६: स्पिलो से नाको
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३१ जुलाई शाम को स्पिलो में होटलवाले युवकों से अच्छी बात हुई| यहाँ से अब बौद्ध समुदाय ही मुख्य रूप से हैं| रहन- सहन और खाना भी लदाख़ जैसा लग रहा है| किन्नौर के इस दूरदराज के क्षेत्र में गाँव यदा कदा ही होते हैं| इसलिए हर एक गाँव में होटल, राशन, होम स्टे, बैंक आदि सब सुविधाएँ होती हैं| यहाँ पर पहले ब्लास्टिंग और सड़क की स्थिति का पता किया| मेरे जाने के बाद परसो स्पिलो के कुछ आगे ब्लास्टिंग किया जाएगा| सड़क फिलहाल तो ठीक है| स्पिलो में अच्छा नेटवर्क मिल रहा है, इसलिए आगे के रूट के बारे में कुछ पता किया| जब इंटरनेट पर पूह (पू) गाँव के बारे में देखा, तो पता चला कि १९०९ में यहाँ तक- हिमालय में इतने अन्दर तक एक विदेशी आया था और उसने निरीक्षण किया कि पूह (पू) में सभी लोग तिब्बती बोलते हैं! अगले दिन याने १ अगस्त को मुझे वहीं से जाना है| सुबह निकलने के पहले जब प्रेयर व्हील के पास टहल रहा था, तब कुछ लोगों ने मुझसे बात की| उन्होने मेरे अभियान के बारे में जानना चाहा, बाद में रूचि भी ली| श्री नेगी जी से बात हुई| उन्होने मुझे आज के नाको के होटल का भी सम्पर्क दिया| मुझे शुभकामनाएँ भी दी| सुबह आलू- पराठे का नाश्ता करने के बाद निकला| आज शायद बीच में होटल कम ही लगेंगे, इसलिए बिस्कीट और केले भी ले लिए| कल के मुकाबले आज अच्छी धूप खिली है, आसमाँ नीला नजर आ रहा है| स्पिलो छोडते समय तो मुस्कुरा रहा हूँ....
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३१ जुलाई शाम को स्पिलो में होटलवाले युवकों से अच्छी बात हुई| यहाँ से अब बौद्ध समुदाय ही मुख्य रूप से हैं| रहन- सहन और खाना भी लदाख़ जैसा लग रहा है| किन्नौर के इस दूरदराज के क्षेत्र में गाँव यदा कदा ही होते हैं| इसलिए हर एक गाँव में होटल, राशन, होम स्टे, बैंक आदि सब सुविधाएँ होती हैं| यहाँ पर पहले ब्लास्टिंग और सड़क की स्थिति का पता किया| मेरे जाने के बाद परसो स्पिलो के कुछ आगे ब्लास्टिंग किया जाएगा| सड़क फिलहाल तो ठीक है| स्पिलो में अच्छा नेटवर्क मिल रहा है, इसलिए आगे के रूट के बारे में कुछ पता किया| जब इंटरनेट पर पूह (पू) गाँव के बारे में देखा, तो पता चला कि १९०९ में यहाँ तक- हिमालय में इतने अन्दर तक एक विदेशी आया था और उसने निरीक्षण किया कि पूह (पू) में सभी लोग तिब्बती बोलते हैं! अगले दिन याने १ अगस्त को मुझे वहीं से जाना है| सुबह निकलने के पहले जब प्रेयर व्हील के पास टहल रहा था, तब कुछ लोगों ने मुझसे बात की| उन्होने मेरे अभियान के बारे में जानना चाहा, बाद में रूचि भी ली| श्री नेगी जी से बात हुई| उन्होने मुझे आज के नाको के होटल का भी सम्पर्क दिया| मुझे शुभकामनाएँ भी दी| सुबह आलू- पराठे का नाश्ता करने के बाद निकला| आज शायद बीच में होटल कम ही लगेंगे, इसलिए बिस्कीट और केले भी ले लिए| कल के मुकाबले आज अच्छी धूप खिली है, आसमाँ नीला नजर आ रहा है| स्पिलो छोडते समय तो मुस्कुरा रहा हूँ....