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३१ अक्तूबर की सुबह! गूंजी से वापस आने के बाद सत्गड की ठण्ड कितनी सुखद लग रही है| सुबह की मिठी धूप लेते समय बहुत अच्छा लग रहा है| गूंजी की अनुगूँज अब भी मन में सुनाई दे रही है और वह इतनी जल्द रूकनेवाली भी नही है! लगातार दो दिनों की थकानेवाली यात्रा के बाद सभी को विश्राम चाहिए| गूंजी की यात्रा जीप से की थी, फिर भी वह ट्रेकिंग जैसे ही थकानेवाली है| इसलिए आराम तो करना है ही| लेकीन इतना शानदार पहाड़ और प्राकृतिक सुन्दरता पास हो तो घूमने का मन तो होगा ही| तैयार हो कर घूमने के लिए निकला| साथ में होनेवाले दोस्त और बाकी लोगों को कनालीछीना इस पास के गाँव में किसी से मिलने जाना है| इसके अनुसार मैने मेरे ट्रेकिंग का प्लैन बनाया| कनालीछीना गाँव सड़क से छह किलोमीटर की दूरी पर है| लेकीन वहाँ से आते समय ट्रेक की एक पगडण्डी आती है| बिल्कुल गाँवों के बीच से आती हुई पगडण्डी| संयोग से मुझे कनालीछीना की स्कूल में जानेवाले एक लड़के का साथ भी मिल रहा है| ऐसी पगण्डण्डियों पर जानकार होना जरूरी है, अन्यथा दिशाएँ समझ में नही आती हैं| इस तरह आज का ट्रेकिंग तय हुआ| फैमिली और ग्रूप साथ होने से समय की सीमा तो है, लेकीन उसमें भी अच्छा खासा घूमना हो रहा है|