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६ नवम्बर की शाम शिंगाली गाँव में पहुँचे| तब मन में बस्तड़ी गाँव की यादें उमड़ पड़ी| इसी गाँव के रिश्तेदारों के पास दिसम्बर २०११ में मै एक बार आया था| पहाड़ की ढलान पर और खाई के थोड़ा पहले यह गाँव बंसा है| यह पूरा क्षेत्र पहाड़ में ही है| यहाँ चोटियों के साथ खाई भी होती है| सड़कें तो निरंतर घाट की ही होती हैं| यह गाँव ऐसे स्थान पर है कि पिथौरागढ़ वापस जाते समय सड़क जब कुछ दूरी चढ़ कर फिर खाई के आगे सामने आती है, तब वहाँ से भी बस्तड़ी का परिसर दिखाई देता है| ३० जून २०१६ की रात्र यहाँ काल की रात साबित हुई| अत्यधिक बारीश चल रही थी| बादल फटा, बिजलियाँ कड़की और पानी आने लगा| लोगों को डर महसूस हुआ| सब लोग जग गए और हमारे जो रिश्तेदार गाँव में थे, वे सब एक घर में इकठ्ठा हुए| और पूरे गाँव पर ही पहाड़ टूट पड़ा! अचानक आयी तेज़ बारीश के कारण पानी की बड़ी धारा तेज़ी से नीचे बहने लगी और वह इस पहाड़ की क्षमता से अधिक थी| इसलिए पहाड़ गिर पड़ा (लैंड स्लाईड) और उसके नीचे बंसा बस्तड़ी गाँव उसमें समा गया| गाँव के २१ व्यक्तियों ने अपने प्राण खोए और लगभग पूरा गाँव तबाह हुआ| पहाड़ से इतनी मिट्टी बह कर आयी थी कि कई दिनों की खोज के बाद भी मृतकों के अवशेष भी नही मिल पाए| हमारे उस समय वहाँ होनेवाले कई रिश्तेदार उसमें गुजर गए| संयोग से जो बाहर थे, वही बच गए| महाराष्ट्र में २०१४ में माळीण नाम के गाँव में भी कुछ इसी तरह का हादसा हुआ था...
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Tuesday, February 15, 2022
हिमालय की गोद में... (कुमाऊँ में रोमांचक भ्रमण) ११: उद्ध्वस्त बस्तड़ी गाँव के पास ट्रेक
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