३: जिंतूर- परतूर
१२ मई की सुबह| ठीक साढ़ेपाँच बजे जिंतूर से निकला| रात में अच्छी नीन्द होने से ताज़ा महसूस कर रहा हूँ| आज ६२ किलोमीटर साईकिल चलाने का उद्देश्य है| मेरे कारण जिंतूर के डॉ. पारवे जी सुबह जल्दी उठ गए और मुझे विदा देने के लिए भी सड़क तक आए| सुबह की ताज़गी में साईकिल चलाना एक बहुत बड़ा सुख है! अच्छी नीन्द के कारण थकान की भरपाई हो गई है| कल जब बहुत थकान के बीच एक बार हल्का सा डर लगा था, तब इस यात्रा पर कुछ क्षण प्रश्नचिह्न उठा था| लेकीन तब तय किया कि पूरी यात्रा के बारे में अभी सोचूँगा ही नही| अभी सिर्फ उस समय की स्थिति पर ध्यान दूँगा| इसलिए बस आज के पड़ाव के बारे में सोचते हुए आगे बढ़ चला| विपश्यना में इसे 'इस क्षण की सच्चाई' कहते हैं|
जिन्तूर से आगे बढ़ते समय सड़क के आसपास कुछ छोटी पहाडियाँ हैं| सड़क भी चढती- उतरती है| यह सिंगल गेअर की साईकिल होने के कारण चढाई महसूस होती है| साईकिल के टायर्स अभी पूरे एडजस्ट नही हुए हैं, इसलिए उतराई पर भी ज्यादा स्पीड नही मिल रही है| सड़क पर कुछ गावों में पाणी फाउंडेशन का बोर्ड दिखा| कल ही मंठा के योग- साधकों से बात हुई थी| आज मेरे रूट पर मंठा गाँव आएगा जो मेरी यात्रा में लौटते समय एक पडाव का स्थान होगा| मंठा से जाते समय उन्होने मिलने के लिए कहा है| इसलिए उनसे मिलूँगा|

१२ मई की सुबह| ठीक साढ़ेपाँच बजे जिंतूर से निकला| रात में अच्छी नीन्द होने से ताज़ा महसूस कर रहा हूँ| आज ६२ किलोमीटर साईकिल चलाने का उद्देश्य है| मेरे कारण जिंतूर के डॉ. पारवे जी सुबह जल्दी उठ गए और मुझे विदा देने के लिए भी सड़क तक आए| सुबह की ताज़गी में साईकिल चलाना एक बहुत बड़ा सुख है! अच्छी नीन्द के कारण थकान की भरपाई हो गई है| कल जब बहुत थकान के बीच एक बार हल्का सा डर लगा था, तब इस यात्रा पर कुछ क्षण प्रश्नचिह्न उठा था| लेकीन तब तय किया कि पूरी यात्रा के बारे में अभी सोचूँगा ही नही| अभी सिर्फ उस समय की स्थिति पर ध्यान दूँगा| इसलिए बस आज के पड़ाव के बारे में सोचते हुए आगे बढ़ चला| विपश्यना में इसे 'इस क्षण की सच्चाई' कहते हैं|
जिन्तूर से आगे बढ़ते समय सड़क के आसपास कुछ छोटी पहाडियाँ हैं| सड़क भी चढती- उतरती है| यह सिंगल गेअर की साईकिल होने के कारण चढाई महसूस होती है| साईकिल के टायर्स अभी पूरे एडजस्ट नही हुए हैं, इसलिए उतराई पर भी ज्यादा स्पीड नही मिल रही है| सड़क पर कुछ गावों में पाणी फाउंडेशन का बोर्ड दिखा| कल ही मंठा के योग- साधकों से बात हुई थी| आज मेरे रूट पर मंठा गाँव आएगा जो मेरी यात्रा में लौटते समय एक पडाव का स्थान होगा| मंठा से जाते समय उन्होने मिलने के लिए कहा है| इसलिए उनसे मिलूँगा|