Friday, February 26, 2016

दोस्ती साईकिल से १५: औंढा नागनाथ के साथ चौथा शतक


दोस्ती साईकिल से १: पहला अर्धशतक
दोस्ती साईकिल से २: पहला शतक
दोस्ती साईकिल से ३: नदी के साथ साईकिल सफर
दोस्ती साईकिल से ४: दूरियाँ नज़दिकीयाँ बन गईं. . . 
दोस्ती साईकिल से ५: सिंहगढ़ राउंड १. . . 
दोस्ती साईकिल से ६: ऊँचे नीचे रास्ते और मन्ज़िल तेरी दूर. . . 
दोस्ती साईकिल से ७: शहर में साईकिलिंग. . . 
दोस्ती साईकिल से ८: सिंहगढ़ राउंड २! 
दोस्ती साईकिल से ९: दूसरा शतक. . . 
दोस्ती साईकिल से १०: एक चमत्कारिक राईड- नर्वस नाइंटी!  
दोस्ती साईकिल से ११: नई सड़कों पर साईकिल यात्रा!  
दोस्ती साईकिल से १२: तिसरा शतक- जीएमआरटी राईड 
दोस्ती साईकिल से १३: ग्रामीण सड़कों पर साईकिल राईड
दोस्ती साईकिल से: १४ "नई साईकिल" से नई शुरुआत


औंढा नागनाथ के साथ चौथा शतक

अगस्त २०१४ के पहले हप्ते में नई साईकिल की अच्छी राईडस शुरू की| पहले एक ३८ किलोमीटर की राईड थोड़े कम स्तर के रोड पर की| वहाँ पहले घण्टे में सोलह किलोमीटर चला पाया और उसके बाद रफ्तार एकदम धिमी हो गई| जरूर अभी तक इस साईकिल से शरीर अभ्यस्त नही हुआ है| अगली राईड फिर झिरो फाटा की तरफ की| इस बार तो पहले से अधिक समय लगा| पहले घण्टे की रफ्तार और दूसरे घण्टे की रफ्तार के बीच बड़ा अन्तर रहा|

अब एक बड़ी राईड करने का मन है| इस साईकिल में बड़ी राईड सहज तो नही होगी|‌ इसलिए मात्र सौ किलोमीटर की योजना बनायी- घर से औंढा नागनाथ इस ज्योतिर्लिंग तक| १०२ किलोमीटर होंगे| नई साईकिल से अभ्यास भी हो जाएगा और इस साईकिल चलाने के बारे में समझ भी बढ़ेगी| १२ अगस्त को सुबह छह बजे घर से निकला| बारिश के दिन तो हैं, पर बारिश आँखमिचौली खेल रही है| सुबह के ताज़गीभरे माहौल में साईकिलिंग करने का बड़ा मज़ा आ रहा है| आज साईकिल तिसरे गेअर पर नही चलाऊँगा| ज्यादा तर २-५, २-६ काँबीनेशन्स ही इस्तेमाल करूँगा| परभणी के कुछ साईकिलिस्ट भी साथ हैं|करीब एक घण्टे में झिरो फाटा क्रॉस कर लिया| यहाँ से आगे रास्त भी थोड़ा कम स्तर का है और अब सोलो राईड होगी|





नॅशनल हायवे छोडने के बाद सड़क और विरान हो गई| सुनसान सड़क और साईकिल की गति से लगनेवाली तेज हवा की आवाज! साईकिल राईड में सबसे मजा दूसरे घण्टे से चौथे घण्टे तकआता है| शरीर और मन सबसे फ्रेश होते हैं| बिना किसी कठिनाई के आगे बढ़ता गया| सड़क बीच बीच में खराब है, पर साईकिल आसानी से निकल जाती है| बीच बीच में ज्यादा तर छोटे गाँव होने के कारण नाश्ते की थोड़ी सी दिक्कत है| आज का लक्ष्य सिर्फ ५१ किलोमीटर दूर औंढा तक साईकिल चलाना है, जिससे लक्ष्य कभी भी दूर नही लगा| जल्द ही औंढा के पास के छोटे हिल दिखने लगे| बाईक पर कई बार यहाँ से गुजरा हूँ, तो रास्ता बिल्कुल परिचित है| सुबह के नौ बजने तक औंढा गाँव में पहूँच गया| मन्दीर पहले कई बार देखा हुआ होने के कारण मन्दीर नही जाऊँगा| उसके पास थोड़ी हिल्स हैं और एक झील है, वह देखूँगा| हालाकि अब अच्छी खासी थकान भी लग रही है| यहाँ भी ठीक नाश्ता नही मिला|





झील का रास्ता ढुँढते समय भटक गया| एक छोटे से तालाब से ही सन्तुष्ट होना पड़ा| अब तेज़ी से धूप बढ़ रही है| जल्द ही मुख्य सड़क पर आ कर वापसी की यात्रा शुरू की| अब बार बार विश्राम करने का मन हो रहा है| छोटे छोटे टारगेटस मन में ले कर आगे बढ़ रहा हूँ| अगला ब्रेक आधे घण्टे के बाद, पाँच किलोमीटर बाद दो मिनट रूकूँगा ऐसे करते हुए आगे निकला|


बारिश के सीजन में बादल गायब!






पहले ५१ किलोमीटर के लिए ३.१५ घण्टे लगे थे, वापसी के ५१ किलोमीटर के लिए लगभग साढ़ेपाँच घण्टे लगे| नौ घण्टों में १०२ किलोमीटर पूरे हो गए! शतक पूरा होने का मिठा एहसास! इतना समय अपेक्षाकृत ही है| अब धीरे धीरे शरीर इस साईकिल से अभ्यस्त हो रहा है| इसके बाद इतनी दिक्कत नही होनी चाहिए|

अगला भाग १६: पाँचवा शतक- लोअर दुधना डैम

2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (27-02-2016) को "नमस्कार का चमत्कार" (चर्चा अंक-2265) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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