७: पहली और अन्तिम हाफ मैरेथॉन ईवेंट
डिस्क्लेमर: यह लेख माला कोई भी टेक्निकल गाईड नही है| इसमें मै मेरे रनिंग के अनुभव लिख रहा हूँ| जैसे मै सीखता गया, गलती करता गया, आगे बढता गया, यह सब वैसे ही लिख रहा हूँ| इस लेखन को सिर्फ रनिंग के व्यक्तिगत तौर पर आए हुए अनुभव के तौर पर देखना चाहिए| अगर किसे टेक्निकल गायडन्स चाहिए, तो व्यक्तिगत रूप से सम्पर्क कर सकते हैं|
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नवम्बर २०१७ में अच्छे समय में सोलो हाफ मैरेथॉन दौड़ने के बाद फुल मैरेथॉन का इन्तजार था| लेकीन उस समय मेरी एक साईकिल यात्रा की तैयारी चल रही थी| इसलिए कुछ दिनों तक सिर्फ छोटे रन्स पर ही ध्यान दिया| फुल मैरेथॉन के लिए सात घण्टों का कट ऑफ समय होता है, इसलिए मन में लगता था कि जब ढाई घण्टों में आधी दूरी पार हो रही है, तो बाकी दूरी भी समय में ही पूरी हो सकती है| लेकीन यह सिर्फ एक भ्रम था| अभी फुल मैरेथॉन के लिए बहुत बड़ी यात्रा करनी बाकी थी| जनवरी २०१८ में जिस साईकिल यात्रा की योजना थी, उसे कुछ कारण से ऐन समय पर रद्द करना पड़ा| लेकीन उस यात्रा की तैयारी में जो सीखने को मिला, वह तो लाभ रहा| और रनिंग भी उसी की तैयारी का एक हिस्सा था| जब वह यात्रा न हो पाई, तब पहली बार हाफ मैरेथॉन ईव्हेंट के बारे में सोचा| और जल्द ही ११ फरवरी २०१८ को हाफ मैरेथॉन के लिए रजिस्ट्रेशन भी किया| उसके लिए कोई क्वालिफिकेशन नही होता है (कुछ ईव्हेंटस में होता भी है, ऐसा बाद में पता चला)| इसकी तैयारी के लिए मेरे पास बीस दिन हैं|
रनिंग ठीक कर तो पाता हूँ, लेकीन अभी इसमें उतना नियमित नही हूँ| हफ्ते में सिर्फ दो बार और महिने में सात- आठ बार दौड़ता हूँ| हालांकी साईकिल- योगा भी करता हूँ, जो रनिंग में लाभ देते हैं| जब हाफ मैरेथॉन का बूकिंग किया, तब रनिंग में नियमितता लाई| कुछ छोटे रन किए और फिर एक बार हाफ मैरेथॉन के लिए निकला| हाफ मैरेथॉन इवेंट के पन्द्रह दिन पहले की यह दौड़ कुछ अलग रही| एक तरह से काफी गलतियाँ भी हुई| फिर समझ में आया कि मै हाफ मैरेथॉन को बड़ा ही छोटा मान रहा था, नियमितता कम थी, इसलिए तकलीफ हुई| एक तो इस हाफ मैरेथॉन के लिए कट ऑफ लिमिट से अधिक समय लगा, २:४५ के बजाय २:४८ समय लगा जिससे कुछ दर्द हुआ| इसके साथ अन्त में रफ्तार भी कम हुई थी, तकलीफ भी हुई थी और अन्तिम चारसौ मीटर चलने की नौबत आई थी| इसके बाद काफी कुछ सोचा| मेरे रनिंग के गुरू और मित्र संजय बनसकर जी से मार्गदर्शन लिया| उन्होने हाफ मैरेथॉन लगभग दो घण्टों में की है| उनके साथ चर्चा करते हुए कुछ बातें समझ में आई|

डिस्क्लेमर: यह लेख माला कोई भी टेक्निकल गाईड नही है| इसमें मै मेरे रनिंग के अनुभव लिख रहा हूँ| जैसे मै सीखता गया, गलती करता गया, आगे बढता गया, यह सब वैसे ही लिख रहा हूँ| इस लेखन को सिर्फ रनिंग के व्यक्तिगत तौर पर आए हुए अनुभव के तौर पर देखना चाहिए| अगर किसे टेक्निकल गायडन्स चाहिए, तो व्यक्तिगत रूप से सम्पर्क कर सकते हैं|
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नवम्बर २०१७ में अच्छे समय में सोलो हाफ मैरेथॉन दौड़ने के बाद फुल मैरेथॉन का इन्तजार था| लेकीन उस समय मेरी एक साईकिल यात्रा की तैयारी चल रही थी| इसलिए कुछ दिनों तक सिर्फ छोटे रन्स पर ही ध्यान दिया| फुल मैरेथॉन के लिए सात घण्टों का कट ऑफ समय होता है, इसलिए मन में लगता था कि जब ढाई घण्टों में आधी दूरी पार हो रही है, तो बाकी दूरी भी समय में ही पूरी हो सकती है| लेकीन यह सिर्फ एक भ्रम था| अभी फुल मैरेथॉन के लिए बहुत बड़ी यात्रा करनी बाकी थी| जनवरी २०१८ में जिस साईकिल यात्रा की योजना थी, उसे कुछ कारण से ऐन समय पर रद्द करना पड़ा| लेकीन उस यात्रा की तैयारी में जो सीखने को मिला, वह तो लाभ रहा| और रनिंग भी उसी की तैयारी का एक हिस्सा था| जब वह यात्रा न हो पाई, तब पहली बार हाफ मैरेथॉन ईव्हेंट के बारे में सोचा| और जल्द ही ११ फरवरी २०१८ को हाफ मैरेथॉन के लिए रजिस्ट्रेशन भी किया| उसके लिए कोई क्वालिफिकेशन नही होता है (कुछ ईव्हेंटस में होता भी है, ऐसा बाद में पता चला)| इसकी तैयारी के लिए मेरे पास बीस दिन हैं|
रनिंग ठीक कर तो पाता हूँ, लेकीन अभी इसमें उतना नियमित नही हूँ| हफ्ते में सिर्फ दो बार और महिने में सात- आठ बार दौड़ता हूँ| हालांकी साईकिल- योगा भी करता हूँ, जो रनिंग में लाभ देते हैं| जब हाफ मैरेथॉन का बूकिंग किया, तब रनिंग में नियमितता लाई| कुछ छोटे रन किए और फिर एक बार हाफ मैरेथॉन के लिए निकला| हाफ मैरेथॉन इवेंट के पन्द्रह दिन पहले की यह दौड़ कुछ अलग रही| एक तरह से काफी गलतियाँ भी हुई| फिर समझ में आया कि मै हाफ मैरेथॉन को बड़ा ही छोटा मान रहा था, नियमितता कम थी, इसलिए तकलीफ हुई| एक तो इस हाफ मैरेथॉन के लिए कट ऑफ लिमिट से अधिक समय लगा, २:४५ के बजाय २:४८ समय लगा जिससे कुछ दर्द हुआ| इसके साथ अन्त में रफ्तार भी कम हुई थी, तकलीफ भी हुई थी और अन्तिम चारसौ मीटर चलने की नौबत आई थी| इसके बाद काफी कुछ सोचा| मेरे रनिंग के गुरू और मित्र संजय बनसकर जी से मार्गदर्शन लिया| उन्होने हाफ मैरेथॉन लगभग दो घण्टों में की है| उनके साथ चर्चा करते हुए कुछ बातें समझ में आई|