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Tuesday, June 19, 2018

एटलस साईकिल पर योग- यात्रा भाग १०: मेहकर- मंठा

१०: मेहकर- मंठा
 

आज यह लिखते समय बरसात शुरू हो गई है, लेकीन योग साईकिल यात्रा का नौवा दिन बहुत गर्मी का था- १९ मई की सुबह| आज लगभग ७० किलोमीटर साईकिल चलानी है| और आज की सड़क भी निम्न गुणवत्ता वाली है| इसकी एक झलक कल देखी है| इसलिए ये ७० किलोमीटर बेहद कठीन जाएंगे| सुबह मेहकर में मन्दीर के पास चलनेवाले एक महिला योग वर्ग की साधिकाओं से मिल कर आगे बढ़ा| आज की सड़क पर विश्व प्रसिद्ध लोणार सरोवर आएगा जो एक उल्का के गिरने से बना है| जल्द ही सुलतानपूर से आगे निकला| यहाँ से लोणार सिर्फ बारह किलोमीटर है, लेकीन अब सड़क बहुत बिगड़ने लगी| बिल्कुल उखडी हुई टूटी फूटी‌ सड़क| नया चार या छह लेन का हायवे बनाने के लिए पूरी सड़क ही उखाड़ दी गई है| बीच बीच में थोड़ी सी सड़क; बाकी सिर्फ पत्थर और मिट्टी!

लोणार के कुछ पहले सड़क के पास एक खेत में एक लोमड़ी से मिलना हुआ| पहले तो कुत्ता ही लगा, लेकीन फिर काला मुंह और गुच्छे जैसी पूँछ! जरूर यह पानी की तलाश में खेत- गाँवों में आया होगा| उसने भी मुझे देखा, लेकीन उसे इन्सान देखनी की आदत होगी, इसलिए वह आगे बढ गया| यह मुख्य  शहरों को जोड़नेवाली सड़क न होने के कारण यातायात कम ही है| धीरे धीरे लोणार पास आता गया| लेकीन उसके साथ यह भी तय हुआ कि आज यात्रा बिल्कुल कछुए की गति से होनेवाली है| लोणार गाँव के बाद नाश्ता किया और आगे सरोवर की तरफ बढ़ा|‌ सरोवर सड़क के पास ही है| बचपन में एक बार यह सरोवर देखा था| आज की यात्रा बहुत लम्बी होने के कारण सड़क से थोड़ा हट कर उपर से ही सरोवर देखा और आगे बढ़ा| यह अभयारण्य होने के कारण मोर की आवाज आ रही है|


लोणार सरोवर!!




Tuesday, January 2, 2018

जनवरी में लदाख़ में साईकिलिंग की योजना

जनवरी में लदाख़ में साईकिलिंग

जनवरी में जम्मू- कश्मीर राज्य के लदाख़ क्षेत्र में तपमान -२० से -२५ तक नीचे जाता है| इस क्षेत्र का मुख्य नगर लेह सिर्फ हवाई जहाज से दुनिया से जुड़ा रहता है| ऐसे स्थिति में भी कुछ लोग लदाख़ में जाते है और सर्दियों में भी वहाँ घूमते हैं| पहले दो बार लेह देखा है, लेकीन वह गर्मियों के महने में देखा है| इसलिए एक बार वहाँ सर्दियों में जाकर देखना है| ऐसे प्रतिकूल मौसम में जितनी हो सके, उतनी साईकिल चलानी है| लेह के आसपास की सड़के खुली रहती है, इसलिए लेह से कारू, निम्मू और हो सके तो खार्दुंगला भी जाया जा सकता है| खार्दुंगला सड़क मिलिटरी के लिए बहुत अहम है, इसलिए उसे हर स्थिति में चालू रखा जाता है| ५३०० मीटर ऊँचाई का खार्दुंगला दर्रा सर्दियों में भी चालू रहता है| हालाकी बीच बीच में भारी बर्फबारी के चलते कभी कभी बन्द हो सकता है|

ऐसे समय में लदाख़ जाने के कुछ उद्देश्य भी है-
१. सर्दियों के विषम मौसम में वहाँ के लोग किस प्रकार रहते हैं और वहाँ जवान और सेना के अन्य लोग किस प्रकार काम करते हैं, इसका अनुभव लेना|
२. वहाँ के लोग और जवानों के साथ २६ जनवरी के कार्यक्रम में अनौपचारिक रूप से संवाद करना|
३. शरीर की क्षमताओं को चुनौति देना और उसकी क्षमता की परख करना|
४. साईकिल चलाना हमेशा कुछ सन्देश देता है- पर्यावरण के प्रति संवेदना और फिटनेस के बारे में जागरूकता|



फोटो स्रोत: http://travel.paintedstork.com/blog/2013/02/leh-ladakh-winter.html

तैयारी

इस यात्रा की इच्छा हाल ही में अच्छी साईकिलिंग करने के बाद हुई| जो घाट और चढाईयाँ कभी कठिन लगती थी, वहाँ जब आसानी साईकिल पर जा सका, तब लगने लगा कि अब इससे भी ऊँचे पर्वत पर भी साईकिल चला सकता हूँ- अर्थात् लदाख़ में साईकिल चला सकूँगा| तैयारी कुछ इस तरह से की है-

- नियमित रूप से साईकिल चलाना; चढाई की सड़कों पर साईकिल बार बार चलाना|
- साईकिल का स्टैमिना बढ़ाने के लिए रनिंग शुरू की जिसका पीछली साईकिल यात्रा में बहुत लाभ मिला| धीरे धीरे रनिंग बढाता गया और २१ किलोमीटर तक दौड सका| इसके बाद ग्रेड १ की चढाई पर भी रनिंग कर सका| इस तरह साईकिल चलाने के साथ रनिंग करना भी तैयारी का हिस्सा रहा|
- योगासन और प्राणायाम

ठण्ड के लिए तैयारी अभी जारी है| कम से कम कपडों के तीन- चार लेअर लेह में पहनने पड़ेंगे| थर्मल और इनर के साथ तीन जुराब- सड़क पर चलते समय गम बूट और नाक छोड कर पूरे शरीर को ढाकने का इन्तजाम करना होगा| और ठण्ड की वास्तविक तैयारी मानसिक होगी| ठण्ड का इतना बड़ा तो नही; पर छोटा- मोटा अनुभव है जब दिसम्बर में बद्रीनाथ के पास गया था| वहाँ लेकीन ऊँचाई बहुत कम थी; फिर भी शाम को साढ़ेपाँच बजे जैसे रात होती थी| और एक तरह का आलस आ जाता था|

इस बार भी शायद यही चुनौति सबसे बड़ी है| इसके साथ लेह में सर्दियों में कारोबार बहुत कम चालू रहता है| इसलिए सुविधाओं की भी दिक्कते हैं| साईकिल उपलब्ध होने से दिक्कते हैं| दिन देर से शुरू होता है और जल्द डूबता है, साईकिल चलाने के लिए मुश्कील से आठ- नौ घण्टे होंगे| इन सबकी तैयारी कर रहा हूँ| लेह में पीछली बार जहाँ ठहरा था, वहाँ चोगलमसर क्षेत्र के मित्र के पास रूकूँगा|

साईकिलिंग की योजना
पुणे- दिल्ली- लेह हवाई जहाज से २४ जनवरी की सुबह लेह आगमन|
२६ जनवरी तक पूरी तरह विश्राम जिससे शरीर उस मौसम से तालमेल बिठा सके|
२६ जनवरी के कार्यक्रम में सहभाग लेना और लेह घूमना- साईकिल का जुगाड़|
२७ जनवरी- लेह शहर में १० किलोमीटर साईकिल चलाना|
२८ जनवरी- लेह- सिन्धू घाट परिसर में १० किलोमीटर साईकिल चलाना|
२९ जनवरी- लेह से निम्मू- चिलिंग जाना (४५ किलोमीटर)| चिलिंग में ठहरना
३० जनवरी-  चिलिंग- निम्मू- लेह वापसी (४५ किलोमीटर)|
३१ जनवरी- लेह से खर्दुंगला रोड़ पर साउथ पुल्लू तक जाना|
१ फरवरी- खार्दुंगला जाने का प्रयास| खार्दुंगला जाना सड़क खुली होने पर निर्भर करेगा|

२- ३ फरवरी अतिरिक्त दिन रखे हैं| और ४ फरवरी को लेह- दिल्ली- पुणे हवाई जहाज से वापसी|

ऐसी योजना तो बनाई है, लेकीन इसमें बहुत से if and buts हैं| शरीर इतने ठण्ड को कितना सह पाता है, ऐसी स्थिति में साईकिल कितनी चला सकता हूँ, यह कुछ भी कह नही सकता हूँ| वहाँ जाने पर ही पता चलेगा|  शायद यह भी हो सकता है कि साईकिल ना मिले या बहुत महंगे रेट से मिले, क्यों कि सभी दुकान बन्द होते हैं|| साईकिल न मिलने की स्थिति में लेह के आसपास पैदल घूमना हो सकता है| या अगर त्सोमोरिरी गाड़ी जा रही हो, तो वहाँ भी जा सकता हूँ| पर सड़क कई दिनों के लिए कभी भी बन्द हो सकती है| इसलिए सब कुछ उस समय की स्थिति पर निर्भर करेगा|

लेकीन जो भी हो, एक बहुत अविस्मरणीय अनुभव जरूर आनेवाला है. . . . 

Monday, October 9, 2017

योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा १: असफलता से मिली सीख

नमस्ते! साईकिलिंग दोबारा शुरू कर चार साल हो चुके हैं| साईकिल ने इतना कुछ सीखाया, इतनी नई दृष्टि दी! इस पूरी यात्रा में साईकिल के साथ कई दिग्गज साईकिलिस्ट, फिटनेस के खिलाडी और प्रेरणा देनेवाले लोग मिलते रहे हैं| इस विवरण को शुरू करने के पहले उन सबको एक बार नमन करता हूँ|

मेरी पीछली अन्तिम साईकिल यात्रा या बड़ी राईड २०१५ के दिसम्बर में हुई थी|‌ तब दूसरे ही दिन मै पूरी तरह थक गया था| और जैसे लगा कि साईकिल चलानी छोड ही देनी चाहिए| हर साईकिलिस्ट के अनुभव में यह जरूर आता है| लेकीन खैर, साईकिल नही छूटी| कुछ दिनों के बाद ही लम्बी यात्राओं के सपने दिन में आने लगे| २०१५ में ही लदाख़ की आंशिक यात्रा की थी, तो लगा कि २०१६ में भी एक बार ट्राय करता हूँ| पहले के अनुभवों से सचेत हो कर और बेहतर तैयारी शुरू की| इस बार स्टैमिना और फिटनेस को और बढ़ाने के लिए रनिंग शुरू किया| रनिंग शुरू करना कठिन रहा| शारीरिक रूप से नही, बल्की मानसिक रूप से| कई दशक पहले जब स्कूल में कभी दौड़ा करता था तो सब चिढाते थे कैसा दौड़ता है यह! वह बात अब भी मन में थी| इसलिए लगा की सुबह के अन्धेरे में ही दौड़ूंगा! लेकीन सुबह के अन्धेरे में दौड़ने के लिए बहुत जल्द उठना पड़ता है! वो तो अक्सर नही ही होता था| लेकीन फिर भी धीरे धीरे दौड़ना शुरू किया| पहले दो दिन तो पाँच किलोमीटर चला और उसमें सिर्फ सौ सौ मीटर दौड़ता था, हाँफता था और फिर कुछ समय खड़े रह कर दौड़ता था| उसे चलना और थोड़ासा जॉगिंग ही कहना चाहिए| ऐसे २-३ दिन जाने के बाद धीरे धीरे पूरे पाँच किलोमीटर जॉगिंग कर सका| उसमें भी बहुत बार रूकना पड़ता था| लेकीन धीरे धीरे कुछ ही हफ्तों में रफ्तार भी बढी और आसानी भी होने लगी| ऐसे करते करते एक ही बार में दस किलोमीटर की भी दौड़ लगा सका| चलो, साईकिलिंग के साथ यह भी बहुत सीखना हुआ, स्वास्थ्य और फिटनेस की दिशा में एक कदम और आगे जाने लगा|






लेकीन २०१६ में लदाख़ की साईकिल यात्रा नही हो पायी| तैयारी बहुत की, बहुत योजना बनाई| लेकीन फिर भी साईकिलिंग का उतना अभ्यास नही कर पाया| और एक बड़ी राईड ने घूटने (सचमूच) टेकने के लिए मजबूर कर दिया| तब तय किया की लदाख़ नही जाऊँगा| लेकीन फिर भी २०१६ के मान्सून में भी डे- ड्रिमिंग करता था कि इधर जाऊँगा| ये ये देखूँगा| लेकीन कहीं भी नही जा सका| बस कुछ प्रैक्टीस राईडस ही हुईं और यदा कदा दौड़ना हुआ| एक तरह से मन में बार बार लग रहा था कि लम्बी साईकिल यात्रा करना मेरे बस में नही है! खैर|

भला हो उन लोगों का जो अक्सर दूसरों को प्रेरणा देते रहते हैं| कई साईकिलिस्ट के विवरण पढ़ता था| एक बार तो लगा भी कि अब क्यों ये सब पढ़ें! जाने दो! लेकीन नही| साईकिल से रिश्ता टूटा नही और थोड़ी साईकिलिंग शुरू रही| इसको गति २०१७ के मई में मिली जब तय किया की २०१७ के बरसाती सीज़न में कही ना कही तो साईकिल यात्रा करनी ही है! मई से ही छोटी प्रैक्टीस राईडस शुरू की| बीच बीच में थोड़ा दौड़ता भी था| क्यों कि यह तो साफ हुआ था कि अगर स्टैमिना/ फिटनेस बढ़ाना है, तो उसका रास्ता रनिंग से जाता है| क्यों कि साईकिल चलाने की तुलना में रनिंग ज्यादा हेवी एक्टिविटी है; ज्यादा थकानेवाला व्यायाम है| इसलिए अगर मै कुछ दूरी तक रनिंग कर पाता हूँ- जैसे १० या १५ किलोमीटर तो उससे मेरा स्टैमिना बढ़ेगा और साईकिल चलाने में आसानी होगी| जल्द नही थकूँगा| इस सोच के साथ दौड़ना भी चालू था| मन बना लिया था|



Thursday, March 17, 2016

दोस्ती साईकिल से २१: चढाई पर साईकिल चलाने का आनन्द


दोस्ती साईकिल से १: पहला अर्धशतक
दोस्ती साईकिल से २: पहला शतक
दोस्ती साईकिल से ३: नदी के साथ साईकिल सफर
दोस्ती साईकिल से ४: दूरियाँ नज़दिकीयाँ बन गईं. . . 
दोस्ती साईकिल से ५: सिंहगढ़ राउंड १. . . 
दोस्ती साईकिल से ६: ऊँचे नीचे रास्ते और मन्ज़िल तेरी दूर. . . 
दोस्ती साईकिल से ७: शहर में साईकिलिंग. . . 
दोस्ती साईकिल से ८: सिंहगढ़ राउंड २! 
दोस्ती साईकिल से ९: दूसरा शतक. . . 
दोस्ती साईकिल से १०: एक चमत्कारिक राईड- नर्वस नाइंटी!  
दोस्ती साईकिल से ११: नई सड़कों पर साईकिल यात्रा!  
दोस्ती साईकिल से १२: तिसरा शतक- जीएमआरटी राईड 
दोस्ती साईकिल से १३: ग्रामीण सड़कों पर साईकिल राईड
दोस्ती साईकिल से: १४ "नई साईकिल" से नई शुरुआत
दोस्ती साईकिल से: १५: औंढा नागनाथ के साथ चौथा शतक
दोस्ती साईकिल से: १६: पाँचवा शतक- लोअर दुधना डैम
दोस्ती साईकिल से: १७: एक ड्रीम माउंटेन राईड- साक्री से नन्दुरबार
दोस्ती साईकिल से: १८: तोरणमाळ हिल स्टेशन पर साईकिल ट्रेक!
दोस्ती साईकिल से: १९: हौसला बढ़ानेवाली राईडस!
दोस्ती साईकिल से: २०: इंज्युरी के बाद की राईडस


चढाई पर साईकिल चलाने का आनन्द

एक छोटी सी लगभग सवा किलोमीटर की चढाई-

१. साईकिल पर जाना नामुमकिन जैसा है| मुश्किल से एक चौथाई दूरी साईकिल पर चलायी और अब पैदल जाने की नौबत आयी. . .
२. साईकिल पर जा पा रहा हूँ, लेकिन तीन बड़े विश्राम के लिए रूकना पड़ रहा है. . .
३. बिना रूके पूरी चढाई पार करता तो हूँ, लेकिन बड़ा थक जाता हूँ. . .
४. लगातार चार बार यही चढाई अब सहजता से पार कर सकता हूँ. . .
५. अब यही चढाई सबसे लोअर (१-१) गेअर के बजाय २-१ गेअर पर भी लगातार कई बार पार कर सकता हूँ. . .
६. अब यह चढाई चढते समय २-१ गेअर में मुंह बन्द रख कर सामान्य श्वसन में भी‌ साईकिल चला सकता हूँ. . .

. . .२०१५ वर्ष की शुरुआत छोटी राईडस के साथ हुई| साईकिल चलाना जारी रहा| देखा जाए तो छोटी राईडस में मज़ा तो आता हैं, लेकिन हमारा मन सन्तुष्ट नही होता है| मन को चाहिए कुछ बड़ा- भव्य! रह रह कर २०१५ में लदाख़ में साईकिल चलाने की इच्छा हो रही है| बार बार वही सपना देख रहा हूँ| इस सपने ने इतना बुरी तरह पकड़ लिया जिससे धीरे धीरे उस दिशा में कदम उठने लगे| लदाख़ में साईकिल चलानी हो तो सबसे पहली बात चढाई पर साईकिल चलाना आना चाहिए| बिल्कुल प्राथमिक पात्रता| इसलिए अब चढाई पर साईकिल चलाने का अभ्यास करना चाहता हूँ और वैसा मौका भी आया|





Tuesday, March 15, 2016

दोस्ती साईकिल से २०: इंज्युरी के बाद की राईडस

दोस्ती साईकिल से १: पहला अर्धशतक
दोस्ती साईकिल से २: पहला शतक
दोस्ती साईकिल से ३: नदी के साथ साईकिल सफर
दोस्ती साईकिल से ४: दूरियाँ नज़दिकीयाँ बन गईं. . . 
दोस्ती साईकिल से ५: सिंहगढ़ राउंड १. . . 
दोस्ती साईकिल से ६: ऊँचे नीचे रास्ते और मन्ज़िल तेरी दूर. . . 
दोस्ती साईकिल से ७: शहर में साईकिलिंग. . . 
दोस्ती साईकिल से ८: सिंहगढ़ राउंड २! 
दोस्ती साईकिल से ९: दूसरा शतक. . . 
दोस्ती साईकिल से १०: एक चमत्कारिक राईड- नर्वस नाइंटी!  
दोस्ती साईकिल से ११: नई सड़कों पर साईकिल यात्रा!  
दोस्ती साईकिल से १२: तिसरा शतक- जीएमआरटी राईड 
दोस्ती साईकिल से १३: ग्रामीण सड़कों पर साईकिल राईड
दोस्ती साईकिल से: १४ "नई साईकिल" से नई शुरुआत
दोस्ती साईकिल से: १५: औंढा नागनाथ के साथ चौथा शतक
दोस्ती साईकिल से: १६: पाँचवा शतक- लोअर दुधना डैम
दोस्ती साईकिल से: १७: एक ड्रीम माउंटेन राईड- साक्री से नन्दुरबार
दोस्ती साईकिल से: १८: तोरणमाळ हिल स्टेशन पर साईकिल ट्रेक!
दोस्ती साईकिल से: १९: हौसला बढ़ानेवाली राईडस!



इंज्युरी के बाद की राईडस

सितम्बर २०१४ में काफी साईकिल चलाने के बाद कुछ दिन गैप आयी| जब भी‌ ऐसा होता है, तो फिर से नयी शुरुआत करनी होती है| धीमे धीमे लय प्राप्त करनी होती है| अक्तूबर में फिर राईडस शुरू की| छोटी राईडस का मज़ा लिया| परभणी के पास की सड़कों पर साईकिल चलाने का मज़ा लिया| अब फिर थोड़ी दूर की राईड करने के लिए निकला| अब ये रास्ते बिल्कुल पक्के पता हो गए हैं| कौनसी सड़क पर कितनी दूर गड़्ढा है, कहाँ हल्की चढाई है, यह सब पक्का याद हुआ है| परभणी से तीस किलोमीटर तक की राईडस तो लोकल राईड हो गई हैं| यह फर्क होता है विश्वास का|

३० अक्तूबर की सुबह निकला| कुछ दिनों तक गैप होने के बावजूद अच्छी गति मिली| इस राईड में कुल ६० किलोमीटर करने का लक्ष्य है| परभणी से मानवत रोड़ नाम के गाँव तक जा रहा हूँ| वहाँ एक स्थान पर मेरे पसंदीदा पोहे मिलते हैं| पहले एक घण्टे में करीब बीस किलोमीटर दूरी पार कर ली| अधिक रूका भी नही| अगले घण्टे बाद दाए पैर के घुटने में थोड़ा दर्द होने लगा| पैर सीधा किया; पैर को थोड़ा विश्राम दिया, फिर भी कुछ फर्क नही हुआ| पोहे खाने के लिए रूका तब पैर को थोड़ा आराम मिल गया| लेकिन जैसे ही वापसी की यात्रा शुरू की, फिर दर्द शुरू हुआ और धीरे धीरे बढ़ने लगा| पैर को अलग अलग कोण से पेडल पर रख कर चलाने की कोशिश की| लेकिन दर्द बढ़ता ही जा रहा है| हालाकि साईकिल चला पा रहा हूँ| परभणी पास आता गया| इसलिए लिफ्ट लेने का विचार नही किया| बाद में साईकिल से उतरने में और फिर बैठने में भी तकलीफ होने लगी| परभणी में पहुँचते पहुँचते ऐसी स्थिति आयी कि आखरी दो किलोमीटर- बस स्टैंड से घर तक- आटो से जाना पड़ा| बड़ी कठिन स्थिति बनी| दाए घुटने को हिला भी नही पा रहा हूँ| बेतहाशा दर्द हो रहा है| अब क्या करें?






Saturday, March 12, 2016

दोस्ती साईकिल से १९: हौसला बढानेवाली राईडस

दोस्ती साईकिल से १: पहला अर्धशतक
दोस्ती साईकिल से २: पहला शतक
दोस्ती साईकिल से ३: नदी के साथ साईकिल सफर
दोस्ती साईकिल से ४: दूरियाँ नज़दिकीयाँ बन गईं. . . 
दोस्ती साईकिल से ५: सिंहगढ़ राउंड १. . . 
दोस्ती साईकिल से ६: ऊँचे नीचे रास्ते और मन्ज़िल तेरी दूर. . . 
दोस्ती साईकिल से ७: शहर में साईकिलिंग. . . 
दोस्ती साईकिल से ८: सिंहगढ़ राउंड २! 
दोस्ती साईकिल से ९: दूसरा शतक. . . 
दोस्ती साईकिल से १०: एक चमत्कारिक राईड- नर्वस नाइंटी!  
दोस्ती साईकिल से ११: नई सड़कों पर साईकिल यात्रा!  
दोस्ती साईकिल से १२: तिसरा शतक- जीएमआरटी राईड 
दोस्ती साईकिल से १३: ग्रामीण सड़कों पर साईकिल राईड
दोस्ती साईकिल से: १४ "नई साईकिल" से नई शुरुआत
दोस्ती साईकिल से: १५: औंढा नागनाथ के साथ चौथा शतक
दोस्ती साईकिल से: १६: पाँचवा शतक- लोअर दुधना डैम
दोस्ती साईकिल से: १७: एक ड्रीम माउंटेन राईड- साक्री से नन्दुरबार
दोस्ती साईकिल से: १८: तोरणमाळ हिल स्टेशन पर साईकिल ट्रेक!


हौसला बढानेवाली राईडस

तोरणमाळ ट्रेक करने के बाद हौसला बहुत बढ़ गया| इसके बाद लगातार राईडस शुरू हुई| सितम्बर २०१४ में कई यादगार राईडस हुई| कुछ अर्धशतक और कुछ छोटी राईडस लगातार जारी रही| अब ऐसी छोटी रेग्युलर राईडस का महत्त्व पता चला है| जितनी नियमित राईडस करते हैं, उतना शरीर अभ्यस्त होता जाता है| विशेष रूप से एक छोटी राईड ऐसी हुई जब तेज़ बरसात में साईकिल चलायी| राईड छोटी ही है, मुश्किल से चालिस किलोमीटर होगी| वापस आते समय आखरी बारह किलोमीटर में बहुत तेज बरसात आयी| एकदम विजिबिलिटी कम हो गई और सड़क पर धुन्द फैल गई| इस वजह से शाम होते होते अचानक जैसे रात हो गई| हायवे पर रात में साईकिल चलाना बहुत कठिन होता है| लेकिन साईकिल चलाता गया और थोड़ी ही देर बाद शहर पहूँचा| उस समय का मजा और ही है! अन्धेरी सड़क, झमाझम बरसात और साईकिल!







Wednesday, March 9, 2016

दोस्ती साईकिल से १८: तोरणमाळ हिलस्टेशन पर साईकिल ट्रेक!


दोस्ती साईकिल से १: पहला अर्धशतक
दोस्ती साईकिल से २: पहला शतक
दोस्ती साईकिल से ३: नदी के साथ साईकिल सफर
दोस्ती साईकिल से ४: दूरियाँ नज़दिकीयाँ बन गईं. . . 
दोस्ती साईकिल से ५: सिंहगढ़ राउंड १. . . 
दोस्ती साईकिल से ६: ऊँचे नीचे रास्ते और मन्ज़िल तेरी दूर. . . 
दोस्ती साईकिल से ७: शहर में साईकिलिंग. . . 
दोस्ती साईकिल से ८: सिंहगढ़ राउंड २! 
दोस्ती साईकिल से ९: दूसरा शतक. . . 
दोस्ती साईकिल से १०: एक चमत्कारिक राईड- नर्वस नाइंटी!  
दोस्ती साईकिल से ११: नई सड़कों पर साईकिल यात्रा!  
दोस्ती साईकिल से १२: तिसरा शतक- जीएमआरटी राईड 
दोस्ती साईकिल से १३: ग्रामीण सड़कों पर साईकिल राईड
दोस्ती साईकिल से: १४ "नई साईकिल" से नई शुरुआत
दोस्ती साईकिल से: १५: औंढा नागनाथ के साथ चौथा शतक
दोस्ती साईकिल से: १६: पाँचवा शतक- लोअर दुधना डैम
दोस्ती साईकिल से: १७: एक ड्रीम माउंटेन राईड- साक्री से नन्दुरबार


तोरणमाळ हिलस्टेशन पर साईकिल ट्रेक!


सातपुडा के पास साईकिल चलाने की बहुत इच्छा है| जल्द ही तोरणमाळ ट्रेक करना है| इसे ले कर बहुत उत्सुकता मन में होगा| यह मेरा आज तक का सबसे बड़ा माउंटेन ट्रेक होगा| पहले दो बार सिंहगढ़ किया है, पर यह उससे भी बड़ा होगा| ५० किलोमीटर तक चढाई और ७-८ किलोमीटर का बड़ा घाट| मज़ा आएगा और एक तरह से मै कहाँ खड़ा हूँ, यह भी पता चलेगा| तोरणमाळ जाने के पहले नंदुरबार के पास और एक छोटी राईड की| यहाँ से गुजरात बार्डर पास ही है, इसलिए गुजरात जा के आया साईकिल पर! जहाँ मै ठहरा हूँ, वहाँ से तोरणमाळ हिल स्टेशन करीब ७६ किलोमीटर दूरी पर है| इसलिए सीधा नही जाऊँगा| पहले इस हिल स्टेशन के बेस तक पहुँचूँगा, वहाँ एक हाल्ट करूँगा और अगले दिन तोरणमाळ जाऊँगा| यह निर्णय बाद में बड़ा सही साबित हुआ|

२४ अगस्त को प्रोजेक्ट का काम पूरा होने के बाद साईकिल ले कर निकला| यहाँ से तीस किलोमीटर दूर शहादा नाम की जगह है जहाँ मै लॉज पर रूकूँगा| यह राईड अच्छी रही| मात्र डेढ घण्टे में शहादा पहुँच गया| रास्ते में तापी नदी क्रास की| पहली बार किसी राईड के लिए होटल में हाल्ट करूँगा| लैपटॉप और सारा सामान भी साईकिल पर साथ ले गया| शाम होते होते लॉज मिल गया| अब अच्छे से विश्राम करना है ताकि सुबह जब निकलूँ, तब शरीर बिल्कुल ताज़ा हो| लेकिन अच्छा विश्राम कर पाना भी एक कुशलता है और यह इतनी सरल नही होती है| इसलिए देर रात तक अच्छी नीन्द नही लगी| उपर से नई जगह- नया गाँव| और सुबह जल्द उठने का तनाव| इसलिए नीन्द बेहद कम हुई| सुबह ५ बजे उठा| एक दुविधा यह है कि क्या सामान यहीं छोड जाऊँ या साथ ले जाऊँ? सामान छोडने में दिक्कत यह है कि लॉज पर इतना सेफ नही रहेगा| और अगर ले जाता हूँ तो घाट चढते समय दिक्कतें बढेगी| क्यों कि लैपटाप और सब सामान का वजन तो सात- आठ किलो होगाही| बड़ी दुविधा रही| लेकिन बाद में सुरक्षित विकल्प चुना और सामान साथ ही लिया और साढ़ेपाँच बजे बाहर निकला| यह भी निर्णय बाद में सही साबित हुआ| सुबह के साढ़ेपाँच और एक अन्जान राह पर राईड का आग़ाज़!








Thursday, March 3, 2016

दोस्ती साईकिल से १७: एक ड्रिम माउंटेन राईड- साक्री से नन्दुरबार

दोस्ती साईकिल से १: पहला अर्धशतक
दोस्ती साईकिल से २: पहला शतक
दोस्ती साईकिल से ३: नदी के साथ साईकिल सफर
दोस्ती साईकिल से ४: दूरियाँ नज़दिकीयाँ बन गईं. . . 
दोस्ती साईकिल से ५: सिंहगढ़ राउंड १. . . 
दोस्ती साईकिल से ६: ऊँचे नीचे रास्ते और मन्ज़िल तेरी दूर. . . 
दोस्ती साईकिल से ७: शहर में साईकिलिंग. . . 
दोस्ती साईकिल से ८: सिंहगढ़ राउंड २! 
दोस्ती साईकिल से ९: दूसरा शतक. . . 
दोस्ती साईकिल से १०: एक चमत्कारिक राईड- नर्वस नाइंटी!  
दोस्ती साईकिल से ११: नई सड़कों पर साईकिल यात्रा!  
दोस्ती साईकिल से १२: तिसरा शतक- जीएमआरटी राईड 
दोस्ती साईकिल से १३: ग्रामीण सड़कों पर साईकिल राईड
दोस्ती साईकिल से: १४ "नई साईकिल" से नई शुरुआत
दोस्ती साईकिल से: १५: औंढा नागनाथ के साथ चौथा शतक
दोस्ती साईकिल से: १६: पाँचवा शतक- लोअर दुधना डैम


एक ड्रिम माउंटेन राईड- साक्री से नन्दुरबार

जब जून- जुलाई २०१४ में महाराष्ट्र के नन्दुरबार में फिल्ड एसाईनमेंट कर रहा था, तब कई बार आसपास के पहाड़ में साईकिल चलाने का सपना देखता था| सातपुड़ा पर्वत शृंखला वहाँ से दूर न थी! काफी डे ड्रिमिंग करता रहा| आखिर वैसा मौका आया| फिल्ड एसाईनमेंट के आखरी चरण में जाने के लिए परभणी से निकला तब साईकिल भी साथ थी| १७ अगस्त को अच्छा शतक होने से हौसला बढ़ा है| २० अगस्त की दोपहर को परभणी से निकला| यहाँ से सिधी बस नंदुरबार नही जाती है| नंदुरबार के पास साक्री नाम के गाँव तक जाती है| वहाँ तक साईकिल बस पर लाद कर ले जाऊँगा और वहाँ से साईकिलिंग शुरू करूँगा| पहली बार बस से इतनी दूर राईड के लिए साईकिल ले जा रहा हूँ!

रास्ते में जहाँ कभी देखने का मौका मिले, साईकिल की स्थिति देखने की कोशिश कर रहा हूँ| छाँव से पता चले की साईकिल सकुशल उपर बँधी है या किसी शोरूम की ग्लास से दिखे की साईकिल ठीक है, तब थोड़ा सुकून मिलता है| सरकारी बस के झटके साईकिल कैसे झेल रही होगी, यह प्रश्न जरूर मन में है! लेकिन यात्रा ठीक रही| अपेक्षाकृत सुबह चार बजे साक्री गाँव के बस अड्डे पर पहूँचा| अब पहला सवाल साईकिल नीचे उतारने का है| घोर रात होने के कारण बस बस अड्डे के बाहर ही रूकी है| साईकिल नीचे उतारने के लिए कोई भी नही है! मैने उपर जा कर उतारने का सोचा| लेकिन कोई आयडीया नही था| फिर कंडक्टर ने ही थोड़ी सहायता की| उसने उपर जा कर साईकिल नीचे मेरे हाथ में दी| जैसे तैसे साईकिल नीचे आ गई| वहाँ कुछ सैलानी बैठे हैं| उनकी सहायता माँगी, पर वे भौचक्के देखते रहें| खैर|









Monday, February 29, 2016

दोस्ती साईकिल से १६: पाँचवा शतक- लोअर दुधना डैम


दोस्ती साईकिल से १: पहला अर्धशतक
दोस्ती साईकिल से २: पहला शतक
दोस्ती साईकिल से ३: नदी के साथ साईकिल सफर
दोस्ती साईकिल से ४: दूरियाँ नज़दिकीयाँ बन गईं. . . 
दोस्ती साईकिल से ५: सिंहगढ़ राउंड १. . . 
दोस्ती साईकिल से ६: ऊँचे नीचे रास्ते और मन्ज़िल तेरी दूर. . . 
दोस्ती साईकिल से ७: शहर में साईकिलिंग. . . 
दोस्ती साईकिल से ८: सिंहगढ़ राउंड २! 
दोस्ती साईकिल से ९: दूसरा शतक. . . 
दोस्ती साईकिल से १०: एक चमत्कारिक राईड- नर्वस नाइंटी!  
दोस्ती साईकिल से ११: नई सड़कों पर साईकिल यात्रा!  
दोस्ती साईकिल से १२: तिसरा शतक- जीएमआरटी राईड 
दोस्ती साईकिल से १३: ग्रामीण सड़कों पर साईकिल राईड
दोस्ती साईकिल से: १४ "नई साईकिल" से नई शुरुआत
दोस्ती साईकिल से: १५ दोस्ती साईकिल से १५: औंढा नागनाथ के साथ चौथा शतक

पाँचवा शतक- लोअर दुधना डैम

१२ अगस्त २०१४ को नई साईकिल से पहला शतक करने के बाद साईकिलिंग जारी रही| छोटी छोटी राईडस लगातार करता रहा| जल्द ही अगले शतक के लिए साईकिल उठायी| इस बार करीब ६० किलोमीटर दूर स्थित लोअर दुधना डैम देखने जाऊँगा| कुल मिला कर १२० किलोमीटर होंगे| लगातार कई दिन साईकिल चलाने के कारण अब शरीर काफी हद तक अभ्यस्त भी हो गया है|

१७ अगस्त की भोर में निकला| अब पंक्चर किट साथ में ले कर जा तो रहा हूँ, लेकिन उसका प्रयोग करना ही नही जानता! सुबह की ठण्ड में मेरे साथ और भी कुछ साईकिलबाज हैं जो कुछ देर तक साथ रहेंगे| चलने के कुछ देर बाद लगा की साईकिल की सीट और उपर करनी चाहिए जिससे पेडल पर अधिक बल आएगा| सीट अधिकतम ऊँची कर ली| शुरू में बैठने में और साईकिल चलाने में दिक्कत हुई| लेकिन जल्द ही जैसे पैर लय में आ गए, पहले से अधिक बल मिलने लगा| अधिक ऊँचाई से पैर नीचे आने के दो लाभ अब मिलेंगे- एक तो पेडल पर फोर्स अधिक होगा और दूसरा पैर पूरा नीचे आएगा और इसलिए घूटने में दर्द भी नही होगा| हालाकि अब इतनी साईकिलिंग करने के बाद कुछ गुर्र तो सीख गया हूँ| साईकिल चलाते चलाते बीच बीच में बारी बारी से एक एक हाथ और पैर को थोड़ा विश्राम भी देता हूँ| उतराई हो तब बारी बारी से पैर नीचे सीधा कर के रखता हूँ| बारीश तो नही है, लेकिन बारीश जैसा खुशनुमा मौसम जरूर है|





Friday, February 26, 2016

दोस्ती साईकिल से १५: औंढा नागनाथ के साथ चौथा शतक


दोस्ती साईकिल से १: पहला अर्धशतक
दोस्ती साईकिल से २: पहला शतक
दोस्ती साईकिल से ३: नदी के साथ साईकिल सफर
दोस्ती साईकिल से ४: दूरियाँ नज़दिकीयाँ बन गईं. . . 
दोस्ती साईकिल से ५: सिंहगढ़ राउंड १. . . 
दोस्ती साईकिल से ६: ऊँचे नीचे रास्ते और मन्ज़िल तेरी दूर. . . 
दोस्ती साईकिल से ७: शहर में साईकिलिंग. . . 
दोस्ती साईकिल से ८: सिंहगढ़ राउंड २! 
दोस्ती साईकिल से ९: दूसरा शतक. . . 
दोस्ती साईकिल से १०: एक चमत्कारिक राईड- नर्वस नाइंटी!  
दोस्ती साईकिल से ११: नई सड़कों पर साईकिल यात्रा!  
दोस्ती साईकिल से १२: तिसरा शतक- जीएमआरटी राईड 
दोस्ती साईकिल से १३: ग्रामीण सड़कों पर साईकिल राईड
दोस्ती साईकिल से: १४ "नई साईकिल" से नई शुरुआत


औंढा नागनाथ के साथ चौथा शतक

अगस्त २०१४ के पहले हप्ते में नई साईकिल की अच्छी राईडस शुरू की| पहले एक ३८ किलोमीटर की राईड थोड़े कम स्तर के रोड पर की| वहाँ पहले घण्टे में सोलह किलोमीटर चला पाया और उसके बाद रफ्तार एकदम धिमी हो गई| जरूर अभी तक इस साईकिल से शरीर अभ्यस्त नही हुआ है| अगली राईड फिर झिरो फाटा की तरफ की| इस बार तो पहले से अधिक समय लगा| पहले घण्टे की रफ्तार और दूसरे घण्टे की रफ्तार के बीच बड़ा अन्तर रहा|

अब एक बड़ी राईड करने का मन है| इस साईकिल में बड़ी राईड सहज तो नही होगी|‌ इसलिए मात्र सौ किलोमीटर की योजना बनायी- घर से औंढा नागनाथ इस ज्योतिर्लिंग तक| १०२ किलोमीटर होंगे| नई साईकिल से अभ्यास भी हो जाएगा और इस साईकिल चलाने के बारे में समझ भी बढ़ेगी| १२ अगस्त को सुबह छह बजे घर से निकला| बारिश के दिन तो हैं, पर बारिश आँखमिचौली खेल रही है| सुबह के ताज़गीभरे माहौल में साईकिलिंग करने का बड़ा मज़ा आ रहा है| आज साईकिल तिसरे गेअर पर नही चलाऊँगा| ज्यादा तर २-५, २-६ काँबीनेशन्स ही इस्तेमाल करूँगा| परभणी के कुछ साईकिलिस्ट भी साथ हैं|करीब एक घण्टे में झिरो फाटा क्रॉस कर लिया| यहाँ से आगे रास्त भी थोड़ा कम स्तर का है और अब सोलो राईड होगी|




Tuesday, February 23, 2016

दोस्ती साईकिल से: १४ "नई साईकिल" से नई शुरुआत

दोस्ती साईकिल से १: पहला अर्धशतक
दोस्ती साईकिल से २: पहला शतक
दोस्ती साईकिल से ३: नदी के साथ साईकिल सफर
दोस्ती साईकिल से ४: दूरियाँ नज़दिकीयाँ बन गईं. . . 
दोस्ती साईकिल से ५: सिंहगढ़ राउंड १. . . 
दोस्ती साईकिल से ६: ऊँचे नीचे रास्ते और मन्ज़िल तेरी दूर. . . 
दोस्ती साईकिल से ७: शहर में साईकिलिंग. . . 
दोस्ती साईकिल से ८: सिंहगढ़ राउंड २! 
दोस्ती साईकिल से ९: दूसरा शतक. . . 
दोस्ती साईकिल से १०: एक चमत्कारिक राईड- नर्वस नाइंटी!  
दोस्ती साईकिल से ११: नई सड़कों पर साईकिल यात्रा!  
दोस्ती साईकिल से १२: तिसरा शतक- जीएमआरटी राईड 
दोस्ती साईकिल से १३: ग्रामीण सड़कों पर साईकिल राईड




दोस्ती साईकिल से १४: "नई साईकिल" से नई शुरुआत

मार्च २०१४ में काफी साईकिल चलायी थी| लेकिन जैसे तय हो गया की इस बार लदाख़ को साईकिल पर नही जा सकूँगा, एकदम से बड़ा अन्तराल आ गया| साईकिल रूक ही गई| मार्च में एक लय में साईकिल चलायी थी, एक टेंपो आ गया था और अचानक से बड़ा विराम आया| जैसे कोई बल्लेबाज इनिंग की बुनियाद खड़ी करने के बाद अचानक आउट हो जाए! लेकिन ऐसा ही होता है! हमको लगता है कि हम सब करते हैं, सब हम ही कर रहे हैं| लेकिन वास्तव में बहुत कुछ 'होता' है या हम जो 'करते' है; वह भी 'होता' ही है| इसलिए जब साईकिल चलाना नही हो रहा था, तो नही हुआ| बड़े अन्तराल के बीच मई महिने में सिर्फ एक बार साईकिल उठायी थी| बेमौसम बारीश में साईकिल का लुफ्त लिया था| खैर





Monday, December 28, 2015

दोस्ती साईकिल से १३: ग्रामीण सड़कों पर साईकिल राईड


दोस्ती साईकिल से १: पहला अर्धशतक
दोस्ती साईकिल से २: पहला शतक
दोस्ती साईकिल से ३: नदी के साथ साईकिल सफर
दोस्ती साईकिल से ४: दूरियाँ नज़दिकीयाँ बन गईं. . . 
दोस्ती साईकिल से ५: सिंहगढ़ राउंड १. . . 
दोस्ती साईकिल से ६: ऊँचे नीचे रास्ते और मन्ज़िल तेरी दूर. . . 
दोस्ती साईकिल से ७: शहर में साईकिलिंग. . . 
दोस्ती साईकिल से ८: सिंहगढ़ राउंड २! 
दोस्ती साईकिल से ९: दूसरा शतक. . . 
दोस्ती साईकिल से १०: एक चमत्कारिक राईड- नर्वस नाइंटी!  
दोस्ती साईकिल से ११: नई सड़कों पर साईकिल यात्रा!  
दोस्ती साईकिल से १२: तिसरा शतक- जीएमआरटी राईड  


ग्रामीण सड़कों पर साईकिल राईड

२०१४ के मार्च में अच्छी साईकिलिंग जारी रही| शतक करने के दो दिन बाद और एक राईड हुई| पुणे जिले के ग्रामीण इलाकों में गाँवों को जोडनेवाली सड़कों पर भी साईकिल चलायी| हर एक राईड का अपना अलग मज़ा होता है| और यदि एक ही रूट पर भी‌ साईकिल चला रहे हैं, तो भी हर दिन का अलग मज़ा होता है|

इस राईड के लिए दोपहर साढ़े तीन बजे निकला| बड़ी राईड की योजना नही है, बस चालिस किलोमीटर तक घूमना है| गूगल मैप पर रूट तय किया और निकला| इस राईड में दो डैम दिखेंगे| भामा असखेड डैम के रोड पर जाऊँगा और उसे दूर से ही‌ देख कर वापस आऊँगा| आते समय जाधववाडी डैम के पास से और फिर भण्डारा हिल के पीछे से आनेवाली सड़क से आऊँगा| सामान्य, कच्ची और खराब सड़क पर से साईकिल जाएगी| मार्च महिना होने के कारण गर्मी बढ़ रही है और इसलिए हरियाली के बजाय रुखापन अधिक दिखा|


हाल ही में दिवंगत हुए किसान नेता शरद जोशी जी का घर





Friday, December 25, 2015

दोस्ती साईकिल से १२: तिसरा शतक- जीएमआरटी राईड


दोस्ती साईकिल से १: पहला अर्धशतक
दोस्ती साईकिल से २: पहला शतक
दोस्ती साईकिल से ३: नदी के साथ साईकिल सफर
दोस्ती साईकिल से ४: दूरियाँ नज़दिकीयाँ बन गईं. . . 
दोस्ती साईकिल से ५: सिंहगढ़ राउंड १. . . 
दोस्ती साईकिल से ६: ऊँचे नीचे रास्ते और मन्ज़िल तेरी दूर. . . 
दोस्ती साईकिल से ७: शहर में साईकिलिंग. . . 
दोस्ती साईकिल से ८: सिंहगढ़ राउंड २! 
दोस्ती साईकिल से ९: दूसरा शतक. . . 
दोस्ती साईकिल से १०: एक चमत्कारिक राईड- नर्वस नाइंटी!  
दोस्ती साईकिल से ११: नई सड़कों पर साईकिल यात्रा!  


तिसरा शतक- जीएमआरटी राईड


२०१४ के मार्च माह में पुणे जिले के चाकण क्षेत्र में अच्छी राईडस हुई| कुछ दिन लगातार साईकिल चलायी- लगभग हर रोज तीस चालिस किलोमीटर साईकिल चलायी| अब फिर बड़ी राईड की योजना बनायी- इस बार पुणे जिले में नारायणगाँव के पास जीएमआरटी अर्थात् Giant Meterwave Radio Telescope देखने जाना है| यह एक रेडिओ दुरबीन है और उसे देखने की इच्छा बरसों से थी| अब सोच रहा हूँ कि साईकिल पर ही वहाँ जाऊँ| चाकण में मै इन दिनों जहाँ रह रहा हूँ, वहाँ से यह करीब बावन किलोमीटर होगा|

सुबह सूरज उगने के समय निकला| पुणे- नाशिक हायवे पर ट्रैफिक कम है| सुबह की ताज़गी और रमणीय माहौल! भामा और भीमा नदियों को पार कर राजगुरूनगर पहूँच गया| यह क्रांतिकारी राजगुरू का गाँव है| अब यहाँ से यह हायवे सिंगल लेन होगा| इसपर बड़ी हेवी ट्रैफिक रहती है| पहले कुछ डर लगा, लेकिन फिर कोई दिक्कत नही आयी| गाँव में होटल ढूँढे, पर वे अभी बन्द है| कई बार ऐसा होता है कि हम होटल पसन्द करने में समय लगाते हैं और सभी होटल पीछे छूट जाते हैं! कुछ ऐसा ही हुआ और गाँव पीछे गया, लेकिन 'अच्छा' होटल नही मिला| थोड़ी देर बाद हायवे पर एक होटल मिला| नाश्ता कर आगे बढ़ा| यहाँ अब एक छोटा घाट है|







Monday, December 21, 2015

दोस्ती साईकिल से ११: नई सड़कों पर साईकिल यात्रा


दोस्ती साईकिल से १: पहला अर्धशतक
दोस्ती साईकिल से २: पहला शतक
दोस्ती साईकिल से ३: नदी के साथ साईकिल सफर
दोस्ती साईकिल से ४: दूरियाँ नज़दिकीयाँ बन गईं. . . 
दोस्ती साईकिल से ५: सिंहगढ़ राउंड १. . . 
दोस्ती साईकिल से ६: ऊँचे नीचे रास्ते और मन्ज़िल तेरी दूर. . . 
दोस्ती साईकिल से ७: शहर में साईकिलिंग. . . 
दोस्ती साईकिल से ८: सिंहगढ़ राउंड २! 
दोस्ती साईकिल से ९: दूसरा शतक. . . 
दोस्ती साईकिल से १०: एक चमत्कारिक राईड- नर्वस नाइंटी!  

नई सड़कों पर साईकिल यात्रा

२०१४ के फरवरी माह में सिर्फ दो राईडस की- ११२ और ९३ किलोमीटर की| लेकिन अब धीरे धीरे लग रहा है कि नियमित रूप से साईकिल चलानी चाहिए| मार्च में कुछ दिन पुणे के चाकण के पास रहना हुआ| वहाँ साईकिल ले कर ही गया| इस दौरान काफी साईकिल चलायी| कई नई सड़कों पर यात्रा की| पुणे के डिएसके विश्व से निकलने के पहले लगातार दो बार डिएसके का क्लाईंब पार किया| अब ऐसी साधारण चढाई की आदत हो गई है| उसी दिन पुणे से चाकण जाते समय ही एक घाट रास्ते से गया- विश्रांतवाडी- आळंदी- चाकण| विश्रांतवाडी के आसपास मिलिटरी के कई स्थान है- बाँबे सॅपिअर्स, मिलिटरी इंजिनिअरिंग कॉलेज और अन्य| मिलिटरी के परिसर से जाते समय एक अलग अहसास होता है! जल्द ही लदाख़ में साईकिल चलाने के बारे में सोच रहा हूँ| मिलिटरी के जवान देख कर और हौसला बढ़ता है| आळंदी के बाद का घाट छोटा ही है| मुश्किल से ढाई किलोमीटर लम्बाई होगी और चढाई भी कम है| लेकिन नजारा बहुत सुन्दर| और खास बात यह कि सड़क पर यातायात बहुत कम है|‌ साईकिल चलानेवालों के लिए ट्रैफिक की दिक्कत बहुत होती है| हायवेज पर सड़क की गुणवत्ता अच्छी होने के बावजूद ट्रैफिक का डर लगता है| लेकिन ऐसे रास्ते हो तो बहुत मज़ा आता है| बिना कोई तकलीफ हुए पचास से अधिक किलोमीटर हो गए और चाकण पहुँच गया|