Saturday, December 16, 2023

वेगळा अनुभव देणारी एक गोष्ट!

✪ शारीरिक पातळीवर आई न होऊ शकण्याची वेदना
✪ घटस्फोट, ताण आणि सामाजिक चाको-या
✪ रक्तापलीकडच्या भावनिक नात्याची गुंफण
✪ डिप्रेशनमधून पुढे येणारी मुलगी- एक्स्प्रेशनची बॉस तेजश्री प्रधान
✪ बेस्ट सीईओ पण नापास बाबाचा प्रवास
✪ चाको-या मोडणारी "प्रेमाची गोष्ट"
✪ छोट्या "सईचा" अप्रतिम अभिनय

नमस्कार. सामान्यपणे टीव्हीवरच्या मालिका म्हंटल्या की ठराविक मांडणी असते. त्याच त्या गोष्टी दाखवल्या जातात. क्वचितच काही उल्लेखनीय असं बघायला किंवा अनुभवायला मिळतं. पण सध्या असा एक अनुभव अनेकांनी घेतला येत असेल. स्टार प्रवाहवरची "प्रेमाची गोष्ट" मालिका! समाजात सुरू असलेल्या गोष्टी, ताण- तणाव, घटस्फोट, शरीराच्या पातळीवर आई न होणं व त्याची वेदना, समाजाच्या नजरेमुळे होणारी घुसमट अशा गोष्टी ह्या मालिकेत आहेत. पण त्याबरोबर अशी चाकोरी कशी मोडता येते, शरीराने नाही पण मनाने व भावनेने नातं कसं जोडलं जातं हेही त्यात बघायला मिळतं आहे. 

Sunday, December 3, 2023

आनन्द कुन्ज में ओशो ध्यान शिविर का अनुभव

आनन्द कुन्ज में ओशो ध्यान शिविर का अनुभव
 

ओशो के प्रेमी आए, गाना तो होगा
 

हसना हंसाना होगा रोना भी होगा
 

✪ तीन दिवसीय ध्यान और सत्संग शिविर
✪ प्रकृति के बीच खुद के भीतर डुबकी का अवसर
✪ ओशो के ध्यान और प्रेम की वर्षा!
✪ डायनॅमिक ध्यान के साथ खुद की खुदाई
✪ गहराई देनेवाला संगीत और उत्सव का माहौल
✪ जीवन रहस्य की खोज पर ले जानेवाले गुमराहों के हमराही


सभी को प्रणाम| २५ नवम्बर से २७ नवम्बर तक हुए इस जीवन रहस्य शिविर का जैसे हँगओवर अब भी महसूस हो रहा है| इस शिविर में हम सबने अपार आनन्द के खजाने की लूट की| आनन्द कुन्ज आश्रम में जैसे आनन्द की कुँजी (key of joy) हमारे हाथ लग गई! सभी ओशोप्रेमी तथा अन्य ध्यान में रुचि रखनेवालों के साथ इस आनन्द को शेअर करना चाहता हूँ| इसलिए इस शिविर की यादों को शब्दबद्ध करने का प्रयास कर रहा हूँ|

२५ नवम्बर की दोपहर! साईकिल या ट्रेन से आने को स्वामी उमंग जी ने प्रेम से मना किया और उनके साथ ही चलने के लिए कहा| उनसे मिलना हुआ| मै और मेरे जैसे कई लोग इस शिविर में आ सके, इसका कारण निश्चित स्वामी उमंग जी (गोरख मुसळे जी) है| कई वर्षों बाद उनसे मिलना हुआ| पुणे से हम निकले तो साथ में मा ईशू जी और स्वामीजी की बेटी ऋद्धी भी हैं| ईशू मा जी उनके विपश्यना सहित कई तरह के ध्यान के अनुभव शेअर किए! मा जी और स्वामीजी के मिलते ही जैसे सत्संग शुरू हुआ| मा जी ने बताया की १४- १५ वर्ष के बच्चे भी विपश्यना शिविर में सहभागी होते हैं| और वे बड़े ही गहरे भी चले जाते हैं| स्वामीजी के साथ हमारे मित्रों को याद किया| रह रह कर स्वामी धर्मेश जी की याद आ रही है| मानों कैसे जीना और कैसे मरना, इसकी मिसाल बना कर वे गए हैं|

शिविर लोणावळा पास मळवली में होने जा रहा है| वहाँ पहुँचने में कुछ समय था तो स्वामीजी ने ओशो जी का प्रवचन लगाया! सन्त चरणदास जी पर ओशो जी की वाणि! "मनुष्य एक वीणा है!" अहा हा| ओशो जी वैसे बहुत बुरे व्यक्ति है| क्यों कि वे तुरन्त आँखों में आंसूओं का कारण बन जाते है| ओशो जी को सुनते सुनते मळवली में पहुँच गए| जैसे जैसे आगे बढ़ते गए, सड़क संकरी होती गई, रास्ता पथरिला होता गया| जैसे ठीक भीतर जाने का रास्ता हो| आनन्द कुन्ज में पहुँचने सादगी और अपनेपन के साथ स्वागत किया गया| बाद में पता चला कि स्वागत करनेवाले तो यहाँ के मालिक हैं| आश्रम में जाने पर कई चिर परिचित नाम मिले- लाओ त्सु पथ, ओशो ध्यान मन्दिर, बुद्धा गार्डन, "Things that are great are given and received in silence" इंगित करनेवाले अवतार मेहेरबाबा और कबीर कुटिया! कबीर कुटिया में रहने का अवसर मिला! और इस परिसर के बारे में क्या कहूँ? हरियाली ही हरियाली, घने पेड़, हरी घास, शान्ति और पास से बहनेवाली इन्द्रायणी! वाह!

धीरे धीरे सभी साधक- साधिकाएँ आते गए| परिचय हुआ और पकौडे के साथ चायपान हुआ| यहाँ की ऊर्जा स्पष्ट रूप से महसूस हो रही है| एक माहौल जैसे बन रहा है| पीछले शिविर में मिले सचिन चव्हाण जी (स्वामी हरिहर जी) भी मिले| अन्य मित्र भी मिले| Be comfortable, स्वामी दर्पणजी ने सबको कहा| मौन शुरू होने के पहले कुछ मित्रों से परिचय हुआ| पहचान न होने पर भी ओशोप्रेमी यह पहचान है ही| एक ही महासागर की धाराएँ! इसी वातावरण को और गहराई देनेवाला संगीत!

दिल तो है एक आईना
इस आईने में तू ही तू
क्या करिश्मा क्या अजूबा
तुझमें मै और मुझमें तू
जो मै वो तू और जो तू वो मै हूँ
फिर भी है मुझे तेरी जुस्तजू
अल्ला हू....

ऐसे गीतों से यहाँ की शान्ति को और गहराई मिलने लगी| एक तरह से "हू" की सूक्ष्म चोट पड़नी शुरू हुई! ओशो ध्यान मन्दिर! ओशो जी की बड़ी प्रतिमा| जैसे लगता है वो ठीक मेरे भीतर ही देख रहे हैं| एक प्रवचन में उन्होने कहा भी है कि मै बिल्कुल आपसे ही बोल रहा हूँ! साथ ही उनके प्रसिद्ध हस्ताक्षर "रजनीश के प्रणाम" के साथ उनके कुछ चित्र! बिल्कुल ही बेबुझ! चारों तरफ उनके चित्र और ध्यान के लिए पूरा इन्तजाम- मॅटस और पीठ के लिए भी आधार| हम कितने सौभाग्यशाली है जो हमें यह सब मिला! बन्द आँखों से ओशो जी को देखता रहा| आँसू बह पड़े|