५: अंबड- औरंगाबादयोग साईकिल यात्रा का चौथा दिन, १४ मई की सुबह| आज अंबड से औरंगाबाद जाना है| सुबह अंबड के कुछ योग साधकों से मिलना हुआ| यहाँ कुछ लोग व्यक्तिगत रूप से क्लास लेते हैं| उनसे मिलकर आगे बढ़ा| आज भी सड़क आधी दूरी तक भारत से ही जाएगी और हायवे आने के बाद फिर इंडिया शुरू होगा! आज पहली बात तो खुद को बहुत धन्यवाद दे रहा हूँ कि मै इस यात्रा पर साईकिल पर आया, क्यों कि अगर गाडी से आता तो इस दिशा में कभी भी नही आता! आज यह सड़क रोहीलागड़ से जाएगी| रोहीलागड़ यह आज एक छोटा सा कस्बा है लेकीन अतीत में यहाँ पर बौद्ध गुंफाएँ थी| रोहीलागड़ के पास ही जांबुवंतगड भी है जिसका सम्बन्ध श्रीकृष्ण के समय के जाम्बुवन्त से है, ऐसा कहा जाता है| आज पहले इस रोहीलागड़ को देखने की उत्सुकता थी| इंटरनेट पर इसके बारे में खोजा था, पर कुछ खास मिला नही| अंबड से निकलने के बाद से ही सड़क विराने से रोहीलागड़ के तरफ बढ़ रही है| कल जैसा ही शान्त विराना और प्रकृति का साथ! बीच बीच में लगनेवाले बहुत ही छोटे गाँव!


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Tuesday, June 5, 2018
Friday, December 29, 2017
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ९ (अन्तिम): अजिंक्यतारा किला और वापसी
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा १: असफलता से मिली सीख
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा २: पहला दिन- चाकण से धायरी (पुणे)
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ३: दूसरा दिन- धायरी (पुणे) से भोर
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ४: तिसरा दिन- भोर- मांढरदेवी- वाई
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ५: चौथा दिन- वाई- महाबळेश्वर- वाई
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ६: पाँचवा दिन- वाई- सातारा- सज्जनगढ़
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ७: छटा दिन- सज्जनगढ़- ठोसेघर- सातारा
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ८: सांतवा दिन- सातारा- कास पठार- सातारा
९ (अन्तिम): अजिंक्यतारा किला और वापसी
इस यात्रा का सम्बन्ध ध्यान- योग से किस प्रकार है, यह जानने के लिए यह पढ़िए|
५ अक्तूबर की सुबह| आज इस यात्रा का अन्तिम पड़ाव है| आज अजिंक्यतारा किला देख कर वापस जाना है| कल- परसो जब भी इस किले के पास से जाता था तो इस किले को देख कर डर सा लगता था| अतीत में एक बार इस किले पर मोटरसाईकिल पर गया था, लेकीन उस समय बड़ी मुश्कील से बाईक पहले गेअर पर चढ़ी थी| हालांकी आज के पहले लगातार कई दिनों तक मैने कई चढाईयाँ पार की है, इसलिए आगे बढ़ा| सुबह यह किला देख कर जल्दी वापस निकलना है|


सातारा गाँव में सड़क एक बार पूछ कर जल्द ही किले के पास पहुँच गया| कई लोग मॉर्निंग वॉक/ जॉगिंग करते हुए दिखाई दे रहे हैं| किले के नीचे कई संस्थाएँ दिखी जो घूमन्तू समुदायों पर काम करती हैं| धीरे धीरे आगे बढा| किला कितना बड़ा है, इसका पता चलने लगा| एक मोड़ के बाद बड़ी तिखी चढाई शुरू हुई| इस पूरी यात्रा में यही चढाई सबसे कठिन लगी| हालाकी साईकिल चला नही पाऊंगा ऐसा नही लगा| इस चढाई का आनन्द लेते लेते आगे जाता रहा| यह सड़क बीच में घने पेडों से गुजरती है| सड़क के ठीक उपर ऊँचे पेडों पर एक मोर बैठ कर गूँज कर रहा था! तेज़ चढाई होने के कारण फोटो के लिए नही रूका| आखिर कर इस लगभग दो- ढाई किलोमीटर की चढाई के लिए करीब पच्चीस मिनट लगे|


योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा २: पहला दिन- चाकण से धायरी (पुणे)
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ३: दूसरा दिन- धायरी (पुणे) से भोर
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ४: तिसरा दिन- भोर- मांढरदेवी- वाई
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ५: चौथा दिन- वाई- महाबळेश्वर- वाई
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ६: पाँचवा दिन- वाई- सातारा- सज्जनगढ़
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ७: छटा दिन- सज्जनगढ़- ठोसेघर- सातारा
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ८: सांतवा दिन- सातारा- कास पठार- सातारा
९ (अन्तिम): अजिंक्यतारा किला और वापसी
इस यात्रा का सम्बन्ध ध्यान- योग से किस प्रकार है, यह जानने के लिए यह पढ़िए|
५ अक्तूबर की सुबह| आज इस यात्रा का अन्तिम पड़ाव है| आज अजिंक्यतारा किला देख कर वापस जाना है| कल- परसो जब भी इस किले के पास से जाता था तो इस किले को देख कर डर सा लगता था| अतीत में एक बार इस किले पर मोटरसाईकिल पर गया था, लेकीन उस समय बड़ी मुश्कील से बाईक पहले गेअर पर चढ़ी थी| हालांकी आज के पहले लगातार कई दिनों तक मैने कई चढाईयाँ पार की है, इसलिए आगे बढ़ा| सुबह यह किला देख कर जल्दी वापस निकलना है|
सातारा गाँव में सड़क एक बार पूछ कर जल्द ही किले के पास पहुँच गया| कई लोग मॉर्निंग वॉक/ जॉगिंग करते हुए दिखाई दे रहे हैं| किले के नीचे कई संस्थाएँ दिखी जो घूमन्तू समुदायों पर काम करती हैं| धीरे धीरे आगे बढा| किला कितना बड़ा है, इसका पता चलने लगा| एक मोड़ के बाद बड़ी तिखी चढाई शुरू हुई| इस पूरी यात्रा में यही चढाई सबसे कठिन लगी| हालाकी साईकिल चला नही पाऊंगा ऐसा नही लगा| इस चढाई का आनन्द लेते लेते आगे जाता रहा| यह सड़क बीच में घने पेडों से गुजरती है| सड़क के ठीक उपर ऊँचे पेडों पर एक मोर बैठ कर गूँज कर रहा था! तेज़ चढाई होने के कारण फोटो के लिए नही रूका| आखिर कर इस लगभग दो- ढाई किलोमीटर की चढाई के लिए करीब पच्चीस मिनट लगे|
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