Saturday, October 13, 2018

साईकिल पर कोंकण यात्रा भाग १: प्रस्तावना

भाग १: प्रस्तावना

नमस्ते! कोंकण में साईकिल पर घूमना मेरा कई बरसों का सपना सा था| पहले एक बार इसका असफल प्रयास भी किया था| लेकीन इस बार यह सपना सच हुआ| साईकिल पर कोंकण में घूम सका- अकेले सोलो साईकिलिंग करते हुए| अब इसके बारे में विस्तार से बात करता हूँ| पहली बात तो यह की यह यात्रा मेरी नई हायब्रिड साईकिल मेरीडा स्पीडर 100 पर पहली यात्रा है| मार्च में यह हायब्रिड साईकिल ली| इसपर दो शतक भी हुए, लेकीन हर बार पंक्चर हुआ| मेरी पुरानी एमटीबी साईकिल और यह हायब्रिड साईकिल में पुराने ज़माने का नोकिया का शुद्ध फोन- 3315 और अभी के जनरेशन का आई फोन सेवन जैसा अंतर है! इसलिए यह साईकिल सीखने में, समझने में और उसे अपनानें में बहुत दिक्कत हुई| साईकिल ही हो कर भी बहुत आधुनिक और अलग किस्म की साईकिल होने के कारण बहुत कुछ एडजस्ट करना पड़ा जैसे टायर प्रेशर, एक्सेसरीज के साथ तालमेल, सड़क पर ग्रिप आदि| धीरे धीरे यह सब सीखता गया| और इस प्रक्रिया में मेरे साईकिल मित्र आशिष फडणीस जी ने बहुत मार्गदर्शन दिया और साथ भी दिया! मेरे सभी सवालों और शंकाओं का धैर्य के साथ निरसन किया! वाकई मेरे सवाल बहुत थे और बहुत समस्याएँ भी आईं! कई बार तो लगता भी था कि इस नाज़ुक सी और बहुत रिजर्व किस्म की साईकिल के बजाय मेरी पुरानी एमटीबी साईकिल ही अच्छी जिसकी हर समस्या का इलाज हर अच्छे साईकिल दुकान में उपलब्ध है जबकी इस साईकिल को 'कुछ' भी हो गया, तो उसके लिए सीधे उसके शोरूम तक जाना पड़ रहा है| इसलिए मानसिक तौर पर भी काफी मशक्कत कर के साईकिल की बेसिक्स सीखनी पड़ी| लेकीन इन सबके दौरान आशिषजी ने बहुत मार्गदर्शन दिया और धीरे धीरे इस साईकिल से भी दोस्ती हो गई! इस साईकिल को मैने नाम भी दिया- मेरी!









मेरी साईकिल पर कई छोटी राईडस की और दो शतक भी किए| जब साईकिल से अच्छा तालमेल हुआ, अच्छी दोस्ती हुई तब एक यात्रा करने की सोची| इसी दौरान पुराने जमाने की ओल्ड इज गोल्ड एटलस साईकिल पर भी एक बेहतरीन यात्रा हुई| इसलिए इस साईकिल पर यात्रा करने के लिए थोड़ा इन्तजार करना पड़ा| बचपन से मै कोंकण के देवगड़ में आता ऱहा हूँ| अब भी याद है मै खिलौने की बस ले कर परभणी- कोल्हापूर- देवगड़ ऐसी यात्रा करता था| घर में ही बस को चला कर देवगड़ की कल्पना करता था! मेरे लिए यह एक स्वप्नवत् स्थान है! समुद्र का तट और प्राकृतिक सुन्दरता का गढ़! इसलिए नई साईकिल की यात्रा यहीं करूँगा ऐसा तय किया| और गणपति के दिनों में यह मौका आया! साईकिल पर पुणे से देवगड़ जाने के लिए तैयार हुआ| पीछले साल की सातारा यात्रा और इस साल की एटलस साईकिल पर की योग यात्रा ने बहुत कुछ सीखा दिया है| इसलिए ज्यादा तनाव नही है और आसानी से तैयारी हुई| साथ ही हाफ मैरेथॉन तक की रनिंग की आदत से मेरा स्टैमिना और हौसला भी बढ़ा है| जब भी चाहूँ, २५ या ३० किलोमीटर दौड़ सकता हूँ| इससे मानसिक तैयारी भी अच्छी हुई| जब इतना रनिंग कर सकता हूँ, तो साईकिलिंग आसान बनता है, मानसिक तौर पर भी कुछ भी कठिन नही लगता है| इसलिए कोई कठिनाई नही है| इस बार भी यही फॉर्म्युला अपनाऊंगा- रोज सुबह साढ़ेपाँच बजे से ग्यारह बजे तक पाँच- छह घण्टे साईकिल चलाऊँगा और उसके बाद कहीं ठहर कर लैपटॉप पर मेरा काम भी करूँगा| वैसे तो यह यात्रा छोटी ही होगी- सात या आठ दिनों की| गणपति के दिनों में कोंकण में साईकिल पर पहुँचूंगा जहाँ बहुत उल्हास के साथ गणपति का त्यौहार मनाया जाता है|





६ सितम्बर की सुबह! आज मेरे घर से- चाकण से निकल कर पुणे के धायरी में मेरे भाई के घर तक की ५० किलोमीटर की यात्रा करनी है| यह एक तरह से आगामी चरणों के लिए वॉर्म अप ही है| छोटा चरण जरूर है, लेकीन मानसिक दृष्टि से किसी भी यात्रा का पहला दिन बहुत अहम होता है| शरीर और मन यात्रा की लय में आते हैं| एक तरह से यात्रा की बुनियाद होती है| बहुत आसानी से करीब ढाई घण्टों में ही यह दूरी पार की| रास्ते में मेरे मित्र से मिलना भी हुआ| इस साईकिल का अच्छा अभ्यास होने से अब अच्छी रफ्तार मिल रही है|

पहुँचने के बाद थोड़ा विश्राम किया और मेरा लॅपटॉप से होनेवाला रूटीन काम भी किया| शाम को थोड़ी साईकिल चलाई तो हवा कुछ कम महसूस हुई| इस यात्रा में मैने एक छोटा पंप साथ रखा है| उससे हवा भरने लगा| लेकीन अब भी इतनी अच्छी प्रैक्टीस नही है, इसलिए हवा भरने में कठिनाई आने लगी| हायब्रिड साईकिल से मेरी दोस्ती अब भी नई है, इंडक्शन अब भी पूरा नही हुआ है| कोशिश करता रहा| एक बार तो लगा कि चलो, यहाँ मैकेनिक है, उसके पास जाकर हवा भर लेता हूँ| लेकीन फिर थोड़ी और कोशिश की और हवा अन्दर जाने लगी| धीरे धीरे सॉफ्ट हैंडस के साथ हवा भर सका| टायर का प्रेशर कितना हो, इसका सही अनुमान भी अब तक आ चुका है| इसलिए उतनी हवा भर कर राहत की साँस ली! अब कल पहला बड़ा चरण होगा, पुणे से सातारा जाऊँगा और मेरा इस साईकिल का तिसरा शतक भी होगा! देखते हैं!





आज सिर्फ वॉर्म अप- ५० किमी

अगला भाग: साईकिल पर कोंकण यात्रा भाग २: पुणे से सातारा (१०५ किमी)

4 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (15-10-2018) को "कृपा करो अब मात" (चर्चा अंक-3125) पर भी होगी।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 14/10/2018 की बुलेटिन, अमर शहीद सेकेण्ड लेफ्टिनेन्ट अरुण खेतरपाल जी को सादर नमन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. रोचक। अगली कड़ी का इंतजार है।

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आपने ब्लॉग पढा, इसके लिए बहुत धन्यवाद! अब इसे अपने तक ही सीमित मत रखिए! आपकी टिप्पणि मेरे लिए महत्त्वपूर्ण है!