७. अंबेजोगाई से हसेगांव (लातूर)
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१८ नवम्बर की भोर, यात्रा का सांतवा दिन| आज रविवार है और आज का चरण वैसे छोटा भी है| आज ७५ किलोमीटर साईकिल चलानी है और लगातार कई दिनों तक साईकिल चलाने से ये ७५ किलोमीटर अब सिर्फ लग रहे हैं| जैसे एक पेडल मारने से साईकिल अपने आप कुछ आगे जाती है, एक पेडल का मूमेंटम दूसरे पेडल में मिलता है, उसी प्रकार कई दिनों का मूमेंटम अब मेरे पास है| बस डर एक ही है कि आज के रूट पर भी कुछ हद तक निम्न दर्जे की सड़क है| ठीक सवा छह बजे अंबेजोगाई से निकला| यशवंतराव चव्हाण चौक में कल मेरा स्वागत हुआ था, वहीं से लातूर रोड़ की तरफ बढ़ा| शहर से बाहर निकलने तक सड़क ठीक है, लेकीन जब पहला मोड़ आया, तो सड़क बिल्कुल टूटी फूटी मिली| लेकीन यहाँ के लोगों ने बताया कि जल्द ही अच्छी सड़क मिलेगी, इस सड़क का लगभग काम पूरा हो चुका है| और मै अब तक ऐसी ऐसी सड़कों से गुजर चुका हूँ कि मुझे सड़क कम दर्जे की हो तो कुछ फर्क ही नही लग रहा है| उसका भी अभ्यास हो गया है| इसलिए पथरिली सड़क पर भी आराम से आगे बढ़ा| दूर से गिरवली सबस्टेशन का परिसर और अंबेजोगाई- परली रोड़ पर स्थित टीवी टॉवर दिखा| बचपन में अक्सर यहाँ आया करता था! उस परिसर का दूर दर्शन कर यादों को ताज़ा कर लिया| थोड़ी ही दूरी पर अच्छा दो लेन का हायवे मिला| अब लातूर तक अच्छा हायवे होगा|


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१८ नवम्बर की भोर, यात्रा का सांतवा दिन| आज रविवार है और आज का चरण वैसे छोटा भी है| आज ७५ किलोमीटर साईकिल चलानी है और लगातार कई दिनों तक साईकिल चलाने से ये ७५ किलोमीटर अब सिर्फ लग रहे हैं| जैसे एक पेडल मारने से साईकिल अपने आप कुछ आगे जाती है, एक पेडल का मूमेंटम दूसरे पेडल में मिलता है, उसी प्रकार कई दिनों का मूमेंटम अब मेरे पास है| बस डर एक ही है कि आज के रूट पर भी कुछ हद तक निम्न दर्जे की सड़क है| ठीक सवा छह बजे अंबेजोगाई से निकला| यशवंतराव चव्हाण चौक में कल मेरा स्वागत हुआ था, वहीं से लातूर रोड़ की तरफ बढ़ा| शहर से बाहर निकलने तक सड़क ठीक है, लेकीन जब पहला मोड़ आया, तो सड़क बिल्कुल टूटी फूटी मिली| लेकीन यहाँ के लोगों ने बताया कि जल्द ही अच्छी सड़क मिलेगी, इस सड़क का लगभग काम पूरा हो चुका है| और मै अब तक ऐसी ऐसी सड़कों से गुजर चुका हूँ कि मुझे सड़क कम दर्जे की हो तो कुछ फर्क ही नही लग रहा है| उसका भी अभ्यास हो गया है| इसलिए पथरिली सड़क पर भी आराम से आगे बढ़ा| दूर से गिरवली सबस्टेशन का परिसर और अंबेजोगाई- परली रोड़ पर स्थित टीवी टॉवर दिखा| बचपन में अक्सर यहाँ आया करता था! उस परिसर का दूर दर्शन कर यादों को ताज़ा कर लिया| थोड़ी ही दूरी पर अच्छा दो लेन का हायवे मिला| अब लातूर तक अच्छा हायवे होगा|