२: परभणी- जिंतूर नेमगिरी
११ मई को सुबह ठीक साढेपाँच बजे परभणी से निकला| कई लोग विदा देने आए, जिससे उत्साह बढा है| बहोत से लोगों ने शुभकामनाओं के मॅसेजेस भी भेजे हैं| कुछ दूरी तक मेरे प्रिय साईकिल मित्र और मेरे रनिंग के गुरू बनसकर सर भी मेरे साथ आए| मै जो एटलस साईकिल चला रहा हूँ, उनकी ही है! पैर में दर्द होने पर भी वे मेरे साथ चलने आए| कुछ समय तक उनका साथ मिला और फिर आगे बढ़ चला| योग प्रसार हेतु साईकिल के हमारे ग्रूप पर मेरा लाईव लोकेशन डाला है| आज का पड़ाव वैसे घर से आँगन तक जाने का ही है| पहले कई बार जिंतूर- नेमगिरी गया हूँ| साईकिल पर मेरा पहला शतक इसी रूट पर हुआ था, इसलिए एक तरह से आज का चरण बहुत सामान्य सा लग रहा है| जिंतूर घर से ४५ किलोमीटर है और वहाँ सामान छोड कर पास ३ किलोमीटर पर होनेवाली नेमगिरी चोटी पर जा कर आऊँगा|

३ लीटर पानी साथ ले कर जा रहा हूँ| उसमें भी इलेक्ट्रॉल मिलाया हुआ है| साथ में चिक्की- बिस्कीट भी रखा है जिसे बीच बीच में खाता रहूँगा| पहले आधे घण्टे के बाद शरीर लय में आ गया और आराम से आगे बढ़ने लगा| धूप अभी हल्की है| इस बार सोच रहा हूँ कम से कम ब्रेक लूँगा| सड़क पर होटलों में खाने के विकल्प ज्यादा नही है| इसलिए चाय बिस्किट खा के आगे बढ़ूँगा| बहोत देर तक पहला ब्रेक लेने की इच्छा नही हुई| ३० किलोमीटर पूरे होने पर बोरी नाम के गाँव में पहला ब्रेक लिया| चाय- बिस्किट लिया और आस- पास होनेवाले लोगों को मेरी यात्रा के बारे में बताया और संस्था के ब्रॉशर्स भी दिए| अब बचे हैं सिर्फ पन्द्रह किलोमीटर| लेकीन अब धूप बढ़ने लगी है और मेरे शरीर में डिहायड्रेशन के लक्षण नजर आ रहे है| शायद बड़े अन्तराल बाद पहला ब्रेक लिया, उससे ऊर्जा स्तर भी थोड़ा कम है| लेकीन आगे बढ़ता रहा| जिंतूर के छह किलोमीटर पहले चांदज गाँव में कुछ लोग सड़क पर काम कर रहे थे, उन्होने मेरा फोटो खींचा| बाद में पता चला कि वे पानी फाउंडेशन के कार्यकर्ता है और इधर के गाँवों में जल- संवर्धन (वॉटर कन्जर्वेशन) के लिए काम कर रहे हैं| महाराष्ट्र के कई गाँवों में अमीर खान के पानी फाउंडेशन का काफी अच्छा काम चल रहा है| उन्होने मेरी यात्रा को शुभकामनाएँ दी और मैने उनके कार्य को| साथ में कुछ ब्रॉशर्स भी दिए| अब जिन्तूर बस छह किलोमीटर|
११ मई को सुबह ठीक साढेपाँच बजे परभणी से निकला| कई लोग विदा देने आए, जिससे उत्साह बढा है| बहोत से लोगों ने शुभकामनाओं के मॅसेजेस भी भेजे हैं| कुछ दूरी तक मेरे प्रिय साईकिल मित्र और मेरे रनिंग के गुरू बनसकर सर भी मेरे साथ आए| मै जो एटलस साईकिल चला रहा हूँ, उनकी ही है! पैर में दर्द होने पर भी वे मेरे साथ चलने आए| कुछ समय तक उनका साथ मिला और फिर आगे बढ़ चला| योग प्रसार हेतु साईकिल के हमारे ग्रूप पर मेरा लाईव लोकेशन डाला है| आज का पड़ाव वैसे घर से आँगन तक जाने का ही है| पहले कई बार जिंतूर- नेमगिरी गया हूँ| साईकिल पर मेरा पहला शतक इसी रूट पर हुआ था, इसलिए एक तरह से आज का चरण बहुत सामान्य सा लग रहा है| जिंतूर घर से ४५ किलोमीटर है और वहाँ सामान छोड कर पास ३ किलोमीटर पर होनेवाली नेमगिरी चोटी पर जा कर आऊँगा|
३ लीटर पानी साथ ले कर जा रहा हूँ| उसमें भी इलेक्ट्रॉल मिलाया हुआ है| साथ में चिक्की- बिस्कीट भी रखा है जिसे बीच बीच में खाता रहूँगा| पहले आधे घण्टे के बाद शरीर लय में आ गया और आराम से आगे बढ़ने लगा| धूप अभी हल्की है| इस बार सोच रहा हूँ कम से कम ब्रेक लूँगा| सड़क पर होटलों में खाने के विकल्प ज्यादा नही है| इसलिए चाय बिस्किट खा के आगे बढ़ूँगा| बहोत देर तक पहला ब्रेक लेने की इच्छा नही हुई| ३० किलोमीटर पूरे होने पर बोरी नाम के गाँव में पहला ब्रेक लिया| चाय- बिस्किट लिया और आस- पास होनेवाले लोगों को मेरी यात्रा के बारे में बताया और संस्था के ब्रॉशर्स भी दिए| अब बचे हैं सिर्फ पन्द्रह किलोमीटर| लेकीन अब धूप बढ़ने लगी है और मेरे शरीर में डिहायड्रेशन के लक्षण नजर आ रहे है| शायद बड़े अन्तराल बाद पहला ब्रेक लिया, उससे ऊर्जा स्तर भी थोड़ा कम है| लेकीन आगे बढ़ता रहा| जिंतूर के छह किलोमीटर पहले चांदज गाँव में कुछ लोग सड़क पर काम कर रहे थे, उन्होने मेरा फोटो खींचा| बाद में पता चला कि वे पानी फाउंडेशन के कार्यकर्ता है और इधर के गाँवों में जल- संवर्धन (वॉटर कन्जर्वेशन) के लिए काम कर रहे हैं| महाराष्ट्र के कई गाँवों में अमीर खान के पानी फाउंडेशन का काफी अच्छा काम चल रहा है| उन्होने मेरी यात्रा को शुभकामनाएँ दी और मैने उनके कार्य को| साथ में कुछ ब्रॉशर्स भी दिए| अब जिन्तूर बस छह किलोमीटर|