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Monday, August 13, 2018

पिथौरागढ़ में भ्रमण भाग ४: काण्डा गाँव के लिए प्रस्थान

४: काण्डा गाँव के लिए प्रस्थान
 

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३० नवम्बर २०१७| आज सद्गड से निकलना है| गाँव में से दिखता हुआ कल का ध्वज मंदीर! वह इस परिसर का सबसे ऊँचा स्थान है| और वहाँ नेपाल का नेटवर्क मोबाईल ने पकड़ा था! आज थोड़ी गाँव की सैर की जाए| सुबह जल्द उठ कर निकला| पगडंडी के साथ साथ चल कर नीचे उतरा और सड़क पर पहुँचा! यह एक हिमालयीन गाँव! सड़क से सट कर होने के कारण दुर्गम तो नही कह सकते, लेकीन पहाड़ी गाँव! गाँव में दोपहिया वाहन एक- दो के पास ही हैं| जरूरत भी नही पड़ती है| एक तो घर तक वाहन आ भी‌ नही पाते हैं| यहाँ के लोग खेती के साथ इस भूगोल से जुड़े व्यवसाय करते हैं- जैसे मिलिटरी, बीआरओ और आयटीबीपी और उससे जुड़े कामों में बहुत लोग होते हैं; कुछ सरकार के साथ काम करते हैं; और कोई बीस किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ में नौकरी भी करते हैं| शहर की हवा यहाँ भी पहुँची है| सद्गड़ के कई बच्चे अंग्रेजी माध्यम की स्कूल में पढ़ते हैं; उन्हे स्कूल बस भी नीचे रोड़ से मिलती है|









Thursday, August 9, 2018

पिथौरागढ़ में भ्रमण भाग ३: एक सुन्दर ट्रेक: ध्वज मन्दीर

३: एक सुन्दर ट्रेक: ध्वज मन्दीर
 

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२९ नवम्बर २०१७ की‌ सर्द सुबह और हिमालय की गोद में बसा हुआ सद्गड गाँव! रात में ठण्ड बहुत ज्यादा थी| रात में एक बार उठना हुआ तो ठण्ड का एहसास हुआ| यह घर ठीक पहाड़ में और वन के करीब बसा है| यहाँ के लोग बताते हैं कि वन्य पशू रात में यहाँ से गुजरते हैं| वे खेत में नुकसान ना करे, इसके लिए खेत में इलेक्ट्रिक तार भी लगाते हैं| हिमालय के कई हिस्सों में घर के पालतू जानवर- जैसे कुत्ता, भैंस आदि को शेर द्वारा ले जाना आम बात है... सुबह भी ठण्ड बहुत ज्यादा है| हाथ धोने के लिए तक गर्म पानी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है| इन दिनों में यहाँ नहाना कंपल्सरी भी नही होता है| यहाँ की ठण्ड में सुबह के हल्की धूप में बैठ कर चाय का स्वाद लेना अपने में एक अनुभव है!







Wednesday, July 25, 2018

पिथौरागढ़ में भ्रमण भाग २: पहाड़ में बंसा एक गाँव- सद्गड

भाग २: पहाड़ में बंसा एक गाँव- सद्गड  

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२८ नवम्बर २०१७ की‌ सर्द सुबह! पिथौरागढ़ में पहुँचने के बाद पहला काम है कि एक व्यक्ति से बात हुई है, उससे साईकिल लेनी है| हिमालय में सिर्फ- छह दिन के लिए जाने के समय भी साईकिल चलाने का मन था| इसलिए हर तरह से प्रयास किया कि पिथौरागढ़ पहुँचने पर मुझे साईकिल मिल सके| इंटरनेट पर उत्तराखण्ड के विविध साईकिलिस्ट ग्रूप्स से सम्पर्क किया, पिथौरागढ़ या आसपास के साईकिलिस्ट ग्रूप्स से भी सम्पर्क करने का प्रयास किया| लेकीन किसी से सीधा सम्पर्क नही हुआ| कुछ लोग साईकिल देते हैं, लेकीन पैकेज में; किसी व्यक्ति को कुछ दिनों के लिए नही‌ देते| फिर पिथौरागढ़ के परिचित लोग और उनके व्हॉटसएप ग्रूप पर सम्पर्क किया| तब जा कर एक व्यक्ति ने कहा कि वह मुझे उसकी साधारण सी साईकिल देगा| अब उसकी प्रतीक्षा है| जैसे तय हुआ था, बस अड़्डे के पास रूक कर उसे सम्पर्क किया| सम्पर्क हुआ नही| जब हुआ तो उसने कहा कि वह किसी और स्थान पर है| आखिर कर होते होते पता चला कि वह किसी दूसरी जगह पर है| अत: साईकिल नही मिल सकी| अब तक मन में इच्छा थी कि यहाँ साईकिल चलाऊँगा, मन में‌ उसकी योजना चल रही थी| अब मन की‌ वह धारा टूट गई! एक तरह से हताशा हुई| पता था ही की‌ पहाड़ के लोग कोई‌ बहुत प्रॉम्प्ट नही होते हैं| फिर भी कुछ देर तक दु:ख हुआ| लेकीन बाद में यह भी समझ आई की देख! हिमालय में आने के बाद भी कैसे तू रो रहा है कि साईकिल नही मिली! हिमालय तुझे मिल रहा है, हिमालय का सत्संग मिल रहा है, उसके सामने साईकिल की बिशात क्या है? फिर सबके साथ आगे बढ़ा| पिथौरागढ़ के आगे धारचुला रोड़ पर बीस किलोमीटर पर सत्गढ़ या सद्गड गाँव है| वहाँ पहला पड़ाव होगा|