Tuesday, December 4, 2018

एचआयवी एड्स इस विषय को लेकर जागरूकता हेतु एक साईकिल यात्रा के अनुभव: ३. इन्दापूर से पण्ढरपूर

३. इन्दापूर से पण्ढरपूर
 

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१४ नवम्बर की भोर| आज बाल दिन है और आज मुझे पहले बाल गृह में पहुँचना है| आज इस साईकिल यात्रा का तिसरा दिन है| इसलिए शरीर कुछ लय में आ गया है| सुबह की ठण्डक में‌ इन्दापूर महाविद्यालय से निकला| सुबह घुमनेवाले लोगों को सड़क पूछ कर आगे बढ़ा| कल के हायवे के मुकाबले इन्दापूर- अकलूज सड़क काफी शान्त लगी| अब वाकई लग रहा है कि मै ग्रामीण क्षेत्र में पहुँच गया हूँ| जल्द ही‌ पुणे जिला समाप्त हुआ| अकलूज में पहला ब्रेक लिया| पहले दो दिनों के अनुभव के बाद मै नाश्ते के लिए सिर्फ केला, चाय- बिस्कीट, चिक्की (गूड़पापडी) और चिप्स इनको ही ले रहा हूँ| पेट के लिए हल्का होता है| डबल चाय- बिस्कीट के दो ब्रेक मेरे लिए पर्याप्त होते हैं| साथ ही चिक्की/ बिस्कीट पास रखता हूँ, उन्हे बीच बीच में खाता हूँ| पानी में इलेक्ट्रॉल डाला ही हुआ है| लगातार चलाने के कारण धीरे धीरे मेरे लिए साईकिल चलाना और आसान होता जा रहा है|






Sunday, December 2, 2018

एचआयवी एड्स इस विषय को लेकर जागरूकता हेतु एक साईकिल यात्रा के अनुभव: २. केडगांव से इन्दापूर (८५ किमी)

२. केडगांव से इन्दापूर (८५ किमी)

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१३ नवम्बर की भोर| आज इस यात्रा के दूसरे दिन केडगाँव से निकलना है| अच्छा विश्राम होने पर सुबह ताज़गी महसूस हो रही है| उजाला होते होते तैयार हो कर निकला| आज इन्दापूर तक मुझे यही हायवे होगा| कल के मुकाबले मुझे आज कम समय लगेगा| लेकीन साईकिल यात्रा में अक्सर अपेक्षा के विपरित होता रहता है| आज भी इसका अनुभव आनेवाला है| जब निकला तब काफी ठण्ड है| इस यात्रा में हर रोज मुझे सुबह एक- डेढ घण्टे तक ठण्ड मिलनेवाली है| और दोपहर में काफी गर्मी भी मिलेगी| सुबह की ठण्डक में हायवे पर साईकिल चलाने का आनन्द लेता रहा| सूर्योदय का अच्छा दृश्य दिखाई दिया|









Thursday, November 29, 2018

एचआयवी एड्स इस विषय को लेकर जागरूकता हेतु एक साईकिल यात्रा के अनुभव: १. चाकण से केडगांव (८४ किमी)

१. चाकण से केडगांव (८४ किमी)
 

नमस्ते! हाल ही में महाराष्ट्र में १४ दिनों में ११६५ किलोमीटर की साईकिल यात्रा पुरी की| अब उसके अनुभव आपके साथ शेअर करता हूँ| संक्षेप में इस यात्रा की योजना कैसे बनी, यह बताता हूँ| मई २०१८ में योग प्रसार हेतु मैने साधारण सी एटलस साईकिल पर ५९५ किलोमीटर की यात्रा की थी| उस दौरान एक सामाजिक माध्यम के तौर पर साईकिल क्षमता का एहसास हुआ था| इस तरह की और यात्रा करने की इच्छा हुई| और साईकिल चलानी है तो किसी सामाजिक उद्देश्य और सामाजिक सन्देश के साथ ऐसी यात्रा करूँ, यह लगा था| परभणी के मेरे साईकिल मित्र डॉ. पवन चाण्डक कई सालों से एचआयवी इस विषय को लेकर साईकिल यात्रा करते हैं, कई एचआयवी बाल गृहों को सहायता भी करते हैं| इसके साथ मेरी पत्नि आशा पीछले दस सालों से एचआयवी क्षेत्र में कार्य कर रही है| इन दोनों बातों को मिला के इस साईकिल यात्रा की योजना बनी| १ दिसम्बर को विश्व एचआयवी निर्मूलन दिन है, तो उसके उपलक्ष्य में इस यात्रा की तैयारी की गई| यात्रा के उद्देश्य एवम् उसका स्वरूप पहले ही आपको बताया है|





Saturday, November 10, 2018

एचआयवी एडस इस विषय को लेकर जागरूकता हेतु एक साईकिल यात्रा

नमस्ते! पीछली बार मैने जब योग- प्रसार हेतु साईकिल यात्रा की थी, तब एक माध्यम के तौर पर साईकिल की क्षमता का अहसास हुआ था| साईकिलिंग तो अक्सर करता रहता हूँ, लेकीन सोचा कि अगर एक माध्यम के तौर पर साईकिल इतनी उपयुक्त है, तो क्यों ना किसी सामाजिक विषय को ले कर साईकिल चलाई जाए| जब ऐसा सोच रहा था, तो मेरे सामने दो बातें थी- मेरी पत्नि आशा एचआयवी- एडस इस विषय पर रिलीफ फाउंडेशन संस्था के साथ कई सालों से काम कर रही हैं| रिलीफ फाउंडेशन महाराष्ट्र राज्य एडस नियंत्रण सोसायटी के अन्तर्गत एचआयवी के बारे में जागरुकता और मायग्रंट वर्कर्स इन विषयों पर काम करती है| उसके अलावा परभणी के मेरे साईकिलिस्ट मित्र डॉ. पवन चाण्डक जी भी कई सालों से एचआयवी होनेवाले बच्चों के बाल गृहों को सहायता करते हैं| इन दोनों बातों को मिला कर महाराष्ट्र में एक सोलो साईकिल एक्स्पीडीशन की योजना बनाई| रिलीफ फाउंडेशन इस साईकिल यात्रा का को- ऑर्डीनेशन करेगा|‌ यह योजना इस प्रकार है|

हर सुबह लगभग ८०+ किलोमीटर साईकिल चलाऊँगा| एचआयवी होनेवाले बच्चों के बाल गृह चलानीवाली चार संस्थाओं में भेंट करूँगा| वहाँ चल रहा कार्य, वहाँ के कार्यकर्ताओं के अनुभव इस पर चर्चा होगी|‌ उसके अलावा बच्चों से गपशप और संवाद होगा| इसके अलावा दुसरी भेंट कार्यकर्ताओं से होगी| उनके अनुभव, उनकी सक्सेस स्टोरीज आदि पर चर्चा होगी| ये चार संस्थाएँ ऐसी है- पंढरपूर- पालवी प्रोजेक्ट, बीड- इन्फँट इंडिया संस्था, हसेगांव (लातूर)- सेवालय संस्था और अकोला- सर्वोदय एडस बालगृह|

इन संस्थाओं के बीच दूरी बड़ी है, इसलिए यात्रा के कई चरण होंगे| इस यात्रा में वहाँ के स्थानीय कार्यकर्ताओं से मिलूँगा, एचआयवी एडस के बारे में जागरुकता से जुड़े ब्रॉशर्स लोगों को दूँगा| जहाँ अवसर मिलेगा, वहाँ मै छोटे ग्रूप के साथ चर्चा करूँगा- एचआयवी होनेवाले लोगों को ट्रीटमेंट का बेहतर लाभ मिले, इसलिए स्वास्थ्य का ख्याल कैसा रखना चाहिए, उसके लिए जीवन शैलि किस प्रकार की होनी चाहिए, योग और फिटनेस का इस सन्दर्भ में महत्त्व आदि पर बोलूँगा| मेरी साईकिल डायरी में ये अनुभव समाज के सामने रखूँगा| कितनी विपरित परिस्थिति में ये लोग कार्य करते हैं, यह समाज के सामने आना भी तो चाहिए|

उद्देश्य
१. अच्छा कार्य करनेवाले लोगों के अनुभव सुनना, उनसे मिलना और उनसे बातचीत करना, यह उनके लिए बहुत बड़ा 'पॉझिटीव्ह स्ट्रोक' होता है|
२. एचआयवी होनेवाले बच्चों के साथ उन्हे रिफ्रेश करनेवाला अनौपचारिक संवाद|
३. इस विषय के विविध पहलू, उसकी जटिलताएँ, दिक्कतें सामने रखना और समाज की जागरूकता बढाने की आवश्यकता पर बल देना|
४. विविध तरह की सक्सेस स्टोरीज और दिक्कतों से चल रहा संघर्ष समाज के सामने रखना|


यात्रा का रूट 

१४ नवम्बर को बाल दिन है| उस दिन पहले बाल गृह में पहुँचने की योजना है| इसलिए १२ नवम्बर को निकलूँगा| इस यात्रा में महाराष्ट्र के दस जिलों में साईकिल चलाऊँगा|

दिन १ १२ नवम्बर, सोमवार: चाकण से केडगांव: ८४ किमी
दिन २ १३ नवम्बर, मंगळवार: केडगांव से इंदापूर: ८५ किमी
दिन ३ १४ नवम्बर, बुधवार: इंदापूर से पंढरपूर: ७२ किमी
दिन ४ १५ नवम्बर, गुरुवार: पंढरपूर से बार्शी: ८२ किमी
दिन ५ १६ नवम्बर: शुक्रवार: बार्शी से पाली, बीड: १०४ किमी
दिन ६ १७ नवम्बर: शनिवार: बीड से अंबेजोगाई: ९० किमी
दिन ७ १८ नवम्बर: रविवार: अंबेजोगाई- लातूर- हसेगांव: ८४ किमी
दिन ८ १९ नवम्बर: सोमवार: हसेगांव से अहमदपूर: ७५ किमी
दिन ९ २० नवम्बर: मंगळवार: अहमदपूर से नांदेड: ६७ किमी
दिन १० २१ नवम्बर: बुधवार: नांदेड से हिंगोली: ९२ किमी
दिन ११ २२ नवम्बर: गुरुवार: हिंगोली से वाशिम: ५१ किमी
दिन १२ २३ नवम्बर: शुक्रवार: वाशिम से अकोला: ७६ किमी
दिन १३ २४ नवम्बर: शनिवार: अकोला से रिसोड: ९७ किमी
दिन १४ २५ नवम्बर: रविवार: रिसोड से परभणी: १०० किमी

कुल दिन १४ और कूल दूरी लगभग ११६५ किलोमीटर|

२५ नवम्बर को यह यात्रा समाप्त होगी| विश्व एचआयवी दिन अर्थात् १ दिसम्बर को मेरे अनुभव शेअर करूँगा| यह काम किस तरह चल रहा है, क्या दिक्कते हैं, इस पर लिखूँगा (जैसे संस्था के कार्यकर्ताओं को लोगों द्वारा मारना- पीटना, संस्था की इमारत गिरायी जाना और अन्य भी)| एचआयवी का मतलब सिर्फ लोगों को पता होनेवाली चार चीज़ें ही नही, बल्की उसमें कई जटिलताएँ होती हैं, एचआयवी होनेवाले व्यक्तियों की कई समस्याएँ होती हैं और उन पर सोल्युशन्स भी होते हैं (जैसे एआरटी थेरपी के साथ 'पॉजिटिव' जीवन शैलि) ये सब मै समाज के सामने रख सकूँगा| और किसी भी सामाजिक समस्या के पीछे गहराई में अज्ञान, गलत तरह की सोच, जागरुकता और दायित्व का अभाव होते हैं| उन पर भी चर्चा होने में सहायता होगी|
 

अगर आपकी जानकारी में इस यात्रा के रूट पर एचआयवी विषय पर काम करनेवाली कोई संस्था है, तो उसके बारे में आप बता सकते हैं| यात्रा शुरू होने पर हर दिन का अपडेट भी आपको देता रहूँगा| बहुत बहुत धन्यवाद|

मेरी पीछली साईकिल यात्राओं के बारे में आप यहाँ पढ़ सकते हैं: www.niranjan-vichar.blogspot.com (मेरा मोबाईल नंबर:  094221088376)

इस साईकिल यात्रा का समन्वयन रिलीफ फाउंडेशन, भोसरी, पुणे द्वारा किया जा रहा है| सम्पर्क: 07350016571


Sunday, November 4, 2018

साईकिल पर कोंकण यात्रा भाग ८ (अन्तिम): देवगड़ से वापसी...

८ (अन्तिम): देवगड़ से वापसी...
 

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कोस्टल रोड़ से कुणकेश्वर जाने के बाद अगले दिन सबके साथ और कुछ जगह पर घूमना हुआ| साईकिल के बिना देवबाग बीच और तारकर्ली बीच देखना हुआ| समय की कमी के कारण साईकिल पर और कहीं जाना नही हुआ| कम से कम देवगड़- आचरा बीच जाने की इच्छा थी| बीच के साथ कोंकण के अन्दरूनी गाँवों का दर्शन होता| पर वह सम्भव नही हो सका| पत्नि और बेटी साथ में‌ होने की वजह से वापसी के रूट पर कम से कम गगनबावडा तक जाने की इच्छा भी‌ अधूरी रह गई| उनके साथ ही जाना पड़ा| वैसे तो कुणकेश्वर- जामसंडे की सड़क पर जो तिखी चढाई आती है, वह मैने साईकिल पर पार की‌ थी| पीछली बार गाडी पर जाते समय यही चढाई गगनबावडा घाट से भी अधिक खतरनाक मालुम पड़ी थी| इसलिए गगनबावडा घाट साईकिल पर न जाने का मलाल नही हुआ| वैसे भी इन दिनों में इतनी चढाईयाँ पार की है कि एक घाट इतना मायने नही रखता है|‌ खैर|










Friday, November 2, 2018

साईकिल पर कोंकण यात्रा भाग ७: कोस्टल रोड़ से कुणकेश्वर भ्रमण

भाग ७: कोस्टल रोड़ से कुणकेश्वर भ्रमण
 

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१२ सितम्बर का दिन साईकिल चलाए बिना समाप्त हो गया| मेरी पत्नि और बेटी को लाने के लिए मुझे जाना पड़ा| इससे साईकिल यात्रा का और एक दिन कम हुआ| अब शायद सिर्फ एक ही दिन साईकिल चला पाऊँगा| मेरे रिश्तेदार, भाई और अब पत्नि- बेटी आने के बाद इस सुनसान घर में चहल पहल हुई है| अब यहाँ कुछ ठीक महसूस कर रहा हूँ| पुरानी यादें तो हैं ही, अब बेटी साथ होने से नई यादें भी जुड़ रही हैं| यह फार्म हाऊस समुद्र तट से लगभग नौ किलोमीटर दूर आता है| लेकीन सुना है कि जब बरसाती दिनों में भीषण बारीश होती है, समंदर में तुफान जैसी स्थिति बनती है, तब यहाँ तक उसकी गूँज सुनाई देती है| अगर इस बार तेज़ बरसात होती, तो यह मौका मिलता! इसके लिए बरसात के चरम समय में यहाँ आना होगा|










Wednesday, October 31, 2018

साईकिल पर कोंकण यात्रा भाग ६: देवगड़ बीच और किला

६: देवगड़ बीच और किला

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देवगड़ में‌ पहुँचने की‌ उत्तेजना काफी देर रही| फार्म हाउस के विरान इलाके में वह दिन बिता| पाँच दिनों में ४१३ किलोमीटर से अधिक दूरी पार हो गई! इस साईकिल को कैसे धन्यवाद दूं? यह फार्म हाऊस मुख्य सड़क से लगभग आधा किलोमीटर अन्दर है और यहाँ की सड़क बिल्कुल कच्ची और पथरिली है| आते समय पहले तो लगा कि साईकिल पैदल ही लानी ठीक होगी| लेकीन इतने दिन साईकिल चलाने से हौसला बढ़ गया था| इसलिए धीरे धीरे उस कच्ची सड़क या ट्रेल पर भी साईकिल चला के घर पहुँचा था| मेरे रिश्तेदार कल आएंगे, इसलिए घर में‌ भी खामोशी है| यहाँ ठहरना एक तरह से बाहरी दुनिया से सम्पर्क क्षीण करने जैसा है| टिवी नही, इंटरनेट भी‌ धिमा और कभी भी रूक जाएगा ऐसा| लेकीन रिलैक्स करने के लिए बहुत बेहतर माहौल| अब एक तरह से इस यात्रा का मुख्य हिस्सा पूरा हुआ है| इसलिए मन से भी रिलैक्स महसूस कर रहा हूँ| अच्छे विश्राम के बाद ११ सितम्बर  को अब देवगड़ किला और बीच देखना है|








Monday, October 29, 2018

साईकिल पर कोंकण यात्रा भाग ५: राजापूर- देवगड़ (५२ किमी)

भाग ५: राजापूर- देवगड़ (५२ किमी)
 

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१० सितम्बर की सुबह| आज बहुत छोटा सा चरण है- सिर्फ ५१ किलोमीटर है| लेकीन एक तरह से आज मेरा सपना पूरा होने जा रहा है, इसलिए मन में बहुत उत्तेजना है| लगातार चार दिनों में ३५० किलोमीटर से अधिक दूरी पार करने से आज की दूरी बहुत मामुली हो गई है| हालांकी समय तो लगेगा, लेकीन चिन्ता बिल्कुल नही होगी| जैसे औपचारिकता बची है| लेकीन सुबह जब निकला तो मन में भाव सिर्फ एंजॉय करने का है| रोशनी होते होते जब निकला, तो दूर आसमान में अन्धेरा दिख रहा है| एक बार बरसात का डर भी लगा| लेकीन थोड़ी ही‌ देर में पता चला कि यह तो धुन्ध है| और इसका मतलब यह भी है कि अब बारीश आने की सम्भावना एकदम कम हो गई है| राजापूर से निकल कर जैसे ही‌ मुंबई- गोवा हायवे छोड दिया, तो बहुत ही सुन्दर और उपर चढ़नेवाली सड़क मिली| और थोड़ा आगे जाने के बाद जैसे कोहरे का समुद्र लगा! आज समुद्र तो मिलेगा ही, लेकीन उसके पहले कोहरे का समुद्र! वाह, अद्भुत नजारा! और कितनी रोमँटीक और लगभग निर्जन सड़क!







Friday, October 26, 2018

साईकिल पर कोंकण यात्रा भाग ४: मलकापूर- आंबा घाट- लांजा- राजापूर (९४ किमी)

भाग ४: मलकापूर- आंबा घाट- लांजा- राजापूर (९४ किमी)
 

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९ सितम्बर की सुबह| कल रात अच्छा विश्राम होने से बहुत ताज़ा महसूस कर रहा हूँ| आज रविवार है, इसलिए थोड़ी देरी से निकलना है| लेकीन सुबह नीन्द जल्द खुल गई, इसलिए लॉज के बाहर आकर थोड़ा मॉर्निंग वॉक लिया| बाहर सब शान्ति शान्ति है, चाय का होटल तक खुला नही है| फिर आराम से सात बजे बाहर निकला| अब होटल खुला मिला| नाश्ता करते समय मेरी साईकिल देख कर कई बस ड्रायवर और कंडक्टर मुझसे मिलने लगे! यहाँ पास ही तो बस स्टैंड है| कुछ देर तक उनसे बात की और लगभग पौने आठ बजे मलकापूर से निकला| विगत चार दिनों से क्या यात्रा रही है! और आज का पड़ाव बहुत अहम होगा| आज लगभग ९२ किलोमीटर ही जाना है, लेकीन यह भी सफर चढने- उतरनेवाले रास्तों के बीच होगा| इसी रोड़ पर लगभग आठ साल पहले एक बार आया हूं, इसलिए कुछ तो याद है| इतिहास में प्रसिद्ध विशालगढ़ के पास से यह सड़क गुजरती हैं| मलकापूर से आगे आते ही नजारों की झड़ी जैसे शुरू हुई!







Sunday, October 21, 2018

साईकिल पर कोंकण यात्रा भाग ३: सातारा- कराड- मलकापूर (११४ किमी)

३: सातारा- कराड- मलकापूर (११४ किमी)

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८ सितम्बर की सुबह| जब नीन्द खुली तो बाहर झाँक के देखा| पूरे आसमान में बादल छाए हैं और जल्द ही बून्दाबून्दी शुरू हुई! आज बारीश के आसार है| लेकीन जब तैयार हो कर साईकिल ले कर निकला, तो आसमान बिल्कुल साफ हुआ है! इसे ही तो सावन की रिमझिम बारीश कहते हैं! सातारा! शहर में सामने अजिंक्यतारा किला जैसे निगरानी करने के लिए खड़ा है! बड़ा विराट नजर आता है! पीछली बार की सातारा यात्रा की याद ताज़ा करते हुए अजिंक्यतारा के पास से निकला| और सातारा शहर का सौंदर्य फिर एक बार देखने को मिला| अजिंक्यतारा के पीछे के रास्ते से हायवे की तरफ बढ़ने लगा| क्या नजारे हैं! वाकई, सातारा जिले के साथ सातारा शहर भी एक घूमक्कडों का और फिटनेस प्रेमियों का डेस्टीनेशन है! अच्छी संख्या में लोग मॉर्निंग वॉक कर रहे हैं, कोई कोई साईकिल पर भी हैं और दौड़ भी रहे हैं! बहुत हरियाली और उसमें से गुजरती विरान सड़क! इस बार भी सातारा का अच्छा भ्रमण हो रहा है! लगभग दस साल पहले इसी परिसर में जकातवाडी गाँव में एक मीटिंग के लिए आया था, वह याद भी ताज़ा हो गई! शहर के इतना करीब होने के बावजूद इतना कुदरती सौंदर्य! अजिंक्यतारा दूसरी तरफ से देखते हुए आगे बढ़ा और जल्द ही हायवे पर पहुँच गया| अब यहाँ से कराड़ तक सीधा हायवे है|








Tuesday, October 16, 2018

साईकिल पर कोंकण यात्रा भाग २: पुणे से सातारा (१०५ किमी)

भाग २: पुणे से सातारा (१०५ किमी)
 

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७ सितम्बर की सुबह| आज इस यात्रा का बड़ा दिन है| आज सौ किलोमीटर से अधिक साईकिल चलाऊँगा| सुबह उजाला होते होते शुरुआत की| आज पहले ही घण्टे में कात्रज घाट या कात्रज टनेल की चढाई होगी| इस रूट पर कुछ दूरी तक पहले भी गया हूँ, इसलिए कोई कठिनाई नही है| पुणे के धायरी इलाके से निकलने के बाद थोड़ी देर में कात्रज टनेल की चढाई शुरू हुई| साईकिल में ब्लिंकर ऑन कर दिया| साथ में साईकिल पर और हेलमेट पर भी कई जगह पर लाल स्टिकर्स चिपकाए हैं| और लाईट में चमकनेवाला रिफ्लेक्टिव जैकेट भी पहना है| आज के दिन जरूर मुझे बरसात मिलेगी, उसकी भी अच्छी तैयारी की है| टनेल तक चढाई है और उसके बाद लम्बी उतराई! टनेल लगभग आठ किलोमीटर की चढाई के बाद आता है| सवा किलोमीटर टनेल में साईकिल चलाई| वाकई यह अनुभव कितने भी बार लिया हो, फिर भी अनुठा है| धीरे धीरे जैसे टनेल खत्म होता है, उजाला फिर से आता है|‌ यह हम सबके जीवन कहानि का भी हिस्सा है! अब यहाँ से निरंतर पच्चीस किलोमीटर तक उतराई|









Saturday, October 13, 2018

साईकिल पर कोंकण यात्रा भाग १: प्रस्तावना

भाग १: प्रस्तावना

नमस्ते! कोंकण में साईकिल पर घूमना मेरा कई बरसों का सपना सा था| पहले एक बार इसका असफल प्रयास भी किया था| लेकीन इस बार यह सपना सच हुआ| साईकिल पर कोंकण में घूम सका- अकेले सोलो साईकिलिंग करते हुए| अब इसके बारे में विस्तार से बात करता हूँ| पहली बात तो यह की यह यात्रा मेरी नई हायब्रिड साईकिल मेरीडा स्पीडर 100 पर पहली यात्रा है| मार्च में यह हायब्रिड साईकिल ली| इसपर दो शतक भी हुए, लेकीन हर बार पंक्चर हुआ| मेरी पुरानी एमटीबी साईकिल और यह हायब्रिड साईकिल में पुराने ज़माने का नोकिया का शुद्ध फोन- 3315 और अभी के जनरेशन का आई फोन सेवन जैसा अंतर है! इसलिए यह साईकिल सीखने में, समझने में और उसे अपनानें में बहुत दिक्कत हुई| साईकिल ही हो कर भी बहुत आधुनिक और अलग किस्म की साईकिल होने के कारण बहुत कुछ एडजस्ट करना पड़ा जैसे टायर प्रेशर, एक्सेसरीज के साथ तालमेल, सड़क पर ग्रिप आदि| धीरे धीरे यह सब सीखता गया| और इस प्रक्रिया में मेरे साईकिल मित्र आशिष फडणीस जी ने बहुत मार्गदर्शन दिया और साथ भी दिया! मेरे सभी सवालों और शंकाओं का धैर्य के साथ निरसन किया! वाकई मेरे सवाल बहुत थे और बहुत समस्याएँ भी आईं! कई बार तो लगता भी था कि इस नाज़ुक सी और बहुत रिजर्व किस्म की साईकिल के बजाय मेरी पुरानी एमटीबी साईकिल ही अच्छी जिसकी हर समस्या का इलाज हर अच्छे साईकिल दुकान में उपलब्ध है जबकी इस साईकिल को 'कुछ' भी हो गया, तो उसके लिए सीधे उसके शोरूम तक जाना पड़ रहा है| इसलिए मानसिक तौर पर भी काफी मशक्कत कर के साईकिल की बेसिक्स सीखनी पड़ी| लेकीन इन सबके दौरान आशिषजी ने बहुत मार्गदर्शन दिया और धीरे धीरे इस साईकिल से भी दोस्ती हो गई! इस साईकिल को मैने नाम भी दिया- मेरी!









Thursday, October 11, 2018

'योग जिज्ञासा: एटलस सायकलीवर योग यात्रा विशेषांक'

नमस्कार. नुकतंच जालना येथे 'योग संमेलन' झालं. चैतन्य योग केंद्र जालना व निरामय योग प्रसार व संशोधन केंद्रातर्फे आयोजित ह्या योग संमेलनामध्ये 'योग जिज्ञासा: एटलस सायकलीवर योग यात्रा विशेषांक' प्रकाशित करण्यात आला. गेल्या मे महिन्यामध्ये परभणी- जालना- औरंगाबाद व बुलढाणा जिल्ह्यात ५९५ किमी सायकल प्रवासातून विविध योग साधकांसोबत झालेल्या भेटी, त्यांचे अनुभव, ठिकठिकाणची योग केंद्रे/ योग साधक ह्यांचे पत्ते व संपर्क क्रमांक ह्यांचे तपशील असलेला हा विशेषांक आहे. योगामुळे आयुष्यात काय फरक पडला, हे २७ साधक- साधिकांच्या अनुभवातून आपल्याला कळतं. त्याबरोबरच मराठवाडा भागातल्या अनेक ठिकाणच्या योग केंद्रांची व योग- साधकांची माहितीही मिळते. हा विशेषांक प्रत्येक योग प्रेमी व सायकल प्रेमीच्या संग्रही असावा असा आहे.

हे पुस्तक कुठे मिळेल:

निरामय योग प्रसार व संशोधन संस्था, गोरेकाका भवन, अक्षदा मंगल कार्यालयाजवळ, विद्यापीठ रस्ता, परभणी ४३१४०१. सहभाग मूल्य रू. १००/-.
हे पुस्तक ऑनलाईन हवं असल्यास संस्थेच्या खात्यात पेमेंट करून पुढील मेलवर पावती व आपला पूर्ण पत्ता पाठवून संपर्क करता येईल. कूरियरने आपल्याला पुस्तक पाठवले जाईल.

डॉ. धीरज देशपांडे 09420033773, 08329595332 drdddeshpande@gmail.com
श्री. राहुल झांबड 09028968879, 09422968870 rahulzambad2014@gmail.com

संस्थेच्या बँक खात्याचे तपशील:

A/c no. 60116294640 Nirmaya yog Prasar and sanshodhan Kendra Parbhani Bank of Maharashtra Parbhani main branch, Parbhani IFSC code MAHB0000103

धन्यवाद! हे पुस्तक आपण घेऊ शकता किंवा आपल्या जवळच्या सायकलप्रेमी/ योग प्रेमींना भेट म्हणूनही देऊ शकता.
 
 

Wednesday, October 3, 2018

पिथौरागढ़ में भ्रमण ८ (अन्तिम): पिथौरागढ़ से वापसी

८ (अन्तिम): पिथौरागढ़ से वापसी
 

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२ दिसम्बर २०१७ की सुबह| कल रात की यात्रा कर पिथौरागढ़ पहुँचे| आज मुझे यहाँ से निकलना है, क्यों कि कल दोपहर को दिल्ली से ट्रेन है| वैसे तो कल लोहाघाट से ही मै जा सकता था, लेकीन उसके लिए एक रात लोहाघाट में ठहरना पड़ता| उसके बजाय सभी के साथ वापस पिथौरागढ़ आया, रात की यात्रा का भी अनुभव लिया| मेरे साथ में आए हुए लोग और कुछ दिन यहाँ रूकेंगे| लेकीन मुझे छुट्टियों की कमी के कारण निकलना होगा| लेकीन ये सांत दिन बेहद अनुठे रहे| लगभग ढाई सालों के बाद हिमालय का दर्शन हुआ और सद्गड़ और कांडा के रोमांचक ट्रेक हुए| हिमालय की गोद में होनेवाले गाँवों में रहने का मौका मिला! अब इन्ही यादों को संजोते हुए यहाँ से निकलना है|








Monday, October 1, 2018

पिथौरागढ़ में भ्रमण भाग ७: लोहाघाट यात्रा

७: लोहाघाट यात्रा
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१ दिसम्बर २०१७ की दोपहर लोहाघाट जाने के लिए जीप से निकले| सुबह अच्छा ट्रेक हुआ है और अब जीप से यात्रा करनी है| यहाँ पहाड़ी सड़कों पर वाहन से जाना भी एक तरह का ट्रेक होता है| रास्ते में कल रखा हुआ सामान एक दुकान से वापस लिया और आगे बढ़े| जीप से और भी नजारे दिखाई देते रहे| थोड़ी देर में पिथौरागढ़ पहुँचे| यहाँ से लोहाघाट ६० किलोमीटर है| लेकीन सड़क पूरी पहाड़ी होने के कारण यह थकानेवाली यात्रा होगी| पिथौरागढ़ से आगे गुरना माता मन्दीर के आगे एक जगह जीपें बहुत देर तक रूकी| यहाँ सड़क पर निर्माण कार्य किया जा रहा है जिसके लिए सड़क रोकी गई और वाहनों की लम्बी कतार हो गई| इस स्थान से कुछ दूरी पर नीचे खाई में रामगंगा बह रही है| थोड़ी देर नजारों का आनन्द लिया| दोपहर होते हुए भी दिसम्बर का दिन होने के कारण अब ठण्ड लग रही है|







Monday, September 3, 2018

पिथौरागढ़ में भ्रमण भाग ६: काण्डा गाँव से वापसी

६: काण्डा गाँव से वापसी
 

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१ दिसम्बर २०१७ की सुबह| काण्डा गाँव में विवाह का माहौल है| रातभर लोग जगते रहे| नाच- गाना भी हुआ| सुबह जल्दी निकलने की तैयारी है| यहीं से बारात निकलेगी| सुबह रोशनी आने के पहले अन्धेरे में इस गाँव का अलग दर्शन हुआ| चाय- नाश्ता ले कर यहाँ से निकलने के लिए चले| अब कल वाला ट्रेक फिर उल्टी दिशा में करना है| ट्रेक तो छोटा सा ही है| एक दो जगहों पर ही एक्स्पोजर है या पैर फिसलने जैसी सम्भावना है| कल आते समय मेरी बेटी को आशा ने लाया था| बहुत दूरी वह पैदल चली और फिर गोद में बैठ कर| ट्रेक तो मै आराम से कर लूँगा, लेकीन ऐसी जगह बेटी को उठा कर ले जाने का साहस मुझमें नही है| उसे तो यहाँ की स्थानीय दिदी उठा कर ले जाएगी, ऐसा तय हुआ| मैने कुछ सामान उठा लिया| और सुबह की ओस की‌ उपस्थिति में ही निकल पड़े| साथ ही बारात भी निकली| एक जगह मन्दीर में दर्शन ले कर वे आगे आएंगे| यहाँ कोई‌ भी वाहन नही आ सकता है| इसलिए सबको पैदल ही चलना है| अगर कुछ बड़ा सामान होता है, तो उसके लिए घोडा है|








Monday, August 27, 2018

पिथौरागढ़ में भ्रमण भाग ५: काण्डा गाँव का रोमांचक ट्रेक

५: काण्डा गाँव का रोमांचक ट्रेक

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३० नवम्बर २०१७ की दोपहर| सद्गड- पिथौरागड़ जा कर अब काण्डा गाँव जाना है| काण्डा गाँव सड़क से जुड़ा हुआ नही है, इसलिए यहाँ एक छोटा ट्रेक करना है| साथ के लोगों ने कहा भी, की कुछ ही समय पहले तक यहाँ बनी सड़क भी नही थी और दूर से ही पैदल चलना होता था| जैसे ही जीप से उतरे, सामने नीचे उतरती पगडण्डी दिखी और साथ में घोडे भी दिखे! इस ट्रेक के बारे में रिश्तेदारों ने बताया भी था| और शुरू हो गया एक सुन्दर ट्रेक! सड़क से पगडण्डी सीधा जंगल में जाने लगी और नीचे भी उतरने लगी| एक घना जंगल सामने आया और पगडण्डी धीरे धीरे और सिकुड़ती गई|








Monday, August 13, 2018

पिथौरागढ़ में भ्रमण भाग ४: काण्डा गाँव के लिए प्रस्थान

४: काण्डा गाँव के लिए प्रस्थान
 

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३० नवम्बर २०१७| आज सद्गड से निकलना है| गाँव में से दिखता हुआ कल का ध्वज मंदीर! वह इस परिसर का सबसे ऊँचा स्थान है| और वहाँ नेपाल का नेटवर्क मोबाईल ने पकड़ा था! आज थोड़ी गाँव की सैर की जाए| सुबह जल्द उठ कर निकला| पगडंडी के साथ साथ चल कर नीचे उतरा और सड़क पर पहुँचा! यह एक हिमालयीन गाँव! सड़क से सट कर होने के कारण दुर्गम तो नही कह सकते, लेकीन पहाड़ी गाँव! गाँव में दोपहिया वाहन एक- दो के पास ही हैं| जरूरत भी नही पड़ती है| एक तो घर तक वाहन आ भी‌ नही पाते हैं| यहाँ के लोग खेती के साथ इस भूगोल से जुड़े व्यवसाय करते हैं- जैसे मिलिटरी, बीआरओ और आयटीबीपी और उससे जुड़े कामों में बहुत लोग होते हैं; कुछ सरकार के साथ काम करते हैं; और कोई बीस किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ में नौकरी भी करते हैं| शहर की हवा यहाँ भी पहुँची है| सद्गड़ के कई बच्चे अंग्रेजी माध्यम की स्कूल में पढ़ते हैं; उन्हे स्कूल बस भी नीचे रोड़ से मिलती है|









Thursday, August 9, 2018

पिथौरागढ़ में भ्रमण भाग ३: एक सुन्दर ट्रेक: ध्वज मन्दीर

३: एक सुन्दर ट्रेक: ध्वज मन्दीर
 

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२९ नवम्बर २०१७ की‌ सर्द सुबह और हिमालय की गोद में बसा हुआ सद्गड गाँव! रात में ठण्ड बहुत ज्यादा थी| रात में एक बार उठना हुआ तो ठण्ड का एहसास हुआ| यह घर ठीक पहाड़ में और वन के करीब बसा है| यहाँ के लोग बताते हैं कि वन्य पशू रात में यहाँ से गुजरते हैं| वे खेत में नुकसान ना करे, इसके लिए खेत में इलेक्ट्रिक तार भी लगाते हैं| हिमालय के कई हिस्सों में घर के पालतू जानवर- जैसे कुत्ता, भैंस आदि को शेर द्वारा ले जाना आम बात है... सुबह भी ठण्ड बहुत ज्यादा है| हाथ धोने के लिए तक गर्म पानी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है| इन दिनों में यहाँ नहाना कंपल्सरी भी नही होता है| यहाँ की ठण्ड में सुबह के हल्की धूप में बैठ कर चाय का स्वाद लेना अपने में एक अनुभव है!