Tuesday, April 30, 2019

“भाग दौड़" भरी ज़िन्दगी ६: हाफ मैरेथॉन का नशा!

६: हाफ मैरेथॉन का नशा!

डिस्क्लेमर: यह लेख माला कोई भी टेक्निकल गाईड नही है| इसमें मै मेरे रनिंग के अनुभव लिख रहा हूँ| जैसे मै सीखता गया, गलती करता गया, आगे बढता गया, यह सब वैसे ही लिख रहा हूँ| इस लेखन को सिर्फ रनिंग के व्यक्तिगत तौर पर आए हुए अनुभव के तौर पर देखना चाहिए| अगर किसे टेक्निकल गायडन्स चाहिए, तो व्यक्तिगत रूप से सम्पर्क कर सकते हैं|

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सिंहगढ़ पर रनिंग करने के बाद और हौसला आया| धीरे धीरे रनिंग के तकनिकी पहलू भी सीखने लगा| इसमें सुधार के लिए बहुत अवसर है| जब हर्षद पेंडसे जी से मिला था, तब उन्होने मेरा रनिंग देख कर कहा भी था कि यह तो वॉकिंग का ही पोश्चर है| उन्होने और भी बातें बताई थी| इन सब बातों के कारण रनिंग धीरे धीरे बेहतर होने लगा| और आसानी से ११ किलोमीटर और १५ किलोमीटर दौड़ पा रहा हूँ| अब इन्तज़ार है पहली हाफ मैरेथॉन का जो मै कट ऑफ समय के भीतर पूरी करूँगा! इन दिनों एक बार जब रनिंग के लिए निकला था, तो एक बहुत अद्भुत अनुभव आया| बरसात का मौसम समाप्त होने के बाद सर्दियाँ हुई| भोर के अन्धेरे में रनिंग जब कर रहा था, तब घना कोहरा मिला| इतना घना कोहरा कि बीस कदम पीछे का कुछ भी नही दिख रहा है और आगे का भी कुछ नही दिख रहा है! बस बीस कदम की दूरी तक ही नजर जा पा रही है|

एक अर्थ में यह अनुभव अध्यात्म या ध्यान जैसा लगा! क्यों कि अध्यात्म या ध्यान में हमारी सजगता सिर्फ 'अभी और यहीं' पर रूकती है| विगत समय और भविष्य- दोनों से कोई सम्बन्ध नही होता है| सिर्फ इस क्षण की सच्चाई ही नजर में होती है| एक अर्थ में ध्यान के समय हमारा कोई आगा भी नही होता है और पीछा भी नही होता है! ध्यान तो बस वर्तमान का क्षण, वर्तमान का स्थान! घने कोहरे के बीच हाथ में मोबाईल की रोशनी में दौड़ते समय ठीक ऐसा ही लगा| पीछे देखने पर कुछ भी नही है और आगे भी कुछ भी नही है! अवाक् कर देनेवाला अविस्मरणीय अनुभव रहा!


इसके साथ यह भी धीरे धीरे पता चला कि अब रनिंग के साथ मै अधिक चीज़ें देख सकता हूँ| शुरू शुरू में तो सारा ध्यान रनिंग पर ही रहता था- फूलती साँसों पर, पैरों पर, थकान पर| लेकीन अब जैसे रनिंग का अभ्यास हो गया, ध्यान बाकी चीजों पर भी दे पा रहा हूँ| जैसे नया कार- ड्रायविंग सीखते हैं, तो गाडी चलाते समय फोन बजने पर भी तकलीफ होती है| या किसी के साथ बात भी नही करने का मन होता है| लेकीन आदि होने के बाद कार चलाने के साथ साथ गाना चालू करना, बातचीत करना, फोन उठाना भी आ जाता है| वैसे ही रनिंग के साथ भी होने लगा| धीरे धीरे साईकिल चलाना जैसे एंजॉय करता हूँ, जैसे बाकी सब चीजों का आनन्द हूँ, वैसे ही रनिंग का भी आनन्द लेने लगा| हालांकी रनिंग में अब भी एक कमी है| रनिंग करते समय अक्सर गाने सुनने का मन करता है| गाने लगाए बिना रनिंग करना कठीन लगता है| इसका उत्तर सद्गुरू ओशो के एक प्रवचन में मिला| उन्होने कहा है कि जब हम किसी‌ अन्जान जगह से जाते हैं, तो अक्सर हम खुद से बात करते हैं या सिटी बजाते हैं| क्यों कि मन में डर होता है| शायद इसीलिए रनिंग के समय गाना लगा कर दौड़ता हूँ| धीरे धीरे जैसे रनिंग से दोस्ती हो रही है, यह आसान होता जा रहा है|

कुछ रन लगातार करने के बाद २१ किलोमीटर दौड़ने की इच्छा हुई| हाफ मैरेथॉन की दूरी दौड़ने का का एक कारण यह भी है कि मै एक साईकिल यात्रा की योजना बना रहा हूँ, उसके लिए स्टैमिना अच्छा चाहिए| इसलिए लम्बी दूरी तक दौड़ने का लक्ष्य रखा है| जितना अधिक दौड़ सकूँगा, वैसे साईकिल चलाने का स्टैमिना भी बढ़ेगा| २१ किलोमीटर दौड़ने के पहले दो दिन थोड़ा विश्राम किया| स्ट्रेचिंग के सही तरीके भी सीख रहा हूँ| उसके साथ बाकी तैयारी भी कर ली| मैप में १०.५ किलोमीटर की दूरी तय कर ली, सड़क चुन ली और निकल पड़ा| सुबह अन्धेरे में मोबाईल में गाने लगाए और जहाँ आवश्यक हो, मोबाईल टॉर्च चालू कर लिया| पन्द्रह किलोमीटर तक तो बहुत बार दौड़ा हूँ| इसलिए कसौटी उसके बाद ही होगी, यह पता है|

इस रूट पर जाते समय अधिक उतराई है| दस किलोमीटर पर नदी पार करने के बाद आधा किलोमीटर पर यु- टर्न लेना है| आते समय चढाई होने से और थकान होने से अधिक समय लगेगा, यह भी तय है| अन्धेरे में ही पहले कुछ किलोमीटर पार किए| एक जगह पर कुत्ता भौंका भी! पाँच किलोमीटर के बाद थोड़ी रोशनी होने लगी| पहला ब्रेक लगभग आठ किलोमीटर पर लिया| इलेक्ट्रालयुक्त पानी और चिक्की खाई| छोटे छोटे चरण बनाए- जैसे और तीन किलोमीटर चलने के बाद आधा अन्तर पूरा होगा, आगे चार किलोमीटर के बाद ब्रेक लेना है| रनिंग में गानों का साथ बड़ा उपयोगी लगता है| दूरी पार होती जाती है| पन्द्रहवे किलोमीटर के बाद कुछ थकान होने लगी| एक लिक्विड एनर्जाल लिया| थोड़ा स्ट्रेचिंग भी किया| उससे कुछ ऊर्जा मिली| एक बात बहुत अच्छी है कि पन्द्रह किलोमीटर मैने अच्छे समय में- लगभग १ घण्टा ४५ मिनट में पूरे किए हैं| याने अगले छह किलोमीटर के लिए मेरे पास पूरा एक घण्टा है!

वापसी में जो चढाई है, वह महसूस होने लगी| धीरे धीरे रफ्तार भी कम हुई| अधिक बार रूकना भी पड़ने लगा| कुछ समय के लिए लगा भी कि शायद कट ऑफ से अधिक समय लगेगा! लेकीन जब दूसरा एनर्जाल लिया और जब उसका पूरा असर होने लगा, तो तय हो गया कि निर्धारित समय से पहले ही पहुँचूंगा| इससे अन्त के दो- तीन किलोमीटर में बड़ी राहत मिली| आसानी से आखरी चरण पूरा हुआ और २१ किलोमीटर पूरे भी हो गए! साथ ही चलने की आवश्यकता हुए बिना पूरे २१ किलोमीटर रनिंग भी कर पाया| समय देखा तो बहुत अच्छा समय आया- २ घण्टे ३३ मिनट! आज की दौड़ शुरू करने के पहले लग रहा था, २ घण्टे ४४ मिनट में भी पूरा करूंगा, तो अच्छा रहेगा! उससे तो कम समय लगा! इस तरह पहली कट ऑफ टाईम के भीतर की हाफ मैरेथॉन रही यह!



रनिंग के इन दिनों में धीरे धीरे स्पीड की बजाय 'पेस' की भाषा जान गया| घडी में जब ७ बज कर १४ मिनट होते हैं, ७.१४ तो इससे पेस की याद होती है! जब २१ किलोमीटर दौड़ सका, तो मन में ४२ किलोमीटर दौड़ने का ख्याल आया| इसलिए फुल मैरेथॉन की जानकारी लेना शुरू किया| और मन तो हुआ कि अब ४२ किलोमीटर ही दौड़ना है| क्यों कि २१ किलोमीटर तो दौड़ लिए! अब हाफ मैरेथॉन क्या दौड़ना? और सोलो २१ किलोमीटर दौड़ना हाफ मैरेथॉन इवेंट से कठिन होता है| लेकीन जब जानकारी प्राप्त हुई, तो पता चला कि ४२ किलोमीटर दौड़ने के लिए पहले २१ किलोमीटर दौड़ना पड़ेगा| एक हाफ मैरेथॉन ईवेंट भी करनी पड़ेगी| सिर्फ फुल मैरेथॉन के लिए क्वालिफाई होने के लिए...

अगला भाग: “भाग दौड़" भरी ज़िन्दगी ७: पहली और अन्तिम हाफ मैरेथॉन ईवेंट

1 comment:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 30/04/2019 की बुलेटिन, " राष्ट्रीय बीमारी का राष्ट्रीय उपचार - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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