Thursday, August 9, 2018

पिथौरागढ़ में भ्रमण भाग ३: एक सुन्दर ट्रेक: ध्वज मन्दीर

३: एक सुन्दर ट्रेक: ध्वज मन्दीर
 

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२९ नवम्बर २०१७ की‌ सर्द सुबह और हिमालय की गोद में बसा हुआ सद्गड गाँव! रात में ठण्ड बहुत ज्यादा थी| रात में एक बार उठना हुआ तो ठण्ड का एहसास हुआ| यह घर ठीक पहाड़ में और वन के करीब बसा है| यहाँ के लोग बताते हैं कि वन्य पशू रात में यहाँ से गुजरते हैं| वे खेत में नुकसान ना करे, इसके लिए खेत में इलेक्ट्रिक तार भी लगाते हैं| हिमालय के कई हिस्सों में घर के पालतू जानवर- जैसे कुत्ता, भैंस आदि को शेर द्वारा ले जाना आम बात है... सुबह भी ठण्ड बहुत ज्यादा है| हाथ धोने के लिए तक गर्म पानी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है| इन दिनों में यहाँ नहाना कंपल्सरी भी नही होता है| यहाँ की ठण्ड में सुबह के हल्की धूप में बैठ कर चाय का स्वाद लेना अपने में एक अनुभव है!







कल रात अच्छी नीन्द हुई है और मेरे हाथ में‌ बहुत कम दिन है| इसलिए आज भी घूमना है| मेरे रिश्तेदारों से थोड़ा पता किया कि पास में कहाँ घूमने जाया जा सकता है|‌ तब पता चला कि पास ही एक मन्दीर है- धज मन्दीर| यहाँ से पहाड़ पर उसका शिखर दिखाई भी देता है| मेरी पत्नि की बहन के पति- नवीनजी को पूछा| बाद में वही मुझे वहाँ ले जाने के लिए तैयार हुए| सामने की चोटी पर दिखाई देनेवाला मन्दीर जरूर यहाँ से तीन- चार किलोमीटर दूर होगा और पगडण्डी चढाईभरी होगी| हम दोनों के साथ नवीनजी का नौ साल का बेटा आयुष भी आने के लिए तैयार हुआ| मेरे लिए यह एक अच्छा ट्रेक रहेगा! काफी चलना होगा इसलिए मै स्वेटर न लेते हुए जा रहा था, तब लोगों ने मुझे स्वेटर रखने के लिए कहा| बताया कि चलते हुए भी ठण्ड लगेगी और बीच में घने पेड़ों के बीच धूप भी नही होगी| इसलिए स्वेटर भी रख लिया जो बाद में बड़ा काम आया|



सद्गड गाँव में यहाँ से बस दो- तीन घर और उपर है| आगे बढ़ने पर घास के ढेर ले जाती महिलाएँ दिखी| गाँव में सब सबसे जुड़े होते हैं, इसलिए नवीनजी ने उनसे बात की| यहाँ एक छोटा मन्दीर भी है| यहाँ कई सारी पैदल राहे हैं| इनमें‌ एक मुख्य राह आगे मन्दीर की तरफ जाएगी| धीरे धीरे गाँव पीछे छूटता गया| लेकीन उपर चढने पर पूरा गाँव दिखने लगा, फिर और उपर आने पर दूर से आनेवाली सड़क भी दिखाई दी| यह पगडण्डी अच्छी है| धज का यह मन्दीर- जिसे स्थानीय लोग धज कहते हैं- यह ध्वज मन्दीर स्थानीय लोगों में महत्त्व का है| यहाँ कई उत्सव भी होते हैं| इसलिए जाने की पगडण्डी अच्छी बनी हुई है| उपर चढने के साथ दूर के हिम शिखर भी दिखाई देने लगे! वाह! बीच में एक जगह विश्राम के लिए बैठने की जगह भी बनाई हुई है| लगभग आधी दूरी पार करने पर पगडण्डी का स्तर और निम्न हो गया| अब यहाँ से सिर्फ मिट्टी की पगडण्डी है| चढाई अविरत है, लेकीन पैदल चलने में कोई दिक्कत नही आ रही है| बीच बीच में बहुत थोड़ा खाई का एक्स्पोजर है, वो भी नौसिखिए ट्रेकर के लिए| लेकीन एक बात जरूर, यह ट्रेक बरसाती दिनों में बहुत मुश्किल होता होगा| क्यों कि यहाँ मिट्टी की पगडण्डी ही है जो बारीश में बहुत फिसलन पैदा करती होगी| खैर|





बीच बीच में रूकते, फोटो खींचते चलते रहे| वाकई नजारे लाजबाब है| बिल्कुल पेडों के बीच में से यह पगडण्डी जाती है| बीच बीच में हिम शिखरों के नजारे दिखाई देते हैं| तथा दूर के गाँवों की बस्ती और नीचे की कुछ सड़कें भी दिखाई देती हैं| उपर दो मन्दीर है| कुछ साधू भी हैं| यहाँ इस मन्दीर में हायवे से आनेवाली और एक पगडण्डी लगी| सभी मन्दीरों में कुछ देर तक टहलना हुआ| इतना चलने के बाद भी यहाँ पर अब ठण्ड लग रही है| इसकी ऊँचाई भी अच्छी खासी होगी| जनवरी में यहाँ बरफ गिरती है| वैसे जनवरी में सद्गड क्या पिथौरागढ़ शहर में भी बरफ होती है|

सबसे उपर के मन्दीर से चारों तरफ अच्छे नजारे दिख रहे हैं| नवीनजी ने बताया कि यहाँ से अलमोडा भी थोड़ा दिखाई देता है| मुख्य ध्वज मन्दीर में घण्टा बजाई| नवीनजी ने बताया की इसकी ध्वनि नीचे पूरे गाँव में सुनाई देती है| यहाँ बड़ी यात्रा होती है| इसलिए छोटा भवन भी है, कुछ जगह रात में ठहरने के लिए भी है| लेकीन कोई होटल नही और अन्य कोई सुविधा नही| साथ में लाए केले और चिक्की खाई| अब तक दोपहर हो गई है और बादल आने लगे हैं| जल्द ही वापस निकले| वापसी में कुछ कठिनाई होगी, क्यों कि कुछ जगह पर थोड़ी कच्ची पगडण्डी है| लेकीन जल्द उतरते गए और देखते देखते जमीन पास आती गई| मैने इससे कठीन होनेवाले कुछ ट्रेक पहले किए हैं, इसलिए यह मेरे लिए बहुत आसान लेकीन बहुत सुन्दर ट्रेक रहा| और रही थकान की बात तो मेरी साईकिलिंग और रनिंग यहाँ बहुत काम आई| रत्ती भर भी थकान नही हुई| दोपहर के भोजन तक वापस पहुँचा| जैसे घर पास आता गया, मैने मेरी बेटी को आवाज दी और वह भी‌ मेरा नाम पुकारते हुए सामने आई| पहुँचने पर पूरी दूरी का जीपीएस का रेकॉर्ड देखा| सद्गड की ऊँचाई १८०० मीटर से अधिक है और यह मन्दीर करीब २४०० मीटर ऊँचाई पर है, यह पता चला| करीब पाँच किलोमीटर का यह शानदार ट्रेक रहा| 







सद्गड का स्थान और नीचे पिथौरागढ़- धारचुला सड़क
 

दोपहर में कुछ विश्राम किया और शाम को गाँव में घूमना हुआ| पूरा सद्गड चढाई पर बंसा है, इसलिए पगडण्डी नीचे उतरती है- चढती है| चढाई पर ही बंसे हुए छोटे घर और खेत! और सबसे बड़ी बात वहाँ के सीधे सादे लोग! वाकई हिमालय की गोद में रहनेवाले! आज का दिन बहुत अच्छा बीत रहा है| और  अब जल्द ही रात होगी| ठण्ड और चाय की चुस्कियाँ जारी रही और दिन धीरे धीरे बितता गया! वाह!

क्रमश:

अगला भाग- पिथौरागढ़ में भ्रमण भाग ४: काण्डा गाँव के लिए प्रस्थान

2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (11-08-2018) को "धार्मिक आस्था के नाम पर अराजकता" (चर्चा अंक-3060) (चर्चा अंक-2968) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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