✪ Sky watching in severe cold weather
✪ Farms on slope, small houses and distant villages obscured by fog!
✪ Trekking in serene nature
✪ Saffron snow- peaks in the evening
✪ "Watch, the tiger is standing there!"
Satgarh! Woke up at 4:30 am on 5th December. So severe cold outside! Sky watching from the terrace is next to impossible! It is almost trying to settle on a Perth pitch. But the sky is so mesmerizing! So the sky defied the cold weather. Although the Moon is shining brilliantly, it is now low in the West. There is bright Jupiter near the Moon. Sirius is low towards South. In the East, there are many stars. The Ursa Major are rising high in the sky! The Leo constellation is clear. I set the mobile for astrophotography. Hands are shaking. But oh beauty! What a blissful dawn! Slowly the birds started chirping!
Wednesday, January 7, 2026
Experiencing Kumaon Himalaya 3: Satgarh- A dream village in Himalaya!
Monday, February 7, 2022
हिमालय की गोद में... (कुमाऊँ में रोमांचक भ्रमण) १०: ध्वज मन्दिर का सुन्दर ट्रेक
इस लेखमाला को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए|
४ नवम्बर को बूँगाछीना गाँव में पूजा सम्पन्न हुई| उत्तराखण्ड के सामुदायिक लोक जीवन का अनुभव ले सका| उस कारण रिश्तेदारों से मुलाकातें हुईं- बातचीत हुई| आज लक्ष्मी पूजन है, इसलिए रात सत्गड पहुँचना है| सभी रिश्तेदारों से और बूँगाछीना के रमणीय परिसर से विदा ले कर हम निकले| दिवाली का दिन होने के कारण पिथौरागढ़ जानेवाली जीपें मिल नही रही हैं| साथ ही यहाँ सरकारी रोडवेज बसों के कुछ ड्रायव्हर्स का स्ट्राईक भी चल रहा है| इसलिए बहुत देर तक सड़क पर राह देखते रहे| दोपहर की धूप में तो अच्छा लगा, लेकीन जब धीरे धीरे शाम ढलने लगी, तब स्वेटर पहनना पड़ा| अन्त में बूँगाछीना के ही एक सज्जन उनकी जीप से छोड़ने के लिए तैयार हुए| यहाँ पहाड़ी सड़कें हैं, इससे वाहनों के रेट बहुत ज्यादा हैं| सरकारी बस में लगभग एक किलोमीटर के लिए दो रूपए लगते हैं, तो शेअर जीप चार या पाँच रूपए लेती हैं| साथ ही पेट्रोल के दाम बढ़े है| और कोरोना के कारण आई हुई मन्दी| यहाँ का पर्यटन भी प्रभावित हुआ है| खैर|
Wednesday, December 22, 2021
हिमालय की गोद में... (रोमांचक कुमाऊँ भ्रमंती) ५: है ये जमीं गूंजी गूंजी!
इस लेख माला को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए|
२९ अक्तूबर की दोपहर! धारचुला पार करते ही मोबाईल नेटवर्क चला गया| अब सड़क भी पहाड़ में उपर उठ रही है और संकरी हो रही है| गूंजी जाना है, लेकीन सड़क कितनी दूर तक चल रही है, इसका अन्दाज़ा नही है| यहाँ के जानकार बता रहे हैं कि गूंजी तक अब गाडी चलती है| लेकीन मुझे शक है| इसलिए इसके आगे जो भी मिलेगा, पूरी तरह अप्रत्याशित होगा| तवा घाट के पास हमें एक परिचित मिले, वे सड़क पर हमारे लिए ही रूके थे| वे एक अर्थ में हमारी इस गूंजी यात्रा के संयोजक थे| उन्होने ही कहा था कि गूंजी जाईए, ॐ पर्वत देख आईए| वे हमारे लिए रूके थे और मिलते ही उन्होने हमारी गाडी चलाना शुरू किया| धीरे सड़क टूटने लगी थी, इसलिए हमारे ड्रायवर को उनके आने से राहत मिली| अब शुरू होता है एक रोमांचकारी यात्रा!
यहाँ जॉईन हुए जितू जी वैसे तो पेशे से ड्रायवर हैं, लेकीन बिल्कुल ऑल राउंडर इन्सान| ड्रायवर, टूअर ऑपरेटर, टूरीस्ट गाडी, किसान, ट्रेकर इन सबमें कुशल| उन्होने फिर गूंजी के बारे में जानकारी दी| एक बार मैने उनसे पूछा कि अगर वास्तव में गूंजी तक जाया जात हो, तो इनर लाईन परमिट लगता होगा ना| उस पर उन्होने कहा कि उनकी पहचान है, इसलिए नही लगेगा| फिर यहाँ की भीषण सड़कें, ड्रायवर्स कैसे चलाते हैं इसको ले कर वे बात करते रहें| तवा घाटच्या के कुछ आगे गूंजी की सड़क का अन्तिम होटल होनेवाला गाँव लगा| वहाँ दल- सब्जी राईस खा लिया| अब लोगों के चेहरे की शैलि में फर्क साफ नजर आ रहा है! और अब सड़क पर वाहनों में अधिक वाहन मिलिटरी के वाहन हैं!
Tuesday, November 30, 2021
हिमालय की गोद में... (कुमाऊँ में रोमांचक भ्रमण) १: प्रस्तावना
हिमालय की गोद में... (कुमाऊँ में रोमांचक भ्रमण) १: प्रस्तावना
सभी को नमस्कार| हाल ही में उत्तराखण्ड के कुमाऊँ क्षेत्र में घूमने का अवसर मिला| यह एक तरह का संयोग होता है और अगर किस्मत में हो, तो ही इस तरह का घूमना होता है| अन्यथ कितनी भी योजना बना के घूमना नही होता है| हिमालय में घूमने की यह दसवी बारी थी| इस बार मौसम बहुत स्वच्छ था, इसलीए दूर के बर्फ शिखर दिखाई दे रहे थे| कई जगहों पर ट्रेकिंग कर सका| और सबसे बड़ी बात दुर्गम मानस सरोवर- कैलाश पर्वत मार्ग पर गूंजी और काला पानी जैसे स्थानों तक की दुर्गम यात्रा हो सकी| पीछले वर्ष २०२० में ही यहाँ जीप की सड़क बनी है| सड़क नही, जीप का ट्रेक ही है! वहाँ जाने का रोमांचकारी अनुभव मिला| वहाँ जाना जीप के लिए और जीप के ड्रायवर के लिए तो हॉलीवूड मूवी जैसा था| कई हॉलीवूड मूवीज में नही, कोई साहसिक मुहीम दिखाते हैं| ज्ल्द ही वह भटक जाती है और वह एक सर्वायवल मिशन बनता है! गूंजी और काला पानी का जीप ट्रेक ऐसा ही सर्वायवल मिशन बना! उसके बारे में विस्तार से लिखूँगा|
Monday, August 27, 2018
पिथौरागढ़ में भ्रमण भाग ५: काण्डा गाँव का रोमांचक ट्रेक
इस लेखमाला को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए|
३० नवम्बर २०१७ की दोपहर| सद्गड- पिथौरागड़ जा कर अब काण्डा गाँव जाना है| काण्डा गाँव सड़क से जुड़ा हुआ नही है, इसलिए यहाँ एक छोटा ट्रेक करना है| साथ के लोगों ने कहा भी, की कुछ ही समय पहले तक यहाँ बनी सड़क भी नही थी और दूर से ही पैदल चलना होता था| जैसे ही जीप से उतरे, सामने नीचे उतरती पगडण्डी दिखी और साथ में घोडे भी दिखे! इस ट्रेक के बारे में रिश्तेदारों ने बताया भी था| और शुरू हो गया एक सुन्दर ट्रेक! सड़क से पगडण्डी सीधा जंगल में जाने लगी और नीचे भी उतरने लगी| एक घना जंगल सामने आया और पगडण्डी धीरे धीरे और सिकुड़ती गई|