९. अहमदपूर से नान्देड
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२० नवम्बर, इस यात्रा का नौवा दिन| अहमदपूर में सुबह निकलते समय आसमां बिल्कुल साफ है| संयोग से मै यहाँ जिनके पास ठहरा था, वे आज परभणी मेरे पिताजी के पास जा रहे हैं| इसलिए कुछ वजन उनके पास भेज दिया| साईकिल पर लगभग बारह किलो का सामान होगा, उसमें से एक- डेढ किलो कम हुआ| सामान अगर ठीक से रखा जाए, तो महसूस भी नही होता है| और अब इतने दिनों के बाद मुझे बिल्कुल भी महसूस नही होता है| आज का चरण भी छोटा ही है| यहाँ से नान्देड तक ७४ किलोमीटर साईकिल चलाऊँगा| आज के दिन की खास बात यह रहेगी कि नान्देड मेरा ननिहाल है और आज मै मामा के घर पर ठहरूँगा| इस स्वप्नवत् यात्रा का और एक सुनहरा दिन!


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२० नवम्बर, इस यात्रा का नौवा दिन| अहमदपूर में सुबह निकलते समय आसमां बिल्कुल साफ है| संयोग से मै यहाँ जिनके पास ठहरा था, वे आज परभणी मेरे पिताजी के पास जा रहे हैं| इसलिए कुछ वजन उनके पास भेज दिया| साईकिल पर लगभग बारह किलो का सामान होगा, उसमें से एक- डेढ किलो कम हुआ| सामान अगर ठीक से रखा जाए, तो महसूस भी नही होता है| और अब इतने दिनों के बाद मुझे बिल्कुल भी महसूस नही होता है| आज का चरण भी छोटा ही है| यहाँ से नान्देड तक ७४ किलोमीटर साईकिल चलाऊँगा| आज के दिन की खास बात यह रहेगी कि नान्देड मेरा ननिहाल है और आज मै मामा के घर पर ठहरूँगा| इस स्वप्नवत् यात्रा का और एक सुनहरा दिन!