१४. रिसोड से परभणी
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२५ नवम्बर की सुबह! इस यात्रा का आखरी दिन है| आज परभणी में समापन कार्यक्रम होनेवाला है| इस साईकिल यात्रा में अन्तिम दिन कब आता है, यह डेस्परेशन तो बिल्कुल नही था, लेकीन एक रोमांच जरूर है| और यह रोमांच आज भी जारी रहेगा| क्यों कि आज कुछ दूरी मुझे अज्ञात सड़क से पार करनी है| अज्ञात या जिसकी स्थिति अज्ञात है, ऐसी सड़क| और आगे भी बीच बीच में कम दर्जे की सड़क मिलेगी, जिससे आज का यह चरण थोड़ा अधिक समय लेगा| रिसोड ग्रामीण रुग्णालय में श्री निखाडे सर के घर चाय पी कर निकला| कल निखाडे सर ने बताया था कि एक जमाने में जब रिसोड अकोला जिले में था, तब यहाँ की पोस्टींग पनिशमेंट समझी जाती थी! क्यों कि रिसोड एक तरह से काफी दूर दराज का इलाका है| उजाला होते होते निकला| रिसोड से साखरा और हत्ता गाँव की सड़क से येलदरी जाऊँगा| शुरू में लोणार की ओर जानेवाली सड़क है| लेकीन क्या माहौल है! बिल्कुल सुनसान सड़क, बहुत देर में कोई वाहन मिल रहा है| और सब तरफ खेत- कुदरत का राज! कुछ किलोमीटर तक तो सड़क अच्छी है, यह पता था| असली मज़ा उसके बाद शुरू होगा!


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२५ नवम्बर की सुबह! इस यात्रा का आखरी दिन है| आज परभणी में समापन कार्यक्रम होनेवाला है| इस साईकिल यात्रा में अन्तिम दिन कब आता है, यह डेस्परेशन तो बिल्कुल नही था, लेकीन एक रोमांच जरूर है| और यह रोमांच आज भी जारी रहेगा| क्यों कि आज कुछ दूरी मुझे अज्ञात सड़क से पार करनी है| अज्ञात या जिसकी स्थिति अज्ञात है, ऐसी सड़क| और आगे भी बीच बीच में कम दर्जे की सड़क मिलेगी, जिससे आज का यह चरण थोड़ा अधिक समय लेगा| रिसोड ग्रामीण रुग्णालय में श्री निखाडे सर के घर चाय पी कर निकला| कल निखाडे सर ने बताया था कि एक जमाने में जब रिसोड अकोला जिले में था, तब यहाँ की पोस्टींग पनिशमेंट समझी जाती थी! क्यों कि रिसोड एक तरह से काफी दूर दराज का इलाका है| उजाला होते होते निकला| रिसोड से साखरा और हत्ता गाँव की सड़क से येलदरी जाऊँगा| शुरू में लोणार की ओर जानेवाली सड़क है| लेकीन क्या माहौल है! बिल्कुल सुनसान सड़क, बहुत देर में कोई वाहन मिल रहा है| और सब तरफ खेत- कुदरत का राज! कुछ किलोमीटर तक तो सड़क अच्छी है, यह पता था| असली मज़ा उसके बाद शुरू होगा!