Wednesday, October 11, 2017

योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा २: पहला दिन- चाकण से धायरी (पुणे)


योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा १: असफलता से मिली सीख


: पहला दिन- चाकण से धायरी (पुणे)

२८ सितम्बर| सुबह जल्द उठ कर निकलना है| आज पहला दिनहै, लेकीन सामान बान्धना, सब चीज़ें साथ में रखना इसकी तैयारी पहली की है| इसलिए सुबह आराम से निकला| मन बिल्कुल शान्त है| कल से कुछ भी तनाव नही है| बिजनेस एज युज्वल जैसा ही लग रहा है| पूरा उजाला होने के पहले पौने छे बजे निकला हूँ| आज का पड़ाव वैसे बहुत छोटा है| पहले कई बार यह दूरी पार भी की है| करीब सवा तीन घण्टों में पहुँचूंगा ऐसी उम्मीद है|

सुबह का सन्नाटा, हल्की सी ठण्ड और ताज़गी! और एक अन्जान यात्रा का आरम्भ! मन में अपनेआप गीत गूँजने लगा- तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो, क्या ग़म है जिसको छुपा रहे हो! उसके बाद अपने आप पूरा गाना बजता गया और मै सुनता गया| अगर कोई गाना- सिर्फ उसके बोल नही, उसका पूरा संगीत अगर याद हो, तो मन ही मन ऐसा गाना सुनने में बड़ा मज़ा आता है| इसके बाद दूसरा गाना मन में बजने लगा- तू मेरे साथ साथ आसमाँ से आगे चल, तुझे पुकारता है तेरा आनेवाला कल, नई हैं मन्जिलें, नए हैं रास्ते, नया नया सफर है तेरे वास्ते!



पहली नदी- इन्द्रायणी!





































हाल ही में की गई कुछ राईडस याद आ रही है| भीमाशंकर की यात्रा विफल होने पर भी वहाँ मेरा स्टॅमिना बढ़ा था| और पैर भी बिल्कुल नही दुखे थे| और दूसरे दिन जल्द रिकवर भी महसूस कर रहा था| शायद ऐसा हो सकता है कि रनिंग से मेरा स्टॅमिना थोड़ा बढा जरूर होगा, लेकीन कुछ दिनों तक साईकिल लगातार न चलाई हुई होने के कारण पैर उतने तैयार नही थे| इसीलिए उस राईड में तकलीफ हुईं और मै बढ़ा स्टॅमिना साईकिल चलाने में महसूस नही कर पाया होऊंगा| लेकीन उसके बाद पीछले दिनों में जो छोटी २०- ३० किलोमीटर की राईडस की, उसमें धीरे धीरे पैर खुलते गए| और दूसरी यह बात भी है कि स्टॅमिना/ फिटनेस बढ़ाना भी कोई अचानक होनेवाली बात तो नही है| वह भी घाट का रास्ता चढ़ने जैसा ही है| धीरे धीरे ऊँचे स्तर पर जाना होता है| सीधा रास्ता नही होता| जो भी हो, आज और आनेवाले दिनों में पता चल ही जाएगा|



ऊर्जा स्तर बनाए रखने के लिए यह पहले से ही सोच रखा है कि पन्द्रह बीस किलोमीटर बाद कुछ ना कुछ खाता रहूँगा और पच्चीस- तीस किलोमीटर पर बड़ा नाश्ता भी करूँगा| इसलिए पहले पन्द्रह किलोमीटर पूरे होने के बाद चिक्की खाई| पानी में भी इलेक्ट्रॉल डाल रखा है, वही पीऊँगा| पच्चीस किलोमीटर पर आधा पड़ाव है| वहाँ‌ मेरे मित्र के साथ हेवी नाश्ता किया| इसके बाद अब रास्ता हायवे से जाएगा| हायवे से जाने का एक थोड़ा टेन्शन भी है और एक लाभ भी है| टेन्शन यह कि बड़े बड़े वाहन बड़ा हायवे होने पर भी बहुत नजदीक से दौड़े जाते हैं| साईकिल के लिए कभी कभी जगह नही रहती है|‌ और लाभ यह है कि इतने तेज़ी से जानेवाले वाहन देख कर अन्जाने में मन भी और तेज़ी से चलने की कोशिश करता है|‌ अनकॉन्शस मन में कंपिटीशन जैसी बात होती है| इसलिए अक्सर मैने अतीत में देखा है कि हायवे पर रास्ता जल्दी पार होता है| खैर| अभी भी सुबह के आठ ही बजे है, इसलिए यातायात कम है| आराम से निकल पड़ा| अब भी थोड़ी थोड़ी ठण्डक है! एक जगह पर हायवे पर धुन्द भी मिली! धूप निकलने के बावजूद धुन्द मिली|









































अच्छा नाश्ता करने का लाभ हुआ और चालिस किलोमीटर के बाद भी‌ कोई थकान नही हुई| उसी‌ गति से आगे बढता गया| अब एक बहुत छोटा पाँचवे ग्रेड का घाट लगेगा| पहले जब मेरा स्टॅमिना बहुत ही अच्छा था, तब मैने उसे २-१ पर पार किया था| अब भी मै कोशिश करूँगा कि उसी गेअर पर उसे पार करूँ और देखते देखते कर भी पाया| एक- दो जगह पर थोड़ी सी दिक्कत हुई, लेकीन फिर भी आराम से ही पहुँच गया| समय रहते ९.४० को धायरी, डिएसके में पहुँच गया| बीच में पौन घण्टा रूका था, तो ४९ किलोमीटर की दूरी करीब करीब सवा तीन घण्टे में ही पार की! वाह!

लेकीन अभी आज का दिन खतम नही हुआ है| अब अच्छा विश्राम करना है और फिर मेरा रूटीन काम करना है| फ्रेश हो कर भोजन करने के बाद बहुत नीन्द आने लगी| लेकीन इसका कारण थकान नही, बल्की कल रात सोने में हुई देरी है| रात में मुश्कील से पाँच- छह घण्टे सोया था| इसलिए दोपहर में थोड़ी देर लेटना पड़ा| लेकीन उसके बाद दिन अच्छा गया| शाम को भी एक बार साईकिल चलायी और इस हिल के नीचे जा कर वापस आया| भीतर से बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूँ| दिन कुल मिला कर अच्छा ही गया, लेकीन रात में नीन्द ठीक न होने से नीन्द की‌ कमी महसूस हो रही है| इसलिए रात को बहुत जल्द सोना है| एक एक मिनट की नीन्द किमती‌ है! अब कल यहाँ से लगभग पचास किलोमीटर दूर होनेवाले पुणे जिले के भोर गाँव जाना है| देखते हैं| पहला दिन तो अपेक्षाकृत रहा| और भाई के घर में ही आने से एक तरह का कम्फर्ट झोन भी है| असली यात्रा कल से शुरू होगी|








































आज की यात्रा- ४९ + = ५१ किमी| आज चढाई कम थी|






















































अगला भाग- योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ३: दूसरा दिन- धायरी (पुणे) से भोर

3 comments:

  1. साइकिल की सवारी, सबसे न्यारी।
    न प्रदूषण, न खर्चा।

    ReplyDelete
  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (13-10-2017) को
    "कागज़ की नाव" (चर्चा अंक 2756)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  3. टिप्पणियों के लिए धन्यवाद!!

    ReplyDelete

आपने ब्लॉग पढा, इसके लिए बहुत धन्यवाद! अब इसे अपने तक ही सीमित मत रखिए! आपकी टिप्पणि मेरे लिए महत्त्वपूर्ण है!