना

भाग १: प्रस्तावना

नमस्ते! कोंकण में साईकिल पर घूमना मेरा कई बरसों का सपना सा था| पहले एक बार इसका असफल प्रयास भी किया था| लेकीन इस बार यह सपना सच हुआ| साईकिल पर कोंकण में घूम सका- अकेले सोलो साईकिलिंग करते हुए| अब इसके बारे में विस्तार से बात करता हूँ| पहली बात तो यह की यह यात्रा मेरी नई हायब्रिड साईकिल मेरीडा स्पीडर 100 पर पहली यात्रा है| मार्च में यह हायब्रिड साईकिल ली| इसपर दो शतक भी हुए, लेकीन हर बार पंक्चर हुआ| मेरी पुरानी एमटीबी साईकिल और यह हायब्रिड साईकिल में पुराने ज़माने का नोकिया का शुद्ध फोन- 3315 और अभी के जनरेशन का आई फोन सेवन जैसा अंतर है! इसलिए यह साईकिल सीखने में, समझने में और उसे अपनानें में बहुत दिक्कत हुई| साईकिल ही हो कर भी बहुत आधुनिक और अलग किस्म की साईकिल होने के कारण बहुत कुछ एडजस्ट करना पड़ा जैसे टायर प्रेशर, एक्सेसरीज के साथ तालमेल, सड़क पर ग्रिप आदि| धीरे धीरे यह सब सीखता गया| और इस प्रक्रिया में मेरे साईकिल मित्र आशिष फडणीस जी ने बहुत मार्गदर्शन दिया और साथ भी दिया! मेरे सभी सवालों और शंकाओं का धैर्य के साथ निरसन किया! वाकई मेरे सवाल बहुत थे और बहुत समस्याएँ भी आईं! कई बार तो लगता भी था कि इस नाज़ुक सी और बहुत रिजर्व किस्म की साईकिल के बजाय मेरी पुरानी एमटीबी साईकिल ही अच्छी जिसकी हर समस्या का इलाज हर अच्छे साईकिल दुकान में उपलब्ध है जबकी इस साईकिल को 'कुछ' भी हो गया, तो उसके लिए सीधे उसके शोरूम तक जाना पड़ रहा है| इसलिए मानसिक तौर पर भी काफी मशक्कत कर के साईकिल की बेसिक्स सीखनी पड़ी| लेकीन इन सबके दौरान आशिषजी ने बहुत मार्गदर्शन दिया और धीरे धीरे इस साईकिल से भी दोस्ती हो गई! इस साईकिल को मैने नाम भी दिया- मेरी!









Thursday, October 11, 2018

'योग जिज्ञासा: एटलस सायकलीवर योग यात्रा विशेषांक'

नमस्कार. नुकतंच जालना येथे 'योग संमेलन' झालं. चैतन्य योग केंद्र जालना व निरामय योग प्रसार व संशोधन केंद्रातर्फे आयोजित ह्या योग संमेलनामध्ये 'योग जिज्ञासा: एटलस सायकलीवर योग यात्रा विशेषांक' प्रकाशित करण्यात आला. गेल्या मे महिन्यामध्ये परभणी- जालना- औरंगाबाद व बुलढाणा जिल्ह्यात ५९५ किमी सायकल प्रवासातून विविध योग साधकांसोबत झालेल्या भेटी, त्यांचे अनुभव, ठिकठिकाणची योग केंद्रे/ योग साधक ह्यांचे पत्ते व संपर्क क्रमांक ह्यांचे तपशील असलेला हा विशेषांक आहे. योगामुळे आयुष्यात काय फरक पडला, हे २७ साधक- साधिकांच्या अनुभवातून आपल्याला कळतं. त्याबरोबरच मराठवाडा भागातल्या अनेक ठिकाणच्या योग केंद्रांची व योग- साधकांची माहितीही मिळते. हा विशेषांक प्रत्येक योग प्रेमी व सायकल प्रेमीच्या संग्रही असावा असा आहे.

हे पुस्तक कुठे मिळेल:

निरामय योग प्रसार व संशोधन संस्था, गोरेकाका भवन, अक्षदा मंगल कार्यालयाजवळ, विद्यापीठ रस्ता, परभणी ४३१४०१. सहभाग मूल्य रू. १००/-.
हे पुस्तक ऑनलाईन हवं असल्यास संस्थेच्या खात्यात पेमेंट करून पुढील मेलवर पावती व आपला पूर्ण पत्ता पाठवून संपर्क करता येईल. कूरियरने आपल्याला पुस्तक पाठवले जाईल.

डॉ. धीरज देशपांडे 09420033773, 08329595332 drdddeshpande@gmail.com
श्री. राहुल झांबड 09028968879, 09422968870 rahulzambad2014@gmail.com

संस्थेच्या बँक खात्याचे तपशील:

A/c no. 60116294640 Nirmaya yog Prasar and sanshodhan Kendra Parbhani Bank of Maharashtra Parbhani main branch, Parbhani IFSC code MAHB0000103

धन्यवाद! हे पुस्तक आपण घेऊ शकता किंवा आपल्या जवळच्या सायकलप्रेमी/ योग प्रेमींना भेट म्हणूनही देऊ शकता.
 
 

Wednesday, October 3, 2018

पिथौरागढ़ में भ्रमण ८ (अन्तिम): पिथौरागढ़ से वापसी

८ (अन्तिम): पिथौरागढ़ से वापसी
 

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२ दिसम्बर २०१७ की सुबह| कल रात की यात्रा कर पिथौरागढ़ पहुँचे| आज मुझे यहाँ से निकलना है, क्यों कि कल दोपहर को दिल्ली से ट्रेन है| वैसे तो कल लोहाघाट से ही मै जा सकता था, लेकीन उसके लिए एक रात लोहाघाट में ठहरना पड़ता| उसके बजाय सभी के साथ वापस पिथौरागढ़ आया, रात की यात्रा का भी अनुभव लिया| मेरे साथ में आए हुए लोग और कुछ दिन यहाँ रूकेंगे| लेकीन मुझे छुट्टियों की कमी के कारण निकलना होगा| लेकीन ये सांत दिन बेहद अनुठे रहे| लगभग ढाई सालों के बाद हिमालय का दर्शन हुआ और सद्गड़ और कांडा के रोमांचक ट्रेक हुए| हिमालय की गोद में होनेवाले गाँवों में रहने का मौका मिला! अब इन्ही यादों को संजोते हुए यहाँ से निकलना है|








Monday, October 1, 2018

पिथौरागढ़ में भ्रमण भाग ७: लोहाघाट यात्रा

७: लोहाघाट यात्रा
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१ दिसम्बर २०१७ की दोपहर लोहाघाट जाने के लिए जीप से निकले| सुबह अच्छा ट्रेक हुआ है और अब जीप से यात्रा करनी है| यहाँ पहाड़ी सड़कों पर वाहन से जाना भी एक तरह का ट्रेक होता है| रास्ते में कल रखा हुआ सामान एक दुकान से वापस लिया और आगे बढ़े| जीप से और भी नजारे दिखाई देते रहे| थोड़ी देर में पिथौरागढ़ पहुँचे| यहाँ से लोहाघाट ६० किलोमीटर है| लेकीन सड़क पूरी पहाड़ी होने के कारण यह थकानेवाली यात्रा होगी| पिथौरागढ़ से आगे गुरना माता मन्दीर के आगे एक जगह जीपें बहुत देर तक रूकी| यहाँ सड़क पर निर्माण कार्य किया जा रहा है जिसके लिए सड़क रोकी गई और वाहनों की लम्बी कतार हो गई| इस स्थान से कुछ दूरी पर नीचे खाई में रामगंगा बह रही है| थोड़ी देर नजारों का आनन्द लिया| दोपहर होते हुए भी दिसम्बर का दिन होने के कारण अब ठण्ड लग रही है|







Monday, September 3, 2018

पिथौरागढ़ में भ्रमण भाग ६: काण्डा गाँव से वापसी

६: काण्डा गाँव से वापसी
 

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१ दिसम्बर २०१७ की सुबह| काण्डा गाँव में विवाह का माहौल है| रातभर लोग जगते रहे| नाच- गाना भी हुआ| सुबह जल्दी निकलने की तैयारी है| यहीं से बारात निकलेगी| सुबह रोशनी आने के पहले अन्धेरे में इस गाँव का अलग दर्शन हुआ| चाय- नाश्ता ले कर यहाँ से निकलने के लिए चले| अब कल वाला ट्रेक फिर उल्टी दिशा में करना है| ट्रेक तो छोटा सा ही है| एक दो जगहों पर ही एक्स्पोजर है या पैर फिसलने जैसी सम्भावना है| कल आते समय मेरी बेटी को आशा ने लाया था| बहुत दूरी वह पैदल चली और फिर गोद में बैठ कर| ट्रेक तो मै आराम से कर लूँगा, लेकीन ऐसी जगह बेटी को उठा कर ले जाने का साहस मुझमें नही है| उसे तो यहाँ की स्थानीय दिदी उठा कर ले जाएगी, ऐसा तय हुआ| मैने कुछ सामान उठा लिया| और सुबह की ओस की‌ उपस्थिति में ही निकल पड़े| साथ ही बारात भी निकली| एक जगह मन्दीर में दर्शन ले कर वे आगे आएंगे| यहाँ कोई‌ भी वाहन नही आ सकता है| इसलिए सबको पैदल ही चलना है| अगर कुछ बड़ा सामान होता है, तो उसके लिए घोडा है|








Monday, August 27, 2018

पिथौरागढ़ में भ्रमण भाग ५: काण्डा गाँव का रोमांचक ट्रेक

५: काण्डा गाँव का रोमांचक ट्रेक

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३० नवम्बर २०१७ की दोपहर| सद्गड- पिथौरागड़ जा कर अब काण्डा गाँव जाना है| काण्डा गाँव सड़क से जुड़ा हुआ नही है, इसलिए यहाँ एक छोटा ट्रेक करना है| साथ के लोगों ने कहा भी, की कुछ ही समय पहले तक यहाँ बनी सड़क भी नही थी और दूर से ही पैदल चलना होता था| जैसे ही जीप से उतरे, सामने नीचे उतरती पगडण्डी दिखी और साथ में घोडे भी दिखे! इस ट्रेक के बारे में रिश्तेदारों ने बताया भी था| और शुरू हो गया एक सुन्दर ट्रेक! सड़क से पगडण्डी सीधा जंगल में जाने लगी और नीचे भी उतरने लगी| एक घना जंगल सामने आया और पगडण्डी धीरे धीरे और सिकुड़ती गई|








Monday, August 13, 2018

पिथौरागढ़ में भ्रमण भाग ४: काण्डा गाँव के लिए प्रस्थान

४: काण्डा गाँव के लिए प्रस्थान
 

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३० नवम्बर २०१७| आज सद्गड से निकलना है| गाँव में से दिखता हुआ कल का ध्वज मंदीर! वह इस परिसर का सबसे ऊँचा स्थान है| और वहाँ नेपाल का नेटवर्क मोबाईल ने पकड़ा था! आज थोड़ी गाँव की सैर की जाए| सुबह जल्द उठ कर निकला| पगडंडी के साथ साथ चल कर नीचे उतरा और सड़क पर पहुँचा! यह एक हिमालयीन गाँव! सड़क से सट कर होने के कारण दुर्गम तो नही कह सकते, लेकीन पहाड़ी गाँव! गाँव में दोपहिया वाहन एक- दो के पास ही हैं| जरूरत भी नही पड़ती है| एक तो घर तक वाहन आ भी‌ नही पाते हैं| यहाँ के लोग खेती के साथ इस भूगोल से जुड़े व्यवसाय करते हैं- जैसे मिलिटरी, बीआरओ और आयटीबीपी और उससे जुड़े कामों में बहुत लोग होते हैं; कुछ सरकार के साथ काम करते हैं; और कोई बीस किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ में नौकरी भी करते हैं| शहर की हवा यहाँ भी पहुँची है| सद्गड़ के कई बच्चे अंग्रेजी माध्यम की स्कूल में पढ़ते हैं; उन्हे स्कूल बस भी नीचे रोड़ से मिलती है|









Thursday, August 9, 2018

पिथौरागढ़ में भ्रमण भाग ३: एक सुन्दर ट्रेक: ध्वज मन्दीर

३: एक सुन्दर ट्रेक: ध्वज मन्दीर
 

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२९ नवम्बर २०१७ की‌ सर्द सुबह और हिमालय की गोद में बसा हुआ सद्गड गाँव! रात में ठण्ड बहुत ज्यादा थी| रात में एक बार उठना हुआ तो ठण्ड का एहसास हुआ| यह घर ठीक पहाड़ में और वन के करीब बसा है| यहाँ के लोग बताते हैं कि वन्य पशू रात में यहाँ से गुजरते हैं| वे खेत में नुकसान ना करे, इसके लिए खेत में इलेक्ट्रिक तार भी लगाते हैं| हिमालय के कई हिस्सों में घर के पालतू जानवर- जैसे कुत्ता, भैंस आदि को शेर द्वारा ले जाना आम बात है... सुबह भी ठण्ड बहुत ज्यादा है| हाथ धोने के लिए तक गर्म पानी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है| इन दिनों में यहाँ नहाना कंपल्सरी भी नही होता है| यहाँ की ठण्ड में सुबह के हल्की धूप में बैठ कर चाय का स्वाद लेना अपने में एक अनुभव है!







Wednesday, July 25, 2018

पिथौरागढ़ में भ्रमण भाग २: पहाड़ में बंसा एक गाँव- सद्गड

भाग २: पहाड़ में बंसा एक गाँव- सद्गड  

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२८ नवम्बर २०१७ की‌ सर्द सुबह! पिथौरागढ़ में पहुँचने के बाद पहला काम है कि एक व्यक्ति से बात हुई है, उससे साईकिल लेनी है| हिमालय में सिर्फ- छह दिन के लिए जाने के समय भी साईकिल चलाने का मन था| इसलिए हर तरह से प्रयास किया कि पिथौरागढ़ पहुँचने पर मुझे साईकिल मिल सके| इंटरनेट पर उत्तराखण्ड के विविध साईकिलिस्ट ग्रूप्स से सम्पर्क किया, पिथौरागढ़ या आसपास के साईकिलिस्ट ग्रूप्स से भी सम्पर्क करने का प्रयास किया| लेकीन किसी से सीधा सम्पर्क नही हुआ| कुछ लोग साईकिल देते हैं, लेकीन पैकेज में; किसी व्यक्ति को कुछ दिनों के लिए नही‌ देते| फिर पिथौरागढ़ के परिचित लोग और उनके व्हॉटसएप ग्रूप पर सम्पर्क किया| तब जा कर एक व्यक्ति ने कहा कि वह मुझे उसकी साधारण सी साईकिल देगा| अब उसकी प्रतीक्षा है| जैसे तय हुआ था, बस अड़्डे के पास रूक कर उसे सम्पर्क किया| सम्पर्क हुआ नही| जब हुआ तो उसने कहा कि वह किसी और स्थान पर है| आखिर कर होते होते पता चला कि वह किसी दूसरी जगह पर है| अत: साईकिल नही मिल सकी| अब तक मन में इच्छा थी कि यहाँ साईकिल चलाऊँगा, मन में‌ उसकी योजना चल रही थी| अब मन की‌ वह धारा टूट गई! एक तरह से हताशा हुई| पता था ही की‌ पहाड़ के लोग कोई‌ बहुत प्रॉम्प्ट नही होते हैं| फिर भी कुछ देर तक दु:ख हुआ| लेकीन बाद में यह भी समझ आई की देख! हिमालय में आने के बाद भी कैसे तू रो रहा है कि साईकिल नही मिली! हिमालय तुझे मिल रहा है, हिमालय का सत्संग मिल रहा है, उसके सामने साईकिल की बिशात क्या है? फिर सबके साथ आगे बढ़ा| पिथौरागढ़ के आगे धारचुला रोड़ पर बीस किलोमीटर पर सत्गढ़ या सद्गड गाँव है| वहाँ पहला पड़ाव होगा|