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Tuesday, June 12, 2018

एटलस साईकिल पर योग- यात्रा भाग ७: औरंगाबाद- जालना

७: औरंगाबाद- जालना

योग साईकिल यात्रा का छटा दिन, १६ मई की सुबह| कल औरंगाबाद में अच्छी चर्चा हुई और आज अब औरंगाबाद से जालना जाना है| जालना एक तरह से इस पूरी योग- यात्रा का केन्द्र बिन्दू रहा है| जब से इस यात्रा की योजना बनी, यह विषय सब साधकों के सामने रखा गया तब से जालना के लोग इसमें अग्रेसर रहे| उन्होने इस पूरी यात्रा के आयोजन में बहुत सहभाग लेना शुरू किया और बहुत अच्छा प्रतिसाद भी दिया| मेरा हौसला भी बढाया| जालना के चैतन्य योग केंद्र से सीखे योग साधकाओं से पहले परतूर और अंबड में मिला ही हूँ| आज यह केन्द्र देखना है, यहाँ के साधकों से बातचीत करनी है| कल डॉ. पटेल सर से मिलना इस पूरी यात्रा का एक शिखर था और आज जालना में हुए कार्य- विस्तार को देखना एक दूसरा चरम बिन्दू है! जालना और औरंगाबाद में मेरी यात्रा के बारे में अखबारों में खबर भी आयी हैं| पहले मेरी योजना बनी थी, तब भी खबर दी गई थी| कुल मिला कर इस यात्रा के दौरान मेरी कम से कम दस- बारह खबरें तो आयी ही होगी! यह भी वहाँ के साधकों की तैयारी और उनके कार्य की गहराई दर्शाता है|

हर रोज की तरह आज भी सुबह बहुत जल्द, ५.४५ बजे निकला| आज की दूरी वैसे ६० किलोमीटर है| लेकीन अब शरीर के लिए यह दूरी बहुत कम लग रही है| और आज की सड़क इस पूरी यात्रा की सबसे शानदार सड़क है| बहुत बढिया दो- दो लेनवाली मेरी पसंतीदा सड़क! इसलिए आज जल्दी ही पहुँचूँगा| और दूसरी बात यह भी है कि इस सड़क पर औरंगाबाद से जालना जाते समय हल्की ढलान भी है जिससे और भी आसानी होगी| तथा आज तक मै बहती हवा की विपरित दिशा में साईकिल चला रहा था, आज कुछ हद तक हवा भी मेरा साथ देगी! सुबह की ताज़गी में बढ़ चला| और बिना रूके बढ़ता ही गया| जल्द ही पता चला कि आज तो पूरी बॅटींग पिच है भाई! अब तक कुछ साधारण और कुछ निम्न साधारण सड़कों से गुजर चुका हूँ| आज का दिन मेरे लिए और मेरी साईकिल के लिए बॅटिंग पिच जैसा है! सुहावना मौसम, आसपास दिखाई देनेवाले पहाड़ और सड़क भी उतनी ही रोमँटीक! और क्या चाहिए!