६. बीड से अंबेजोगाई
इस लेख माला को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए|
१७ नवम्बर की भोर| इन्फँट इंडिया बाल गृह से निकला| निकलते समय दत्ताजी और सब बच्चों ने मुझे विदा कहा| बड़े प्यार से मेरे लिए बहुत जल्द उठ कर भोजन भी बनाया| इस हिल से उतरते समय नीचे के सरोवर का परिसर बहुत सुन्दर लगा! कल की मुलाकातें याद करते हुए आगे बढा| आज भी मेरे लिए कुछ बहुत निम्न स्तर की सड़क लगनेवाली है| आज ऐसा तीसरा दिन होगा जब शुरू के तीस- पैतीस किलोमीटर तक ऐसी सड़क होगी और उसके बाद बेहतर सड़क मिलेगी| सोच रहा हूँ या उम्मीद कर रहा हूँ कि सिर्फ पैतीस किलोमीटर तक ही ऐसी सड़क मिले| आज सबसे पहले मुझे तो मांजरसुंबा घाट पार करना है| हायवे पर आते ही घाट की चढाई शुरू हुई| घाट तो मामुली ही है| लेकीन घाट में टैफिक जाम है! एक पल के लिए डर लगा कि कहीं फंस तो नही जाऊँगा? लेकीन हाथ में साईकिल है, इसलिए कुछ देर तक ट्रकों की कतार के दाए तरफ से आगे बढा और जब सड़क सँकरी हुई, तब बाए तरफ से आगे बढ़ा| सड़क के किनारे से आगे निकला| छोटा ही हो, घाट तो है ही| लेकीन उससे ज्यादा डरावनी बात काँच के छोटे टूकडे हैं जो जगह जगह फैले हुए हैं| उन पर से साईकिल चलाते समय वाकई डर लग रहा है| अगर घाट में साईकिल पंक्चर हुई तो??... लेकीन ऐसा हुआ नही| आसानी से छोटी सी जगह से आगे निकला और फिर स्लो हुए ट्रक्स को ओवरटेक भी करता गया| कुछ ही मिनटों में घाट पार हुआ और मांजरसुंबा चौराहे पर पहला ब्रेक लिया|


इस लेख माला को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए|
१७ नवम्बर की भोर| इन्फँट इंडिया बाल गृह से निकला| निकलते समय दत्ताजी और सब बच्चों ने मुझे विदा कहा| बड़े प्यार से मेरे लिए बहुत जल्द उठ कर भोजन भी बनाया| इस हिल से उतरते समय नीचे के सरोवर का परिसर बहुत सुन्दर लगा! कल की मुलाकातें याद करते हुए आगे बढा| आज भी मेरे लिए कुछ बहुत निम्न स्तर की सड़क लगनेवाली है| आज ऐसा तीसरा दिन होगा जब शुरू के तीस- पैतीस किलोमीटर तक ऐसी सड़क होगी और उसके बाद बेहतर सड़क मिलेगी| सोच रहा हूँ या उम्मीद कर रहा हूँ कि सिर्फ पैतीस किलोमीटर तक ही ऐसी सड़क मिले| आज सबसे पहले मुझे तो मांजरसुंबा घाट पार करना है| हायवे पर आते ही घाट की चढाई शुरू हुई| घाट तो मामुली ही है| लेकीन घाट में टैफिक जाम है! एक पल के लिए डर लगा कि कहीं फंस तो नही जाऊँगा? लेकीन हाथ में साईकिल है, इसलिए कुछ देर तक ट्रकों की कतार के दाए तरफ से आगे बढा और जब सड़क सँकरी हुई, तब बाए तरफ से आगे बढ़ा| सड़क के किनारे से आगे निकला| छोटा ही हो, घाट तो है ही| लेकीन उससे ज्यादा डरावनी बात काँच के छोटे टूकडे हैं जो जगह जगह फैले हुए हैं| उन पर से साईकिल चलाते समय वाकई डर लग रहा है| अगर घाट में साईकिल पंक्चर हुई तो??... लेकीन ऐसा हुआ नही| आसानी से छोटी सी जगह से आगे निकला और फिर स्लो हुए ट्रक्स को ओवरटेक भी करता गया| कुछ ही मिनटों में घाट पार हुआ और मांजरसुंबा चौराहे पर पहला ब्रेक लिया|