✪ Beautiful trek on a village trail
✪ Mountain- lifestyle making people strong
✪ Simple people supporting each other
✪ Amazing views of Himalaya!
✪ Golden evening at Satgarh
Dawn of 9th December! Last sky watching session at Munsyari! Enjoyed the sky till last moment. Enjoyed the shining Pancha Chuli peaks in the Moonlight. Also enjoyed the cold weather! Packed the telescope after it was daylight. Left for the village trail after first round of tea. Feeling very blissful in the soft sunlight of the morning. Yesterday I had walked to one nice place in the town and now will explore it further
(Here you can listen my article in audio format.)
Himalayan views with a beautiful song can be seen here.
Munsyari town! It is a block headquarter and almost the largest town in north side of Pithauragarh district. Many women are walking on the road along with a cylinder on their shoulders. So many, that I felt that this may be the only day of the month for getting the cylinders. And here there are no auto rikshaws, so they may be carrying it themselves. Later on I came to know that cylinder is available every day and the women carry it this way only. I also saw women carrying other bulky objects.
Wednesday, February 25, 2026
Experiencing Kumaon Himalaya 6: Trekking in Munsyari and thrilling jeep journey
Friday, February 18, 2022
हिमालय की गोद में... (कुमाऊँ में रोमांचक भ्रमण) १२: रमणीय चण्डाक हिल पर २० किमी ट्रेक
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७ नवम्बर की सुबह| कल पिथौरागढ़ में ही ठहरे थे| दो-मंजिला घर, आँगन और आँगन में सुन्दर बगीचा और फूल! यहाँ पूरब की तरफ बड़ा पहाड़ नही है, इसलिए धूप सुबह ६ बजे ही मिली| यह घर थोड़ी ऊँचाई पर है, इसलिए सामने पिथौरागढ़ शहर फैला दिखाई देता है| साथ में शहर से सटे छोटे पहाड़ भी दिखाई देते हैं| यहाँ से चण्डाक हिल की दूरी लगभग ८ किलोमीटर है| वहाँ से थोड़ा आगे मोस्टा मनू मन्दिर है| वहाँ तक घूमने का तय किया| कुल मिला कर लगभग १८- २० किलोमीटर का ट्रेक होगा| कभी भी न देखे हुए परिसर में ट्रेक होगा| पानी की बोतल, कुछ गूड़पापड़ी आदि सामान पीठ पर ले कर निकला| रास्ता पहले पिथौरागढ़ शहर में जाता है और वहाँ के मेन मार्केट सिल्थाम से चण्डाक हिल की तरफ सड़क निकलती है| यहाँ कई जगह पर आईटीबीपी और बीआरओ के केन्द्र हैं| मिलिटरी की यातायात चलती रहती है| तेज़ी से चलते हुए बीस मिनट में मेन सिटी में पहुँचा| यहाँ नाश्ता मिलने की उम्मीद थी| लेकीन आगे देखता हूँ, ऐसा सोचते सोचते होटल पीछे छूट गए| और सुबह के आठ बजे ज्यादा होटल खुले भी नही थे| आगे चण्डाक के पास होटल मिलेगा, ऐसा पता चला| साथ में लायी गूड़पापड़ी खा कर आगे बढ़ा| धीरे धीरे पिथौरागढ़ शहर पीछे होता गया और निर्जन इलाका शुरु हुआ| यहाँ सुबह टहलने के लिए निकले हुए लोग दिखे| बाहर आने पर दूर से चण्डाक हिल का परिसर दिखाई देने लगा|
Tuesday, December 14, 2021
हिमालय की गोद में... (कुमाऊँ में रोमांचक भ्रमण) ४: गूंजी की ओर प्रयाण...
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२८ अक्तूबर की सुबह बुंगाछीना- अग्न्या परिसर में अच्छा ट्रेक हुआ| यह गाँव ठीक पहाड़ के बीचोबीच है| बस बैठ कर नजारों को आँखों में संजोना है! सबके साथ बातें हो रही हैं| बातों बातों में बाघ के बारे में बहुत कुछ सुनने में आया| यहाँ उत्तराखण्ड और कुमाऊँ में शेर अक्सर दिखाई देते हैं| शेर यहाँ बिल्कुल भी अपरिचित नही है| बल्की तो नरभक्षक शेरों की कहानियाँ और उनकी शिकार करनेवाला विख्यात शिकारी जिम कॉर्बेट की कर्म भूमि कुमाऊँ ही है| हाल ही के वर्षों में शेर की दहशत फिर से बढ़ रही है| एक समय तो शेर थोड़े कम हो गए थे| जंगल जैसे टूटता गया, वैसे वन्य प्राणियों पर मुश्कील समय आया| उसमें शेर भी थे| लेकीन अब फिर से उनकी दहशत बढ़ गई है| सत्गड़ और इस अग्न्या जैसे गाँवों में भी शेर आता है और दिन में जो गाँव सुहावना और रमणीय लगता है, वह रात में सुनसान हो जाता है! रात में कोई आँगन के बाहर तक नही जाता है!
Tuesday, November 30, 2021
हिमालय की गोद में... (कुमाऊँ में रोमांचक भ्रमण) १: प्रस्तावना
हिमालय की गोद में... (कुमाऊँ में रोमांचक भ्रमण) १: प्रस्तावना
सभी को नमस्कार| हाल ही में उत्तराखण्ड के कुमाऊँ क्षेत्र में घूमने का अवसर मिला| यह एक तरह का संयोग होता है और अगर किस्मत में हो, तो ही इस तरह का घूमना होता है| अन्यथ कितनी भी योजना बना के घूमना नही होता है| हिमालय में घूमने की यह दसवी बारी थी| इस बार मौसम बहुत स्वच्छ था, इसलीए दूर के बर्फ शिखर दिखाई दे रहे थे| कई जगहों पर ट्रेकिंग कर सका| और सबसे बड़ी बात दुर्गम मानस सरोवर- कैलाश पर्वत मार्ग पर गूंजी और काला पानी जैसे स्थानों तक की दुर्गम यात्रा हो सकी| पीछले वर्ष २०२० में ही यहाँ जीप की सड़क बनी है| सड़क नही, जीप का ट्रेक ही है! वहाँ जाने का रोमांचकारी अनुभव मिला| वहाँ जाना जीप के लिए और जीप के ड्रायवर के लिए तो हॉलीवूड मूवी जैसा था| कई हॉलीवूड मूवीज में नही, कोई साहसिक मुहीम दिखाते हैं| ज्ल्द ही वह भटक जाती है और वह एक सर्वायवल मिशन बनता है! गूंजी और काला पानी का जीप ट्रेक ऐसा ही सर्वायवल मिशन बना! उसके बारे में विस्तार से लिखूँगा|
Wednesday, October 3, 2018
पिथौरागढ़ में भ्रमण ८ (अन्तिम): पिथौरागढ़ से वापसी
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२ दिसम्बर २०१७ की सुबह| कल रात की यात्रा कर पिथौरागढ़ पहुँचे| आज मुझे यहाँ से निकलना है, क्यों कि कल दोपहर को दिल्ली से ट्रेन है| वैसे तो कल लोहाघाट से ही मै जा सकता था, लेकीन उसके लिए एक रात लोहाघाट में ठहरना पड़ता| उसके बजाय सभी के साथ वापस पिथौरागढ़ आया, रात की यात्रा का भी अनुभव लिया| मेरे साथ में आए हुए लोग और कुछ दिन यहाँ रूकेंगे| लेकीन मुझे छुट्टियों की कमी के कारण निकलना होगा| लेकीन ये सांत दिन बेहद अनुठे रहे| लगभग ढाई सालों के बाद हिमालय का दर्शन हुआ और सद्गड़ और कांडा के रोमांचक ट्रेक हुए| हिमालय की गोद में होनेवाले गाँवों में रहने का मौका मिला! अब इन्ही यादों को संजोते हुए यहाँ से निकलना है|
Thursday, August 9, 2018
पिथौरागढ़ में भ्रमण भाग ३: एक सुन्दर ट्रेक: ध्वज मन्दीर
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२९ नवम्बर २०१७ की सर्द सुबह और हिमालय की गोद में बसा हुआ सद्गड गाँव! रात में ठण्ड बहुत ज्यादा थी| रात में एक बार उठना हुआ तो ठण्ड का एहसास हुआ| यह घर ठीक पहाड़ में और वन के करीब बसा है| यहाँ के लोग बताते हैं कि वन्य पशू रात में यहाँ से गुजरते हैं| वे खेत में नुकसान ना करे, इसके लिए खेत में इलेक्ट्रिक तार भी लगाते हैं| हिमालय के कई हिस्सों में घर के पालतू जानवर- जैसे कुत्ता, भैंस आदि को शेर द्वारा ले जाना आम बात है... सुबह भी ठण्ड बहुत ज्यादा है| हाथ धोने के लिए तक गर्म पानी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है| इन दिनों में यहाँ नहाना कंपल्सरी भी नही होता है| यहाँ की ठण्ड में सुबह के हल्की धूप में बैठ कर चाय का स्वाद लेना अपने में एक अनुभव है!