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Thursday, October 10, 2024

सायकलीवर शिवथरघळ- एक अविस्मरणीय अनुभूती

✪ सह्याद्री पर्वतरांग व कोकणाचा संगम असलेली शिवथरघळ!
✪ "केल्याने होत आहे रे, आधी केलेची पाहिजे!"
✪ सोलो सायकलिंग नव्हे निसर्गाच्या सान्निध्यातली तीर्थयात्रा!
✪ शेकडो धबधबे, असंख्य डोंगर आणि अजस्र वरांधा घाट
✪ अजस्र धबधबा- जीवंत प्रवाहाचं रमणीय प्रतिक
✪ आयुष्यभराचा अनुभव देणारी १२४ किमीची थरारक सायकल राईड
✪ अनेक किल्ल्यांच्या परिसरातलं निसर्गाचं विराट रूप दर्शन
✪ परतीच्या थरारक प्रवासाची उत्सुकता

सर्वांना नमस्कार. २८ सप्टेंबर २०२४! कधी कधी आपल्याला अशी बुद्धी झाली ह्याचा आपल्यालाच विलक्षण आनंद होतो! खूप दिवसांपासून शिवथरघळ सायकल राईड करायची इच्छा होती. पावसाळ्यात बराच काळ वरांधा घाट बंद असतो. शिवाय ह्या भागामध्ये पाऊसही फार असतो. त्यामुळे राहून जात होतं. पण मग ठरलं. तरी निघतानासुद्धा पावसाची शक्यता होती. पण आतल्या आवाजाचं ऐकून निघालो! आणि नंतर स्वत:च्या नशीबाला असंख्य धन्यवाद देत राहिलो! पुणे ते शिवथरघळ अंतर साधारण १२० किमी! भोरच्या पुढे घाटाचा रस्ता व त्यामुळे साधारण ७-८ तास लागतील. अगदी कसोटी क्रिकेटमधल्या बॅटिंगसारखी ही खेळी असेल! सकाळी पावसाचा अंदाज बघण्यात वेळ गेल्यामुळे निघायला पावणेसात वाजले!





Wednesday, October 31, 2018

साईकिल पर कोंकण यात्रा भाग ६: देवगड़ बीच और किला

६: देवगड़ बीच और किला

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देवगड़ में‌ पहुँचने की‌ उत्तेजना काफी देर रही| फार्म हाउस के विरान इलाके में वह दिन बिता| पाँच दिनों में ४१३ किलोमीटर से अधिक दूरी पार हो गई! इस साईकिल को कैसे धन्यवाद दूं? यह फार्म हाऊस मुख्य सड़क से लगभग आधा किलोमीटर अन्दर है और यहाँ की सड़क बिल्कुल कच्ची और पथरिली है| आते समय पहले तो लगा कि साईकिल पैदल ही लानी ठीक होगी| लेकीन इतने दिन साईकिल चलाने से हौसला बढ़ गया था| इसलिए धीरे धीरे उस कच्ची सड़क या ट्रेल पर भी साईकिल चला के घर पहुँचा था| मेरे रिश्तेदार कल आएंगे, इसलिए घर में‌ भी खामोशी है| यहाँ ठहरना एक तरह से बाहरी दुनिया से सम्पर्क क्षीण करने जैसा है| टिवी नही, इंटरनेट भी‌ धिमा और कभी भी रूक जाएगा ऐसा| लेकीन रिलैक्स करने के लिए बहुत बेहतर माहौल| अब एक तरह से इस यात्रा का मुख्य हिस्सा पूरा हुआ है| इसलिए मन से भी रिलैक्स महसूस कर रहा हूँ| अच्छे विश्राम के बाद ११ सितम्बर  को अब देवगड़ किला और बीच देखना है|








Monday, October 29, 2018

साईकिल पर कोंकण यात्रा भाग ५: राजापूर- देवगड़ (५२ किमी)

भाग ५: राजापूर- देवगड़ (५२ किमी)
 

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१० सितम्बर की सुबह| आज बहुत छोटा सा चरण है- सिर्फ ५१ किलोमीटर है| लेकीन एक तरह से आज मेरा सपना पूरा होने जा रहा है, इसलिए मन में बहुत उत्तेजना है| लगातार चार दिनों में ३५० किलोमीटर से अधिक दूरी पार करने से आज की दूरी बहुत मामुली हो गई है| हालांकी समय तो लगेगा, लेकीन चिन्ता बिल्कुल नही होगी| जैसे औपचारिकता बची है| लेकीन सुबह जब निकला तो मन में भाव सिर्फ एंजॉय करने का है| रोशनी होते होते जब निकला, तो दूर आसमान में अन्धेरा दिख रहा है| एक बार बरसात का डर भी लगा| लेकीन थोड़ी ही‌ देर में पता चला कि यह तो धुन्ध है| और इसका मतलब यह भी है कि अब बारीश आने की सम्भावना एकदम कम हो गई है| राजापूर से निकल कर जैसे ही‌ मुंबई- गोवा हायवे छोड दिया, तो बहुत ही सुन्दर और उपर चढ़नेवाली सड़क मिली| और थोड़ा आगे जाने के बाद जैसे कोहरे का समुद्र लगा! आज समुद्र तो मिलेगा ही, लेकीन उसके पहले कोहरे का समुद्र! वाह, अद्भुत नजारा! और कितनी रोमँटीक और लगभग निर्जन सड़क!