४. पंढरपूर से बार्शी
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१५ नवम्बर| कल लगातार दूसरे दिन पंक्चर होने से एक तरह से अब भी अस्वस्थ हूँ| पंक्चर तो मैने ठीक कर दिया है, लेकीन फिर होने का डर है| कल सोने में बहुत देर होने पर भी सुबह फ्रेश लग रहा है| सुबह बच्चों से विदा लिया, पालवी संस्था की दिदी से विदा लिया| अच्छी खासी ठण्ड लग रही है| पंढरपूर गाँव में से शेटफळ की सड़क पूछ कर आगे निकला| जब इस यात्रा का रूट प्लैन बनाया और योजना बनाई, तो हर दिन लगभग ८०- ८५ किलोमीटर साईकिल चलाने का लक्ष्य रखा| ऐसे रूट बनाते समय कई बार बहुत इंटेरिअर की सड़के लेनी पड़ी| आज भी मुझे ऐसी ही सड़क से जाना है| पंढरपूर गाँव के बाद चंद्रभागा नदी का पूल पार करते ही ऐसी ही सड़क लगी! पंढरपूर इतना बड़ा तीर्थ क्षेत्र और उसके बाद दिया तले अंधेरा! देखा तो पूरी तरह उखाड़ दी है! नई सड़क बनाने के पहले पुरानी को तोड़ दिया है! मन ही मन उम्मीद कर रहा हूँ कि आगे जा कर कुछ ठीक होगी|


चन्द्रभागा और पण्ढरपूर!
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१५ नवम्बर| कल लगातार दूसरे दिन पंक्चर होने से एक तरह से अब भी अस्वस्थ हूँ| पंक्चर तो मैने ठीक कर दिया है, लेकीन फिर होने का डर है| कल सोने में बहुत देर होने पर भी सुबह फ्रेश लग रहा है| सुबह बच्चों से विदा लिया, पालवी संस्था की दिदी से विदा लिया| अच्छी खासी ठण्ड लग रही है| पंढरपूर गाँव में से शेटफळ की सड़क पूछ कर आगे निकला| जब इस यात्रा का रूट प्लैन बनाया और योजना बनाई, तो हर दिन लगभग ८०- ८५ किलोमीटर साईकिल चलाने का लक्ष्य रखा| ऐसे रूट बनाते समय कई बार बहुत इंटेरिअर की सड़के लेनी पड़ी| आज भी मुझे ऐसी ही सड़क से जाना है| पंढरपूर गाँव के बाद चंद्रभागा नदी का पूल पार करते ही ऐसी ही सड़क लगी! पंढरपूर इतना बड़ा तीर्थ क्षेत्र और उसके बाद दिया तले अंधेरा! देखा तो पूरी तरह उखाड़ दी है! नई सड़क बनाने के पहले पुरानी को तोड़ दिया है! मन ही मन उम्मीद कर रहा हूँ कि आगे जा कर कुछ ठीक होगी|
चन्द्रभागा और पण्ढरपूर!