८: ताबो से काज़ा
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३ अगस्त को नाको से ताबो पहुँचा| ताबो बहुत शानदार गाँव लगा| छोटा सा, लेकीन सड़के अच्छी हैं, होटल- दुकान भी हैं, लेकीन फिर भी गाँव ही है| पर्यटक और विदेशी पर्यटक भी हैं, लेकीन फिर भी शान्त गाँव लगा| नाको से ताबो की ऊँचाई तो कम है, लेकीन घूमक्कड़ी के लिहाज से उसका "कद" नाको से अधिक है! ताबो का होम स्टे बहुत अच्छा रहा| जिस घर में मै ठहरा था, उन्होने रात में भी नीचे घर में ही खाने के लिए बुलाया| एक तरह का बहुत ही अपनापन यहाँ मिला| परिवारवालों से बातचीत भी हुई| स्पीति के स्थानियों का घर अन्दर से देखने को मिला| और जाहीर तौर पर तिब्बत का करीब होना पता चल रहा है| क्यों कि हम जिसे ड्रॉईंग रूम कहते हैं, वहाँ पर ध्यान और प्रार्थना के लिए नीचे गद्दे बिछाए हैं| या गद्दे जैसे आसन| एक साथ पन्द्रह लोग बैठ कर ध्यान कर सकें, ऐसी व्यवस्था है| आदरणीय दलाई लामा जी का फोटो और मन्त्र फ्लैग्ज तो हर तरफ है ही|
यहाँ व्हॉईस और डेटा दोनो का कुछ नेटवर्क मिलने से घर पर और मित्रों से दो दिन के बाद ठीक बात हो सकी| कई सारे समाचार भी मिले| जम्मू- कश्मीर में अभूतपूर्व परिस्थिति है| अमरनाथ यात्रा रोकी गई है और सभी पर्यटकों को वहाँ से निकलने के लिए कहा गया है| इससे मेरी यात्रा भी बीच में खण्डित होगी| क्यों कि बाद में मुझे मनाली- लेह हायवे से लेह की तरफ जाना है जो की मै नही जा पाऊँगा| और इतनी अभूतपूर्व परिस्थिति में सब तरह के रिस्ट्रिक्शन्स भी वहाँ होंगे| जब यह समाचार मिला, तो सच कहता हूँ, एक तरह से राहत ही मिली| क्यों की लगातार चल रही अनिश्चितताओं से भरी यात्रा का मानसिक दबाव भी बहुत बना था| जब पता चला की, मै लेह की तरफ आगे नही जा पाऊँगा, तो सच में एक तरह का सुकून ही मिला| शिमला से निकल कर ताबो तक पहुँच तो गया हूँ, लेकीन शारीरिक और मानसिक दृष्टि से अब बहुत थकान भी हुई है| इस समाचार ने एक तरह से इस यात्रा का रूख भी और दिशा भी बदल ही दी| बीच बीच में बारीश का अलर्ट भी चल रहा है| हिमाचल और जम्मू- कश्मीर की सीमा अभी बहुत दूर है| लेकीन तबियत को देखते हुए उस सीमा तक भी जा पाना कठीन लग रहा है| ४ अगस्त को ताबो से काज़ा के लिए निकला तो सब इस तरह से अनिश्चित बना हुआ है| हालांकी आज की यात्रा ज्यादा कठिन नही होगी, इस यात्रा का सबसे छोटा पड़ाव- सिर्फ ४७ किलोमीटर आज है|
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३ अगस्त को नाको से ताबो पहुँचा| ताबो बहुत शानदार गाँव लगा| छोटा सा, लेकीन सड़के अच्छी हैं, होटल- दुकान भी हैं, लेकीन फिर भी गाँव ही है| पर्यटक और विदेशी पर्यटक भी हैं, लेकीन फिर भी शान्त गाँव लगा| नाको से ताबो की ऊँचाई तो कम है, लेकीन घूमक्कड़ी के लिहाज से उसका "कद" नाको से अधिक है! ताबो का होम स्टे बहुत अच्छा रहा| जिस घर में मै ठहरा था, उन्होने रात में भी नीचे घर में ही खाने के लिए बुलाया| एक तरह का बहुत ही अपनापन यहाँ मिला| परिवारवालों से बातचीत भी हुई| स्पीति के स्थानियों का घर अन्दर से देखने को मिला| और जाहीर तौर पर तिब्बत का करीब होना पता चल रहा है| क्यों कि हम जिसे ड्रॉईंग रूम कहते हैं, वहाँ पर ध्यान और प्रार्थना के लिए नीचे गद्दे बिछाए हैं| या गद्दे जैसे आसन| एक साथ पन्द्रह लोग बैठ कर ध्यान कर सकें, ऐसी व्यवस्था है| आदरणीय दलाई लामा जी का फोटो और मन्त्र फ्लैग्ज तो हर तरफ है ही|
यहाँ व्हॉईस और डेटा दोनो का कुछ नेटवर्क मिलने से घर पर और मित्रों से दो दिन के बाद ठीक बात हो सकी| कई सारे समाचार भी मिले| जम्मू- कश्मीर में अभूतपूर्व परिस्थिति है| अमरनाथ यात्रा रोकी गई है और सभी पर्यटकों को वहाँ से निकलने के लिए कहा गया है| इससे मेरी यात्रा भी बीच में खण्डित होगी| क्यों कि बाद में मुझे मनाली- लेह हायवे से लेह की तरफ जाना है जो की मै नही जा पाऊँगा| और इतनी अभूतपूर्व परिस्थिति में सब तरह के रिस्ट्रिक्शन्स भी वहाँ होंगे| जब यह समाचार मिला, तो सच कहता हूँ, एक तरह से राहत ही मिली| क्यों की लगातार चल रही अनिश्चितताओं से भरी यात्रा का मानसिक दबाव भी बहुत बना था| जब पता चला की, मै लेह की तरफ आगे नही जा पाऊँगा, तो सच में एक तरह का सुकून ही मिला| शिमला से निकल कर ताबो तक पहुँच तो गया हूँ, लेकीन शारीरिक और मानसिक दृष्टि से अब बहुत थकान भी हुई है| इस समाचार ने एक तरह से इस यात्रा का रूख भी और दिशा भी बदल ही दी| बीच बीच में बारीश का अलर्ट भी चल रहा है| हिमाचल और जम्मू- कश्मीर की सीमा अभी बहुत दूर है| लेकीन तबियत को देखते हुए उस सीमा तक भी जा पाना कठीन लग रहा है| ४ अगस्त को ताबो से काज़ा के लिए निकला तो सब इस तरह से अनिश्चित बना हुआ है| हालांकी आज की यात्रा ज्यादा कठिन नही होगी, इस यात्रा का सबसे छोटा पड़ाव- सिर्फ ४७ किलोमीटर आज है|